मेरे संस्मरण

# सफलता का रहस्य #

और वह समय भी आ गया जब तालियों के गडगडाहट के बीच मेरा नाम पुकारा गया ..स्टेज पर आ कर पुरस्कार स्वरुप ट्राफी ग्रहण करने के लिए | अवसार था, दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में आयोजित बैंक के… Read More ›

# मेरी आवाज़ सुनो #

मैं दशरथ हूँ | मेरा एक भरा पूरा परिवार है | मेरे चार बेटे है | राम, लक्ष्मण भारत और शत्रुघ्न | मैं एक कंपनी में नौकरी करता था और अब रिटायर हो कर घर परिवार के साथ जीवन व्यतीत… Read More ›

# आप तो ऐसे न थे #

ज़िन्दगी में कभी कभी ऐसे  लम्हे आते है  जब जो हम अपने आप को  तरो ताज़ा महसूस करते है | उन पलों  में हम अपने सभी तरह की परेशानी भूल जाते है | सच्चा दोस्त और सच्चा प्यार में बहुत… Read More ›

# अलमारी से झांकती किताबें #

यूँ ना छोड़ ज़िन्दगी की किताब को खुला बेवक्त की हवा ना जाने कौन सा पन्ना पलट दे .. आज सुबह सुबह जब मैं पार्क में टहलने गया तो  कुछ दोस्त वहाँ  मिल गए , दुआ सलाम के बाद हमलोग… Read More ›

# एक किताब का दर्द #

मैं एक किताब हूँ , .कोई मुझे  “दिल की किताब” कहता है तो कोई दिल से लगा कर रखता है | मैं हर तरह के लोगों के लिए बनी  हूँ | जो जैसा पसंद करे वैसा बनकर उसके दिल के … Read More ›

एक सवाल ..

(के. के.. की कहानी … के. के. की जुबानी ) दोस्तों,..तुम्हारा दोस्त कृष्णा कुमार उर्फ़ के. के. आज तुम सबों के बीच  हाज़िर है अपने संस्मरण के साथ,   जिसका शीर्षक है  “एक सवाल” .. आजकल व्हाट्सअप पर vijay verma का… Read More ›

# इस रिश्ते को क्या नाम दूँ # …26

आज तीन दिनों की छुट्टी के बाद बैंक खुला, तो भीड़ होना स्वाभिक था | मैं कुछ परेशान सा ब्रांच को सामान्य करने की कोशिश कर रहा था | तभी मेरे चैम्बर में फ़ोन की घंटी बज उठी |  मैं… Read More ›

# संघर्ष ही ज़िन्दगी है #..25

आज शिवगंज शाखा में मेरा पहला दिन | मैं अपनी सीट पर बैठने वाला था कि चपरासी “कालू राम” दौड़ता हुआ मेरे पास आया और बोला आप इस सीट पर बैठने के पहले हमलोगों का मुँह मीठा तो करा दीजिये… Read More ›

# मैं मजबूर हूँ #

मैं पटना के अशोक राजपथ ब्रांच में अभी अभी कार्यभार  संभाला था और बैंक डिपाजिट का टारगेट पूरा करने के लिए काफी दबाब था / तब मेरे एक स्टाफ ने सुझाया की बिजली विभाग में काफी फण्ड रहता है और… Read More ›

# दिल की बातें # …24

हमलोग  “महावीर टाकीज़” से मूवी देख कर निकलते हुए काफी खुश थे | ना जाने कितने दिनों बाद आज मूवी देखने का मौका मिला था, वो भी दोस्तों के साथ | शिवगंज में रहने से एक फायदा यह भी है… Read More ›