सकारात्मक विचार…9

गरीबों की सुनो

दोस्तों ,

मैं आशा करता हूँ कि आप सभी अपने अपने कामों में व्यस्त रहते हुए भी ज़िन्दगी का लुफ्त उठा रहे होंगे |

आज मैं आप सबों को शहर से दूर एक गाँव में ले चलता हूँ जहाँ रेलवे ट्रैक के किनारे बने हुए झुग्गी झोपड़ियों में रहने को विवश लोग किसी तरह अपना जीवन यापन करते है |

साधारणतया बहुत से घरों में फालतू के कपडे पड़े रहते है जिनका घर वालों के लिए कोई उपयोग नहीं होता है |

खास कर बच्चों के कपडे जो बहुत जल्द छोटे पड़ जाते है …और उपयोग से बाहर हो जाते है | …इन बचे हुए कपड़ों को घर वाले समझ नहीं पाते है कि इनका क्या करें |

 सच तो यह भी है कि इन सभी फालतू कपड़ो को घर में रखना भी संभव नहीं हो पाता है |

मैंने ने सोचा कि इसका सबसे अच्छा और उपयुक्त उपाय यह है कि इन्हें उन गरीबों में बाँट दिया जाए, जो कपड़ो के आभाव में अर्ध नग्न रहते है और ठण्ड में ठिठुरते रहते है |

चूँकि दिवाली  का समय था, और हमलोग अपने घरों की सफाई में व्यस्त थे | इसी दौरान यह विचार दिमाग में आया कि क्यों न हम सब भी अपने घरों से उपयोग में नहीं आने वाले कपडे एक जगह इकट्ठा करें और इन्हें ले जा कर रेलवे किनारे बसे झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों को बाँट दें …

बस फिर क्या था,  हमलोग यह सोच कर फालतू के सारे कपड़े  और अन्य सामान इकट्ठा किया और इन्हें लेकर झुग्गी – झोपडी एरिया में पहुँच गए …

यह कल्याणी के पास का  इलाका जहाँ हमलोगों ने देखा कि  15- 20  झुग्गी झोपडी रेलवे  ट्रैक के किनारे बनाकर लोग रहते है और किसी तरह अपना गुज़ारा करते है |

ठण्ड के मौसम में भी  किसी के तन पर  ठीक से कपडे नहीं थे |  

शायद इनका शरीर  इस ठण्ड के मौसम को भी झेल लेता है | इनका इम्युनिटी सिस्टम इतना मजबूत होता है कि इन्हें न मास्क की ज़रुरत है और ना सेनितिजर की | बच्चे मस्त होकर अध  नंगे वहाँ खेल रहे थे |

उनके चेहरे पर ख़ुशी थी, आधी पेट खा कर भी आनंद से जीना जानते है शायद  |

हमलोगों ने जैसे ही अपनी गाड़ी उनलोगों के पास रोकी,  …तो बच्चे ..बूढ़े .. औरत … मर्द सभी दौड़ कर हमलोग की गाड़ी के पास आ गए | उन्हें एहसास हो गया था कि उनके लिए हमलोग कुछ लेकर आये है |

हमलोगों ने जब अपने बैग से बांटने हेतु कपडे निकाले तो वे लोग लेने के लिए टूट पड़े और आपस में धक्का मुक्की करने लगे |

वैसे तो ये गरीब लोग सब साथ रहते है लेकिन इस ठण्ड के मौसम में अपने बच्चो के कपडे के लिए आपस में लड़ने को उतारू हो गए |

सबों के हाथ में कुछ कपडे मिले जिसे पाकर उनके चेहरे पर ख़ुशी बिखर गई | उनके चेहरे पर ख़ुशी देख कर हम सबों को भी एक  अजीब सा ख़ुशी का अनुभव हो रहा था |

मेरे मन में विचार आया कि क्यों ना समय – समय पर आकर इनलोगों की मदद की जाए |

मैंने वहीँ फैसला किया कि प्रत्येक सप्ताह यहाँ आऊंगा और उनके लिए कपड़ों के अलावा भी कुछ अन्य आवश्यक वस्तुएं और उनके खाने पीने  की कुछ पैकेट इनलोगों में वितरण करूँगा |

और इसी बहाने इनलोगों के बीच  साफ़ सफाई के बारे में और बिमारियों से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने और बच्चो की पढाई लिखाई के बारे में भी समझाने का प्रयास करूँगा |

हालाँकि मैं समझता हूँ कि यहाँ NGO लोग भी इस तरह की ज़रूर मदद करते होंगे |

लेकिन हम लोग भी इस नेक  काम में अपनी भागीदारी निभा कर और उनके लिए कुछ कर  के ना सिर्फ पुण्य कमा सकते है बल्कि एक आन्तरिक ख़ुशी भी महसूस कर सकते है

तो नए साल में मैंने इस तरह के कामों को समय समय पर करते रहने का निश्चय किया है ,…मेरे इस फैसले के बारे में आप की क्या राय है ….हमें कमेंट कर ज़रूर बताएं ….

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हर ब्लॉग कुछ कहता है …13

मैं और मेरा ब्लॉग

आज मोर्निंग वाक से फ्री होकर जब मैं ब्लॉग लिखने बैठा तो मेरे एक हाथ में चाय थी और दुसरे हाथ में अखबार |

मैं आज के अखबार पर सरसरी नज़र डाल ही रहा था कि उसके एक शीर्षक के ऊपर मेरी नज़र अटक गई |

हम बीते साल के अंतिम पडाव पार कर चुके है और नया साल २०२१ में प्रवेश कर चुके है | तो

ऐसे में पुरे साल का लेखा जोखा तो होना ही था ताकि बीते साल की उपलब्धियों और तकलीफ देय घटनाओं का मूल्यांकन किया जा सके. |

मेरे दिमाग में भी इस तरह के ख्याल आने लगे  और मैंने सोचा कि मेरा भी यह ब्लॉग एक साल पूरा करने जा रहा है |  अतः मुझे भी इच्छा हुई कि आज मैं अपने इस ब्लॉग की यात्रा के बारे में  आपसे चर्चा करूँ. |

आज जब ब्लॉग के वर्तमान स्थिति का अध्ययन करने लगा तो मुझे इसके उपलब्धियों (achievement) को देख कर ख़ुशी महसूस हो रही है, क्योकि सिर्फ एक साल में ही मैंने 360 ब्लॉग लिख डाले, जिसे मैं अपनी उपलब्धि मान सकता हूँ |

और सबसे बड़ी बात कि इसमें 50,000 से ज्यादा  व्यू (views ) भी आये और   170 से ज्यादा  फोलोवर (Follower) भी  बने  |

यह इस बात को दर्शाता है कि आपलोगों ने मेरी लेखनी को पसंद किया है | मुझ जैसे नौसिखिये  के लिए तो  यह बहुत ख़ुशी की बात है |

मैंने  जब इस ब्लॉग की शुरुआत की थी तो उस समय  ब्लॉग के बारे में ज्यादा कुछ जानता भी नहीं था |  मैंने  तो अपनी सारी ज़िन्दगी बैंकिंग सेवा से गुजार दी |

लिखने – पढने का समय नहीं निकाल सका था | लेकिन बचपन से लिखने – पढने का शौक मेरे अन्दर मौजूद  था | 

रिटायरमेंट के बाद अपने खाली  समय का उपयोग करने का मौका अभी मिला तो मैं इस दबी हुई इच्छा को परवान चढ़ाया |

हालाँकि रिटायरमेंट के बाद कुछ दिनों तक बिना काम के खाली घर में  बैठे रहने से कुछ चिडचिडा हो गया था और  मैं इस मुसीबत का समाधान ढूंढ ही रहा था तभी मेरे एक मित्र ने मुझे सुझाव दिया कि आप लोगों से सोशल मीडिया के द्वारा जुड़े रहने के लिए blogging शुरू कर सकते है |

इससे आप अपने समय का सदुपयोग रचनात्मक कार्यों के लिए कर सकेंगे |

 आप के पास जीवन का  एक लम्बा अनुभव है ,उसे आप इस ब्लोगिंग के माध्यम से लोगों के साथ अपने अनुभव  शेयर कर सकते है | अपने विचार व्यक्त कर सकते है जिसे पढ़ कर लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा |

मुझे अपने दोस्त की बात पसंद आई और मैंने मन ही मन इस क्षेत्र में ध्यान देने का फैसला कर लिया |

मैं धड़कते दिलो से और एक अंजाना डर के साथ अपने इस ब्लॉग की शुरुआत कर दी |

आज जब मैं इसके  उपलब्धियों पर गौर करता हूँ तो खुद भी मुझे विश्वास नहीं होता है |

मेरे साथ मित्रों ने भरपूर सहयोग दिया है | मैं मित्रों के कहने पर इस क्षेत्र में कदम रखा था | और अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा है  | मुझे रोज़ अपने दोस्तों के कमेंट्स का इंतज़ार रहता है |

सच कहूँ तो  मैं अपने मित्रो का शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने हर कदम पर  मेरा साथ दे रहे है, चाहे अपनी कमेंट्स या अपना अनुभव से मेरा मार्ग दर्शन कर रहे है |.

मैं आप सब लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ |

सबसे पहले तो ब्लॉग  किस नाम से शुरू करूँ ..यह एक समस्या थी | तभी  मेरे ज़ेहन में यह बात आयी कि मैं एक रिटायर्ड बैंकर हूँ और मेरी कलम से निकले  शब्दों को आप तक पहुँचाना मेरा मकसद है,  इसीलिए मैंने इसका नाम दिया ….RETIRED KALAM .COM ..

इस  ब्लॉग में मैंने अपने अनुभव के विभिन्न रंगों को बिखेरने के लिए  विभिन्नं तरह के केटेगरी (category) बना रखी है जैसे …

  • कहानी,
  • कविता ,
  • हर ब्लॉग कुछ कहता है
  • स्वस्थ रहना ज़रूरी है
  • Me and my Art
  • मेरे संस्मरण
  • आज मैंने पढ़ा,  इत्यादि

आपको ये केटेगरी  कैसे लगते है ज़रूर बताएं, या कोई अच्छा टॉपिक या केटेगरी का सुझाव दें तो मुझे बहुत ख़ुशी होगी |

मैं अपने को भाग्यशाली समझता हूँ कि आप सब लोग मुझे हर पल , हर कदम  Blog लिखने में मदद को तैयार रहते है |

इसके अलावा मैं अपनी स्वरचित कविताओं को भी प्रकाशित करने लगा हूँ | और सबसे बड़ी बात कि  इसके अलावा ड्राइंग और पेन्टिंग (drawing and painting) की भी मैंने एक केटेगरी बना रखी है जिसमे खुद के द्वारा बनाये गए ड्राइंग..| पेन्टिंग  पोस्ट करता हूँ |

मुझे बहुत सराहना भी आप लोगों के द्वारा मिलती है, जिसे पाकर मेरा मन हमेशा तरो – ताज़ा और खुश रहता है | अब तो यह ब्लॉग लेखन  मेरे जीवन का एक हिस्सा बन गया है |

हालाँकि  ब्लॉग की बारीकियों के बारे में अभी भी ज्यादा कुछ भी नहीं जानता हूँ,  लेकिन नित्य दिन  कुछ न कुछ  नया सिख रहा हूँ और रोज़ कुछ न कुछ अनुभव प्राप्त कर रहा हूँ |

आप मेरे इस ब्लॉग के बारे में कैसा महसूस करते है मुझे कमेंट्स के माध्यम से अवश्य बताएं, मुझे ख़ुशी होगी |

 नया साल २०२१ के अवसर पर मैं यही कहना चाहता हूँ कि ..

आप की आँखों में सजे है  जो भी सपने

और दिल में छुपी है जो भी अभिलाषाएं

यह नया साल इसे सच बनाये …

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं …..

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मेरी श्रद्धांजलि

और दिनों की तरह आज भी जब मैं  मोर्निंग वाक से वापस आया तो मन बिलकुल तरो ताज़ा था क्योकि मोर्निंग वाक के दौरान मैं कुछ spiritual बातें मोबाइल के द्वारा सुनता रहता हूँ | जिसको सुन कर मन शांत हो जाता है और ख़ुशी की अनुभूति होती है |

घर आकर अपने रीडिंग टेबल पर बैठ अपने मोबाइल में खो गया

उनलोगों  के ज़बाब चेक (check) करने लगा, जिसे कल मैंने  “हैप्पी न्यू इयर “ का मेसेज भेजा था …उन्हें सकुशल रहने की कामना किया था |

कुछ लोगों के जबाब तो आये, मतलब उन्होंने भी मेरे सकुशल रहने की कामना की थी |

यह सत्य है कि दोस्तों और अपनों से मिले दुआएं और आशीर्वाद ही हमें खुश और तंदरुस्त रखते है |

लेकिन अचानक एक जगह व्हाट्स अप (WhatsApp) पर मैं रुक गया |  उसने मेरे मेसेज का ज़बाब नहीं दिया था, शायद मेसेज भी नहीं देखा था |

मुझे बहुत दुःख हुआ और नाराजगी भी हुई कि जिसके साथ वर्षों बैंक में काम किया और दुःख सुख के कई पलों को साथ साँझा किया |

उसने तो जबाब ही नहीं दिया और ना ही फ़ोन ही किया …और तो और उसने मेरे न्यू इयर मेसेज को देखा तक नहीं |

मैं दुखी मन यही सब सोच रहा था कि तभी मेरे मोबाइल में ट्रिंग ट्रिंग की घंटी बजी .. शायद कोई मेसेज आया था |

मैं मेसेज खोल कर देखा तो मैं स्तब्ध रह गया | मुझे अपने आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ |

अशोक दा का मेसेज था  …लिखा था.... Do you remember Partho ? He expired yesterday.  

मेरे लिए यह सुचना स्तब्ध करने वाला था | मैं तुरंत अशोक दा को वापस फ़ोन लगाया तो उसने इस बात की पुष्टि की |

 मेरा तो उससे रोज़ मेसेज का आदान प्रदान हो रहा था और अचानक आज सब कुछ ख़त्म |

लेकिन जीवन का यह भी एक कटु सत्य है, …. रात बारह बजे तक तो उसने न्यू इयर की पार्टी की थी .., फिर रात देरी से सोया …क्योकि दोस्तो के संग बिताये नए साल का जश्न याद करते हुए सोना नहीं चाहता था, यह दिन तो साल में एक बार ही आता है दोस्तों के साथ ख़ुशी मनाने के लिए….

शायद  सोचते सोचते उसकी आँख लग गयी होगी लेकिन कुछ ही पलों बाद शायद चार बजे भोर में हार्ट अटैक हुआ और कुछ ही पलों में सब कुछ समाप्त हो गया |

वह अलविदा कह गया |

यह सवाल कि सचमुच ज़िन्दगी इतना unpredictable क्यों हो गयी है, समझ में नहीं आता …  

आप खुशियाँ मनाएँ नए साल में

बस हँसे, मुस्कुराएँ नए साल में

गीत गाते रहें, गुनगुनाते रहें

हैं ये शुभ-कामनाएं नए साल में..

लेकिन

 कैसे खुशियाँ मनाये नए साल में ,

तुम अलविदा कह गए नए साल में

कैसे गीत गाएं , कैसे गुनगुनाएं नए साल में

हँसता मुस्कुराता दोस्त छोड़ गया नए साल में ,

तुम्हे लम्बी उम्र की दुआ देता नए साल में

लेकिन, नींद से जगे ही नहीं नए साल में ..

आज मैं कुछ ज्यादा ही भावुक हो गया हूँ  क्योंकि मेरे परम मित्र पार्थो प्रतिम मित्रा के निधन का समाचार सुन कर गहरा दुःख हो रहा है |

यह हम सब के लिए एक  अपूरणीय क्षति है |

भगवान् दिवंगत आत्मा को शांति दें, और उनके परिवार को इस दुःख की घडी को सहने की हिम्मत प्रदान करे

 भावभीनी श्रधांजलि

ॐ शांति ॐ

और मूंछ कट गयी….

दोस्तों कभी कभी कुछ घटनाएँ ज़िन्दगी में ऐसी घटती है कि वह हमेशा के लिए दिलो दिमाग पर छा जाती है |

आज जीवन में घटी एक सच्ची  घटना का  वृत्तांत आप सबों  के समक्ष प्रस्तुत करने जा रहा हूँ जिसे पढ़ कर आपको अवश्य मजा आएगा |

जब यह घटना मेरे साथ घटित हुई थी तो मुझे पहले तो बहुत बुरा लगा था  लेकिन बाद में जब भी यह घटना मुझे याद आती है तो मेरे होठों पर मुस्कान बिखर जाता है |.

मुझे आज भी याद है वह दिन …  24 जुलाई 1977 का वह दिन था, जब हमलोगों ने रांची एग्रीकल्चर कॉलेज में एडमिशन लिया था |

एडमिशन के तुरंत बाद ही हमलोगों को  हॉस्टल आवंटित किया गया था | मुझे होस्टल नम्बर 3 का रूम नम्बर १० अलॉट  हुआ था |

हालाँकि मैं उन दिनों रांची में ही रहता था, और बस से  कॉलेज आता था और क्लास ख़त्म होने पर फिर वापस  रांची लौट जाया करता था |

आने जाने में परेशानी अवश्य होती थी लेकिन कॉलेज में चल रहे रैगिंग के डर से ऐसा करना पड़ रहा था |

कॉलेज के शुरुवाती दिन थे और उन दिनों में रैगिंग भी बड़े जोरो की हुआ करती थी |

सीनियर छात्रों  के आदेशानुसार फर्स्ट trimester के छात्रो को डिनर के बाद नौ बजे रात  में  कॉमन रूम में उपस्थित होना पड़ता था जहाँ हमलोगों की तरह तरह से रैगिंग किया जाता था |

हॉस्टल में रह रहे हमारे मित्र जब क्लास में मिलते तो अपने अनुभव share करते हुए बताते थे  कि इस रैगिंग से कभी कभी इतने परेशान हो जाते है कि पढाई छोड़ कर घर वापस लौट जाने का मन करता है |

इन सब बातों को सुन कर मैं डर  जाया करता और फिर अपने मन को समझाता  कि चलो अभी रांची से हीआना जाना किया जाए और  कुछ दिनों के बाद  जब स्थिति सामान्य होगी तो फिर हॉस्टल में शिफ्ट कर जाऊंगा |

नियमतः रोज रैगिंग लेने वाले सिनिअर्स पहले हॉस्टल के कॉमन रूम में सभी को खड़ा कर लोगों का attendence लेते थे ताकि कोई चालाकी दिखा कर  रैगिंग से छुट ना जाए  |

लेकिन संजोग से रोज़  मैं ही वहाँ अनुपस्थित रहता था क्योकि मैं तो रोज अपने घर से ही आना जाना करता था |

एक दिन की बात है कि शाम के करीब चार बजे हमलोगों का क्लास समाप्त हुआ | मैं दोस्तों के साथ क्लास से बाहर निकला और मेरे सारे दोस्त हॉस्टल की ओर मुड गए और मैं बस पकड़ने के लिए कॉलेज के गेट की ओर जा रहा था तभी कुछ सीनियर्स हमें अकेला देख कर घेर लिए और पूछने लगे….तुम रात में रैगिंग से अनुपस्थित क्यों रहते हो ?

मैं उनलोगों के बीच अपने को  अकेला पाकर  घबरा गया और धीरे से बोला … बॉस, मैं जल्द ही हॉस्टल में शिफ्ट कर जाऊंगा और फिर रैगिंग क्लास में उपस्थित रहूँगा |

तभी सभी सीनियर लोग आपस में बोलने लगे | इसके क्लास के सभी मुर्गों का रैगिंग हो रहा है और यह महाशय ठाठ से लोगों को कहते फिरता है कि मेरा कौन रैगिंग ले सकता है, मैं तो यहाँ का लोकल हूँ | इसके घमंड को समाप्त करना होगा |

उनमे से एक बॉस के कहा… इसे अभी हॉस्टल में ले चलो, बहुत मुश्किल से आज  पकड़ में आया है |

और इस तरह वे सीनियर्स मिलकर मुझे  हॉस्टल में ले गए और ना चाहते हुए भी उनके साथ जाना पड़ा |

मैं उनलोगों के रैगिंग का विरोध कर रहा था | इससे वे लोग क्रोधित हो गए | तभी उनलोगों में से एक बॉस ने अपने रूम से दाढ़ी बनाने वाला रेजर ले आये और अचानक मेरी मूँछ पर रख कर मुझे डराना चाहा |

 और इसी नोक – झोक में मेरी आधी मूँछ कट गई |

मेरी नई नई मूँछ निकली थी जिसे  मैं बहुत पसंद करता था | अपने मूंछ से अपना रूतबा महसूस करता था | इस मूंछ को संभाल कर रखता था क्योंकि यह मेरे जवान होने की निशानी थी |

गाहे बगाहे जब कभी मेरे हाथ मूँछ पर जाती तो मुझे अपने चेहरा रोबदार होने का एहसास होता |

अब तो मेरी मूंछ आधी कट चुकी थी | उस समय देख भी नहीं सकता था कि अब मेरा मुखड़ा कैसा लग रहा है |

क्योकि उस ज़माने में मोबाइल नहीं हुआ करते थे कि उसके कैमरे को ऑन करके अपना आधी कटी मूछों वाला चेहरा देख कर अनुमान लगा सकूँ |

मुझे बहुत जोर का गुस्सा आ रहा था , लेकिन क्या करता …

वहाँ खड़े सभी सीनियर्स मेरे  आधी कटी मूंछ वाले चेहरे को देख कर हँस रहे थे |

मैं अपने गुस्से को किसी तरह काबू में किया, क्योकि मुझे इन्ही बॉस लोगों के बीच रह कर पढाई करनी थी |

मैं पॉकेट से रुमाल निकाला और अपने मुखड़े के आधी मूंछ को ढकते हुए चुप चाप वहाँ से खिसक लिया |

मैं कॉलेज गेट पर पहुँचा तो वहाँ खड़ी बस मिल गयी और मैं चुप चाप उस बस में बैठ गया |

मैं पुरे रास्ते सोच रहा था कि घर में कैसे बताऊंगा कि मेरी आधी मूंछ काट दी गई है |

मैं मुखड़े पर रुमाल रखे हुए ही घर में पहुँचा |

मेरी भाभी जी ने जैसे ही दरवाज़ा खोला | मेरे चेहरे को रुमाल से ढका देख वो चिंतित होते हुए पूछा …अरे विजय,  मुँह में चोट लगी है क्या. यह कैसे हुआ ?

मैं कुछ बोलने ही वाला था कि उन्होंने मेरे मुँह से रुमाल हटा दिया |

मेरे आधी कट चुकी मूंछ को देख कर अचानक वो जोर जोर से हंसने लगी | वह लगातार हँसे जा रही थी और मैं खिसियानी बिल्ली की तरह हंसने में उनका साथ दे रहा था |

फिर ज़ल्दी से आईने के सामने जाकर खड़ा हो गया ताकि मैं भी अपने मुखड़े को देख सकूँ |

मुझे भी अपने चेहरे को देख कर अचानक हँसी आ गई और हम दोनों देर तक हँसते रहे |

अगर उस समय मोबाइल का ज़माना होता तो  सेल्फी ज़रूर लेता और आज उसका इस्तेमाल करता | 

और कोई ऐसी सूरत न देख ले इसलिए तुरंत ही  घर में पड़े रेजर से बाकि बचे आधी मूँछ भी काट डाली |

उसी समय मेरा भांजा जो मेरी हम उम्र था , बाज़ार से सब्जी लेकर घर में घुसा और उसकी नज़र मेरी ओर अचानक पड़ी |

उसने तो पहचाना ही नहीं और मेरे पास से होते हुए आगे रसोई घर की ओर बढ़ गया |

तभी मैंने उसे आवाज़  लगाईं तो उसने चौक कर मुझे गौर से देखा और फिर उसका मूंह खुला का खुला रहा गया |

..उसके मुँह से बस यही निकला …यह क्या किया मामा जी ?.

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मेरी पहली विदेश यात्रा …4

source: Google.com

तीसरा दिन

चार दिनों के टूर पैकेज का दो दिन तो फुल मौज मस्ती में निकल गया | सचमुच हमलोग खूब मस्ती कर रहे थे |

दिन भर  के थका देने वाले कार्यक्रम के बाद तीसरे दिन सुबह देर तक सो रहा था, तभी  दरवाज़े पर किसी ने दस्तक दी |

मैं अलसाए हुए बिस्तर से उठा और दरवाज़ा खोला तो सामने मेरे एक मित्र थे | मुझे देखते ही कहा ….अभी तक आपलोग सो रहे हो ? हमलोगों की  टूरिस्ट बस आ चुकी है |

आप लोग ज़ल्दी से तैयार होकर  नास्ता हेतु रेस्टोरेंट में आ जाओ ताकि समय पर हमलोग घुमने निकल सकें |

उसके जाने के बाद  हमलोग ज़ल्दी ज़ल्दी स्नान वगैरह …करके निवृत हुए |

मैं कपडे पहन ही रहा था कि मेरे रूम पार्टनर ने बताया कि हमारी आज का टूरिस्ट प्रोग्राम यहाँ के प्रसिद्ध  “बौद्ध – मंदिर” देखने का है |

हमने कही पढ़ा था कि  थाईलैंड की  ९५% की आबादी बौद्ध धर्म को मानती है | इसलिए यहाँ का बौद्ध  मंदिर विजिट  करना तो बहुत ज़रूरी है |

इसलिए आज का कार्यक्रम उसी के अनुसार बनाया गया था | हमलोग ब्रेकफास्ट लेकर होटल से करीब नौ बजे यात्रा के लिए तैयार हो कर निकल गए …मंदिर दर्शन को |

सोचा कि यहाँ की हसीनाओं की सुन्दरता तो  बहुत निहार ली,  अब थोडा भगवान् भक्ति में भी समय बिताया जाए |

हमलोगों   “टेम्पल  ऑफ़ गोल्डन बुद्ध” के नाम से प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन करने पहुँच गए | यह मंदिर कुछ ऊंचाई  पर बनाया गया था |

सीढियाँ चढ़ कर जब ऊपर  मंदिर के प्रांगन में पहुँचे तो वहाँ पर  अजीब सी शांति का आभास हो रहा था |

अंदर मंदिर में घुसते ही सामने भगवान् बुद्ध की विशालकाय  प्रतिमा थी जो पुरे सोने की बनी हुई थी |

यहाँ आकर लगा कि यहाँ के लोग  बहुत धार्मिक भी होते है | हमलोग भगवान् बुद्ध के दर्शन किये और वहाँ के  खुबसूरत प्राकृतिक दृश्य को देख कर मंत्र-मुग्ध हो गए  |

वहाँ करीब एक घंटा बिताने के बाद हमारा  अगला पड़ाव था “फ्लोटिंग मार्किट” घूमना |

मुझे टूरिस्ट गाइड ने बताया कि यह दुनिया का पहला और दर्शनीय  “फ्लोटिंग मार्किट” है |

हमलोग यहाँ पहुँच कर सचमुच आश्चर्य चकित थे | फ्लोटिंग मार्किट देखते ही मन खुश हो गया क्योंकि  यहाँ का नज़ारा बहुत ही खुबसूरत था |

यहाँ पूरा का पूरा मार्किट  पानी पर तैरते नाव पर सजाया गया था जो बड़ा ही खुबसूरत नज़ारा प्रस्तुत कर रहा था |

पटाया घुमने वालों के लिए इस मार्किट को देखना आवश्यक ही बनता था |

हालाँकि कुछ दिनों पूर्व मुझे कोलकाता के पाटोली एरिया में भी इसी concept पर बनाया गया “फ्लोटिंग मार्किट” देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था  |

कोलकाता  का फ्लोटिंग मार्किट भी थाईलैंड के फ्लोटिंग मार्किट की तरह ही बनाया गया था,  लेकिन वहाँ  ज्यादातर सब्जी और फल का मार्किट था, जो पानी में तैरते नाव पर सुसज्जित था |

 हालाँकि  वहाँ का भी दृश्य बहुत खुबसूरत था , लेकिन थाईलैंड के उस मार्किट की बात ही कुछ और थी | यहाँ की भीड़ को देख कर एहसास हुआ कि बहुत सारे पर्यटक इसे देखने आते है |

इस तरह सारा दिन घूम – घूम कर इन जगहों का मज़ा लेते रहे और शाम होते ही हमलोग होटल आ गए | यहाँ पर दो घंटा आराम करने के बाद फिर अपने आप को तरो ताज़ा कर लिया |

क्योंकि आज शाम को एक और  खुबसूरत जगह विजिट करने का कार्यक्रम था |

जी हाँ आज रात नौ बजे से  “अल्काजार कैबरे शो” देखने का कार्यक्रम था | इस कैबरे शो के बारे में बहुत सुन रखा था |  हमलोग वहाँ  समय से एक घंटा पहले ही पहुँच गए |

इसकी सबसे ख़ास बात लगी कि यह लेडी बॉय डांस शो था, जिसे हमलोग की भाषा में  “लौंडा – डांस” भी कहते है | हमारा शो रात के 9.30  से शुरू होने वाला था  |

अभी आधा घंटा समय बाकी होने की वजह से हमलोग, वहाँ  के नज़ारे का लुफ्त उठाने लगे  |

बहुत लोग इन डांसर के साथ फोटो भी खिचवा रहे थे | यहाँ फोटो खिचवाने के भी पैसे देने पड़ते थे |

खैर जब इनका डांस शो  शुरू हुआ तो सचमुच बहुत अच्छा लगा | मैं तो यह देख कर  दंग रह  गया कि यहाँ के कलाकार  थाई कैबरे डांस को हमारे भोजपुरी गाने की धुन पर प्रस्तुत कर रहे थे |  भोजपुरी भाषा इन्हें आती है या नहीं, मुझे नहीं पता,  परन्तु इनका नृत्य बहुत ही अच्छा था |

आप भी इस “अक्लाजार कैबरे शो” का लुफ्त उठा सकते है, link नीचे दिया हुआ है ….

https:||youtu.be|1sIfzdbTKBQ

इस तरह टूर का  तीसरा  दिन समाप्त हो गया  |

चौथा दिन

सुबह ज़ल्दी उठाना पड़ा क्योकि आज यहाँ से बैंकाक शिफ्ट होना था |

हमलोग ब्रेकफास्ट लेकर बैंकाक  के लिए सुबह करीब 9.00 बजे निकल गए | यहाँ होटल में शिफ्ट होते ही सबसे पहले लंच करना था क्योकि भूख लग  रही थी | यहाँ खाना खाने के लिए भारतीय रेस्टुरेंट में जाना था जो थोड़े दूर में ही स्थित था |

हमलोग तैयार होकर पहुँच गए इंडियन होटल में | वहाँ का खाना काफी स्वादिस्ट था | ऐसा लगा जैसे हमलोग इंडिया में ही किसी होटल में खाना खा रहे है |

खाना खाने के बाद तीन घंटे का समय शौपिंग  के लिए रखा गया था | क्योकि रात में नाना प्लाजा घुमने का कार्यक्रम था |

हमलोग टहलते हुए थोड़ी दूर पर स्थित MBK center Mall में पहुँच गए | बहुत ही बड़ा मॉल था और हमलोग अलग अलग ज़रुरत के हिसाब से खरीदारी करने लगे |

मुझे टूरिस्ट गाइड ने बताया था कि यहाँ बहुत मोल -तोल (bargain) होता है और सामान भी डुप्लीकेट मिलता है, इसलिए कोई भी सामान खरीदने से पहले खूब अच्छे से मोल – तोल करना है |

मैं घूमते हुए एक “इलेक्ट्रॉनिक शॉप” में घुस गया | वहाँ पर दूकानदार ने एक एप्पल का मोबाइल दिखाया जिसका कीमत २०,००० रूपये बताया | उसने यह भी कहा कि यह डुप्लीकेट है और इसका ओरिजिनल कीमत ८०,००० रूपये है |

उसने उसे ऑपरेट करके भी दिखाया  | बिलकुल ओरिजिनल एप्पल का मोबाइल लग रहा था | मुझे लगा कि यह लोगों को दिखलाने के ख्याल से लिया जा सकता है,  यह चलता भी ठीक है और दीखता भी ठीक है | मैं उससे मोल जोल करने लगा | अंत में उसने मात्र २५०० रूपये में देने को तैयार हो गया |

मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि इतनी भी bargaining हो सकती है | मैं जोश में आकर पैसे दिए और मोबाइल की खरीदारी कर ली | उसके बाद उस मोबाइल का क्या हश्र हुआ यह नहीं पूछे तो अच्छा होगा |

वैसे तो और भी कुछ आइटम खरीदने की इच्छा  हो रही थी, लेकिन डुप्लीकेट माल होने की वज़ह से और कुछ भी खरीदारी करने की मेरी हिम्मत नहीं हुई  |

करीब  पाँच बजे हमलोग होटल आ गए और एक घंटा आराम करने के बाद फिर रात में यहाँ की रंगिनिया देखने को “नैना प्लाजा” चल दिया |

वहाँ का भी नज़ारा बिलकुल “वाल्किंग स्ट्रीट” जैसा ही था | यहाँ आकर मैंने देखा कि पश्चिमी सभ्यता के नाम पर लोगों ने कितनी आज़ादी ले रखी है कि शर्म – लाज जैसे बातें  यहाँ बेमानी लगती है  |

यहाँ चाहे लड़की हो या लड़का सबों ने पेट की भूख मिटाने  के लिए किस हद तक अपने को नंगा कर रखा है | मुझे बहुत कुछ यहाँ  अनुभव कराता चौथा और अंतिम दिन भी बीत गया |

हालाँकि इसके अलावा भी बहुत जगह ऐसे थे जहाँ समय के अभाव के कारण घुमने का मौका नहीं मिल सका | लेकिन भविष्य में कभी मौका मिला तो एक बार फिर विजिट  करूँगा , बाकी जगहों को देखने के लिए |

उसके बाद कहने को और ज्यादा कुछ नहीं है दोस्तों,  

हाँ, जितने थाई करेंसी मेरे पॉकेट में बच गए थे , उससे मैंने वहाँ से विदेशी शराब खरीद ली, अपने देश के दोस्तों के लिए ….

यह सही है कि टूरिज्म एक बड़ी इंडस्ट्री है इसके तहत बिलकुल व्यवस्थित ढंग से  हमलोग को विदेशो में घुमने का मौका मिलता है | चूँकि यह पैकेज टूर था  इसलिए हमलोग को किसी बात की चिंता करने की ज़रुरत नहीं  पड़ी ..बल्कि सिर्फ घूमना और मौज मस्ती ही करना था |

मेरी यह पहली विदेश यात्रा  के लिए मैं अपने बैंक को धन्यवाद देना चाहूँगा कि उसने हमें रोज़ के उबाऊ दिनचर्या से से हट कर कुछ दिनों के लिए विश्राम और मौज मस्ती करने का अवसर दिया |

उससे ना केवल मेरी थकान दूर हुई बल्कि और तरोताज़ा होकर बैंक के लिए और अधिक लगन से कम करने को प्रेरित हुए |

थाईलैंड अपने नाईट – लाइफ और खास कर थाई मसाज़ के लिए जाना जाता है | वैसे और भी बहुत घुमने की जगहे है जिसका लुफ्त उठा सकते है | अगर कभी मौका मिले तो …. एक बार ज़रूर इसका मज़ा लेना चाहिए |

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मेरी पहली विदेश यात्रा …3

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सुबह पांच बजे मैं बिस्तर छोड़ दिया | रात में नींद पूरी नहीं होने के कारण उस समय मेरी आँखे भारी  लग रही थी | शरीर  में भी थकावट का अनुभव कर रहा था |

मैं अपनी थकान को कम करने के लिए, वही कमरे के फर्श पर बैठ कर योगा करने लगा |

मेरे भ्रामरी प्राणायाम की आवाज़ सुनकर मेरे रूम पार्टनर की नींद खुल गई और उसने मुझे देखते हुए कहा शिकायत भरे लहजे में कहा …आप तो मुझे सोने ही नहीं दोगे |

 अब मैं उसको क्या कहता,  बस मैं अपने गुस्से को पी गया और  वहाँ से उठ कर चुप चाप स्नान करने चला गया | जब मैं स्नान कर वापस आया तब तक उसके तेवर बदल चुके थे |

 उसने मेरा हाँथ पकड़ते हुए कहा …आई ऍम सॉरी बॉस | मैं जानता हूँ कि मेरी नाक बहुत आवाज़ करती है | शायद रात को इस वजह से आपको परेशानी हुई होगी | लेकिन मुझे माफ़ कर दो , मेरी तो यह बिमारी है |

उसकी बातों को सुन कर मेरा गुस्सा शांत हो गया और हमलोग ज़ल्दी ज़ल्दी तैयार होने लगे क्योकि ब्रेकफास्ट लेने के बाद  नौ बजे ही पटाया बिच के लिए रवाना होना था |

होटल तो शानदार  था ही , उसका रेस्टोरेंट भी लाजवाब था | यहाँ ज्यादातर “नॉन वेज” आइटम ही थे | लेकिन मैं हमेशा ऐसे मौकों पर “वेज” आइटम ही पसंद करता  हूँ | इसलिए मैंने प्लेट में फ्रूट्स ले लिया तभी मेरी नज़र वहाँ बना रहे गरमा गरम ढोसे पर पड़ी |

फिर क्या था , हमने ढोसा का मज़ा लिया और कॉफ़ी पीया | आज का कार्यक्रम “कोरल आइलैंड” घुमने का था , इसलिए हमलोग तैयार होकर पटाया बिच आ गए | बहुत ही खुबसूरत जगह थी , बहुत मज़ा आ रहा था |

यहाँ से हमलोगों ने मोटरबोट लीं और कोरल आइलैंड  के लिए रवाना  हो गए  |

समुद्र में मोटरबोट से सफ़र करने का मेरा पहला मौका था | मोटर बोट काफी स्पीड में  पानी पर तैर रहा था | मुझे तो शुरू में थोडा डर लग रहा था लेकिन फिर खूब मज़ा आने  लगा  , बिलकुल adventurous drive था वह |

लगभग बीस मिनट के समुद्री सफ़र कर हमलोग कोरल आइलैंड पर पहुँच गए | मैंने सुन रखा था कि यह पटाया का सबसे बड़ा और खुबसूरत आइलैंड है |

सचमुच, बहुत खुबसूरत नज़ारा था | यहाँ का पानी बिलकुल साफ़ और नीला था,  बिलकुल नीचे सतह देख सकते थे |

बिच में मौज मस्ती करते हुए  बहुत से विदेशी टूरिस्ट भी थे |

सचमुच नीला समंदर का पानी और नीला आसमान एक जगह हो तो इससे बढ़ कर और  कोई दूसरी खुबसूरत चीज़ नहीं हो सकती थी …यहाँ प्रकृति का अद्भुत नज़ारा सामने था

वहीँ, दूसरी तरफ जंगल  और पहाड़ का अद्भुत दृश्य दिखाई पद रहा था | बड़ा ही प्यारा और मनोरम दृश्य था | हालाँकि थोड़ी हलकी गर्मी भी थी लेकिन यहाँ के जीवंत वातावरण को देख कर दिल को बहुत सुकुन लग रहा था |

समुद्र का पानी इतना साफ़ था कि हमलोग तुरंत ही डुबकी लगाने से अपने को रोक नहीं सके |

सभी दोस्तों के साथ पानी में खूब मौज मस्ती कर रहे थे और फोटो भी खीचा रहे थे | तभी हमलोगों की इच्छा हुई कि बोटिंग का भी मज़ा लिया जाए |  

यहाँ तरह तरह के “वाटर राइड्स” करते लोगों के चेहरे पर ख़ुशी झलक रही थी |

हमलोगों ने भी “बनाना राइड्स” का मज़ा लिया |

यहाँ खाने के लिए तरह तरह के “सी – फ़ूड” भी मिल रहे थे | हमलोगों को भूख भी लग रही थी | यहाँ नारियल पानी और सी फ़ूड का मज़ा लेने लगे |

 यहाँ का नारियल पानी का स्वाद कुछ अलग तरह का था, लेकिन उसका मलाई खाने में बड़ा  मज़ा आया | दिन भर कैसे निकल गए, पता ही नहीं चला |

हमलोग शाम को “कोरल आइलैंड” से वापस अपने होटल आ गए | होटल में आ कर फिर साफ़ पानी से स्नान किया | समुद्र बिच में गोता लगाने के बाद टैप वाटर से नहाना  ज़रूरी हो गया था |

रात में यहाँ के “वाल्किंग स्ट्रीट” घुमने का प्रोग्राम था |

सुना था कि यहाँ की मदमस्त और चकाचौंध भरी  रात सारे  विश्व में मशहूर है |  

रात भर इस स्ट्रीट पर लोग तरह तरह से लुफ्त उठाते है |

वैसे हमलोग का होटल वाल्किंग स्ट्रीट के पास ही था |  हमलोग बन ठन  कर रात में घुमने निकल पड़े |

मैंने जो वहाँ देखा उसका वर्णन यहाँ नहीं कर सकता  | ऐसा लगा जैसे हम एक अलग  दुनिया में ही आ गए हों |  यहाँ संगीत की धुन पर थिरकते लोग |

चारो तरफ रौशनी की चकाचौंध और यहाँ लाइन से खड़ी  अप्सराएं मसाज़ करने के लिए ग्राहक को मुस्कुरा कर लुभाने का प्रयास कर रही थी |

यहाँ साथ शराब पीने पिलाने के लिए भी भाड़े पर लड़कियां  मिल रही थी |

 इसे adult स्ट्रीट कहना गलत नहीं होगा | यहाँ की दुनिया कुछ अलग ही थी  | आधुनिकता के नाम पर खुले बदन, और लड़कियां हाथों में सिगरेट लेकर ऐसा कश  लगाती दिखी कि मर्द  भी इनके सामने फेल है |

रात भर मौज मस्ती करते लोग,  संगीत और रौशनी से नहाया यह वाल्किंग स्ट्रीट,  इसकी  चकाचौंध एक  अलग ही नज़ारा प्रस्तुत कर रहा था |  मेरा इस तरह का बिलकुल नया ही अनुभव हो  रहा था |

आज टूर का पहला दिन बहुत से नए और अजीब अनुभव कराता गुजर गया |

दुसरे दिन सुबह थकान के कारण कुछ देर से उठा | तभी  गाइड ने  आकर हम सबों को खबर किया कि गाड़ी आ गई है और जल्द तैयार होकर सबलोग नीचे आ जाएँ | आज हमलोग को  पारा सेल्लिंग और सी वाल्किंग (sea walking) के लिए जाना है |

मैं कभी पैरा – सेल्लिंग नहीं किया था, इसलिए उसका अनुभन करना ज़रूरी था |

हमलोग मोटरबोट की मदद से उस जगह पर पहुँच गए | सचमुच काफी adventurous स्पोर्ट्स था | सभी लोग इस साहसिक स्पोर्ट्स “पैरा – ग्लाइडिंग” का मज़ा ले रहे थे |

 मुझे शुरू में बहुत डर  लग रहा था, हालाँकि  सेफ्टी का पूरा ख्याल रखा गया था | काफी कौतुहल हो रही थी |  पैरा सेल्लिंग कर के मुझे बहुत मज़ा आया |

मैं वहाँ कॉफ़ी पी पी रहा था  तभी  दूसरी तरफ  सी वाल्किंग (sea walking )  का मजा देते हुए लोग दिख रहे थे |

बिलकुल समुद्र के अन्दर उसके सतह पर पैदल चलने का अनुभव भी अलग होता होगा |

ऐसा सोच कर हमलोग भी “सी वाल्किंग “ sea walking का मज़ा लेने का मन बना लिया |

हमलोगों को  हेलमेट टाइप का कॉस्टयूम (costume) पहना दिया जिससे पानी के अन्दर भी ऑक्सीजन मिलता रहे | दस लोगों के ग्रुप में हमलोगों को समुद्र के अन्दर ले जाया गया , साथ में ट्रेनर भी था |

हमलोग जब समुद्र के सतह पर पहुंचे तो बहुत से जलिए जीव को देख कर मन रोमांचित हो गया | ट्रेनर ने मछली के खाने के दाने बिखेर दिया,  तभी बहुत सारी  खुबसूरत समुद्री मछलियाँ हमलोगों के आस पास आ गई |

हमलोग उसे छू भी सकते थे | बड़ा ही रोमांचित कर देने वाला क्षण था | तभी  हमारा एक दोस्त मकड़ी की तरह की कोई जीव को छू दिया , तभी वो समुद्री जीव उस पर हमला कर दिया और उसके नाक के पास से खून निकलने लगा |

बहुत मुश्किल से उस जीव को शरीर  से अलग किया गया और हमलोगों को तुरंत पानी से बाहर निकाल दिया गया |

दरअसल, समुद्री जीव को सिर्फ देखना था उसे छेड़ने की मनाही थी ,लेकिन हमलोग कभी कभी ज्यादा ही रोमांचित हो जाते है और दुर्घटना का शिकार हो जाते है |

हमलोग का दूसरा  दिन इस तरह से  बीत गया , सच पूछिये तो वहाँ से आने की इच्छा ही नहीं हो रही थी | “सी वाल्किंग” में मेरे दोस्त के साथ दुर्घटना के कारण पूरा मज़ा नहीं ले सका  और पटाया का समुद्र का रोमांच भरा यात्रा यही समाप्त हो गया |

अगला कार्यक्रम था …आज रात में  टिफ़नी कैबरे “ tiffany cabaret” शो देखने का |

हमलोग ठीक नौ बजे उस थिएटर में थे और 9.३० रात  में शो शुरू हो गया | इसमें तरह तरह के नृत्य के द्वारा थाईलैंड की संस्कृति और कल्चर की झलक देखने को मिल रही थी | ..यहाँ की लोकल ग्रुप डांस बहुत ही अच्छा लगा | यह भी एक अलग तरह का अनुभव था | सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यहाँ थाईलैंड में हिंदी गाना पर इन्होने अपनी संस्कृति का समावेश कर बहुत अच्छे तरह से डांस प्रस्तुत किया | इस कैबरे डांस का मजा आप भी ज़रूर लीजिये , इसका link नीचे दिया गया है …

रात के करीब ग्यारह बजे होटल वापस आ गए |  वहाँ कुछ दोस्त लोग होटल में स्थित  बार में दारु का मजा ले रहे थे | वहाँ संगीत भी  चल रहा था  और लोग शराब पीने के बाद डांस के लिए बने स्टेज पर डांस भी कर रहे थे | रंग बिरंगी रौशनी और संगीत के साथ डांस दोस्तों के साथ करने का एक अलग ही मज़ा है |

मैं भी दो पैग ले लिया और फिर डांस में शरीक हो गया | हमलोग जम कर एक घंटे तक  डांस करते  रहे  |

मेरे  डांस को देख कर हमारे साथी आश्चर्य चकित हो  रहे थे | इतना शांत रहने वाला इंसान  आज दारू पीने के बाद अन्दर के टैलेंट को बाहर निकाल रहा था | सचमुच बहुत दिनों के बाद अपनी पुरानी  शौक को पूरा करने का मौका मिल रहा था |

इस तरह मैं थक कर चूर हो चूका था और फिर रात के बारह बजे हमलोगों ने डिनर लिया |

रात को मैं कमरे में आराम से सो गया | आज मुझे रूम पार्टर की नाक की आवाज़ भी मेरी नींद को डिस्टर्ब नहीं कर सका | सचमुच कभी कभी दारु बड़े काम की चीज़ साबित होती है ….(क्रमशः )

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मेरी पहली विदेश यात्रा …2

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दिल्ली एअरपोर्ट पर हमारी फ्लाइट सही समय पर लैंड कर गयी / वहाँ एअरपोर्ट पर ही  हमारे ग्रुप के सभी साथी  और केयर-टेकर मिल गए | लेकिन वे सभी उदास दिख रहे थे क्योकि आज  रात  की फ्लाइट जिससे बैंकाक जाना था वह कैंसिल हो चुकी थी  |

उसकी जगह अब दूसरी फ्लाइट कल सुबह छः बजे रवाना होगी, एयरलाइन्स वालों ने ऐसा बताया था |

 लेकिन सच कहूँ तो  मुझे सुन कर बहुत ख़ुशी हो रही थी | फ्लाइट से रात में  सफ़र करने में मुझे और भी ज्यादा डर लगता था |

खैर, रात बिताने के लिए एयरलाइन्स के तरफ से होटल में ठहराने की व्यवस्था की गई थी इसलिए चाय पिने के बाद हमलोग “होटल रैडिसन” जा रहे थे |

मुझे जब पता चला तो मैं मन ही मन खुश हो गया | “होटल रैडिसन” फाइव स्टार होटल था | मुझे  पहली बार फाइव स्टार होटल में रात बिताने का मौका मिल रहा था | मैं तो बहुत ही आनंद महसूस  कर रहा था |

मैं होटल पहुँच कर सबसे पहले स्नान कर फ्रेश हुआ और फिर घडी देखा तो रात के नौ बज रहे थे | मुझे डिनर के लिए नीचे होटल के रेस्टुरेंट में जाना था /

तभी मेरी नज़र मेरे रूम पार्टनर पर गई |  वह रूम में पड़े सोफे पर  बैठ कर दारु पी रहा था |  मैंने  आश्चर्य से देखते हुए पूछा …..यह दारु कहाँ से इस समय मिल गया ?

उसने बताया …सामने जो फ्रीज है , उसमे बहुत सारे खाने-पीने की चीज़ रखी है और दारु भी |

जब होटल का कमरा फ्री है तो इसका इस्तेमाल भी फ्री होगा ना | इसलिए खाना खाने से पहले थोड़ी मार लेता  हूँ |

मैं अपना सिर पकड़ लिया और उसकी ओर  घूरते हुए कहा …यह सब खाने-पीने की वस्तुओं  का अलग से पैसा चुकाना पड़ेगा | फ्रीज में रखी  चीज़ें फ्री की नहीं है |

विदेशी दारु और मंहगी भी थी | पैसो की बात सुन कर उसका दारु का नशा जितना तेज़ी से चढ़ा था, उतना ही तेज़ी से उतर गया |

उसे अपनी  गलती का एहसास हुआ और उसने कहा ….हमसे गलती हो गई, अब मैं आगे से इसका ध्यान रखूँगा | ….ऐसा बोल कर वह भी मेरे साथ डिनर के लिए डाइनिंग हॉल में आ गया |  

हम दोनो नीचे रेस्तरां के डाइनिंग हॉल में पहुंचे तो वहाँ खाने के इतने सारे व्यंजन देख कर मैं आश्चर्य चकित हो गया | सच, फाइव स्टार होटल की बात ही निराली है |

चूँकि  बुफे सिस्टम था इसलिए जो भी और जितना भी मन करे खाने की आज़ादी थी | ग्रुप के सभी लोग आ चुके थे, भूख भी जोर की लगी हुई थी | फिर क्या था … हम सब लोग खाने पर टूट पड़े |

वहाँ का खाना इतना स्वादिष्ट था कि मैं सामान्य से ज्यादा खा लिया |

उसके बाद मिठाइयों पर मेरी नज़र पड़ी …करीब तीस  किस्म की मिठाई सजी हुई थी | मुझे यह देख कर मिठाई भी  खाने के लिए मन ललचाने लगा और अपने favourite गुलाब -जामुन को देख कर अपने को रोक नहीं सका | अपने मनपसंद मिठाई का भी लुफ्त उठाया  |

जब कोई भी चीज़ मुफ्त में मिलता है तो हम उस पर बेरहम हो जाते  है |

मेरा  भी  रात का खाना ज़रुरत से ज्यादा हो गया था | तभी मेरा रूम पार्टनर उधर से आइसक्रीम लाकर मेरे पास ही बैठ कर  खाने लगा |

मुझे भी आइसक्रीम खाने की इच्छा हुई,  लेकिन तभी मैंने अपने मन को समझा लिया कि अभी आगे भी यात्रा का मज़ा लेना है |

उसके बाद अपने रूम में आ कर बिस्तर पर मैं गिर पड़ा | वहाँ के मुलायम बिस्तर पर लेटते ही  तुरंत नींद आ गया और मैं सपनो में बैंकाक शहर की सैर करने लगा |

सुबह जब नींद खुली तो खिड़की से धुप की हलकी झलक दिखी | मैं बिस्तर पर उछल कर बैठ गया और घडी की तरफ नज़र किया तो पाया कि दिन के आठ बज चुके है |

मेरे मन में यह बात बिजली की तरह कौंध गई कि मेरी फ्लाइट तो अब  छुट गई | उसका प्रस्थान का समय तो सुबह छः बजे का ही था |

शायद मुझे उठाने के लिए कोई बाहर से दरवाजा खटखटाया भी होगा | लेकिन थकान के कारण नींद नहीं खुल सकी |

पास के बेड पर रूम पार्टनर तो अभी भी घोडा बेच कर सो रहा था  | मैं गुस्से में उसे झकझोड़ कर उठाया और कहा …अपनी तो बैंकाक  की फ्लाइट मिस हो गई |

मेरी बात जैसे ही उसके कानो में पड़ी , वह भी हडबडा कर उठा बैठा और कहा…. अब क्या होगा ?

तभी दरवाजे के नीचे से सरकाया गया सुबह के अखबार पर मेरी  नज़र पड़ी |

मैं अखबार जैसे ही उठाया तो उसके साथ एक सिल बंद लिफाफा भी था | मैं अखबार को बिना पढ़े एक तरफ फेंक दिया और लिफाफा को जिज्ञासा से खोलने लगा |

मेरी तो साँसे अटकी हुई थी |

लिफाफा में एक मेसेज था …आप की फ्लाइट पाँच  घंटे लेट है | अब वह ग्यारह बजे दिन में रवाना होगी |

उस मेसेज को पढ़ते ही मेरी जान में जान आ गई | अब दिल को तसल्ली हो गया कि विदेश यात्रा तो हो कर ही रहेगा |

मेरा  रूम पार्टनर और हम  जल्दी ज़ल्दी आगे की यात्रा के लिए तैयार होने लगे और सही वक़्त पर हम सभी एअरपोर्ट पर थे |

यहाँ से बैंकाक का सफ़र फ्लाइट के द्वारा चार घंटे में पूरी होनी थी |  सिक्यूरिटी चेकिंग के बाद मेरी घबड़ाहट बढ़ने लगी, शीशे से सामने खड़ी प्लेन दिखाई दे रही थी …थाई एयरलाइन्स |

मैं किसी तरह अपने मन को समझाया कि इतने लोग हमारे साथ ग्रुप में इस फ्लाइट से सफ़र कर रहे है तो डर किस बात की |  हमें तो एन्जॉय करना चाहिए |

दुर्भाग्यवश हमें विंडो सीट मिला था, जिससे बाहर के प्राकृतिक सुन्दरता का मजा लेने का मन ही मन फैसला कर लिया | अगर विंडो सीट किसी से एक्सचेंज करता तो मेरी कमजोरी सभी को पता चल जाता और शायद मैं मजाक का पात्र  बन जाता |

थोड़ी ही देर में फ्लाइट टेक ऑफ हो रही थी , तो उस समय  थोड़ी घबराहट का अनुभव होने लगा फिर मैं हिम्मत कर के प्लेन की खिड़की से बाहर का ख़ूबसूरत नज़ारा देखने लगा और तभी मन में हो रही घबराहट शांत हो गई |

खिड़की के बाहर रुई जैसी सफ़ेद चादर की तरह फैली बादलों को देख कर मैं रोमांचित होने  लगा और फिर अपने  मोबाइल से उस मनोरम दृश्य को कैद करने लगा |

चार घंटे की हवाई यात्रा पूरी होने के बाद हम सब  बैंकाक एअरपोर्ट पर लैंड कर चुके थे |

हमलोग बैंकाक एअरपोर्ट पर वीसा की फॉर्मेलिटी पूरी कर गेट नम्बर 8  से बाहर आ गए | वहाँ एक टूरिस्ट बस और गाइड तो  पहले से बुक किया हुआ था |

हमलोगों के पहुँचते ही वहाँ से पटाया के लिए तुरंत ही उसी बस से रवाना हो गए | करीब  तीन घंटे की यात्रा के बाद हम सब पटाया पहुँच गए | वहाँ एक होटल में चेक  इन करने हेतु  उसके काउंटर पर जमा हुए | काउंटर पर फॉर्मेलिटी करने के बाद रूम की  चाभियाँ हमलोगों को दी गई |

लेकिन इस बार रूम पार्टनर बदल गया था | होटल वालों  ने ही पहले से दो दो व्यक्ति को एक कमरा  अलाट कर रखा था और उसी के हिसाब से सबों का नाम रजिस्टर में अंकित कर दिया |

घडी देखा तो रात के दस बज चुके थे |

मुझे थकान का अनुभव होने लगा और भूख भी लग रही थी | होटल तो शानदार था,  कमरे में सामान रख कर तुरंत ही हमलोग डिनर के लिए उसी के रेस्टोरेंट में एकत्र हुए | खाना खाते समय ही नींद  जोरो की आ रही थी |

बस फटाफट खाना खा कर अपने कमरे में आया और सीधा बिस्तर में घुस गया | आँख बंद करते ही नींद की आगोश में चला गया | लेकिन थोड़ी देर के बाद ही मेरी नींद  खुल गई |

कमरे में मेरे पार्टनर की नाक जोर जोर से बजने की आवाज़ आ रही थी. |  इतना ज्यादा आवाज़ कर रहा था कि कोशिश करने पर भी नींद नहीं आ रही थी |

मैं करवट बदलने लगा और अपने पुराने रूम पार्टनर को याद करने लगा |

मैं एक दो बार उसे हिलाया डुलाया भी  ताकि उसकी नाक की आवाज़ बंद हो जाये | लेकिन थोड़ी देर खामोश  रहने के बाद वह फिर से  शुरू हो जाता |

इसी तरह कबड्डी खेलते हुए मेरी पूरी  रात बीती | इतना सुन्दर होटल और आराम दायक बिस्तर होने के बाबजूद रात भर बस करवटे  बदलता रहा | इस तरह का यह  मेरा पहला कटु अनुभव था |

एक बार तो गुस्से में मैंने  उसे लात भी मारी फिर भी वो नींद से जगा नहीं | वो तो एकदम घोड़े बेच कर सुख की नींद सो रहा था …(क्रमशः)

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मेरी पहली विदेश यात्रा …1

हेल्लो दोस्तों,

मैं इस ब्लॉग के माध्यम से अपनी बहुत सारी रचनाये पोस्ट करते रहता हूँ, जिनमे से  कुछ रचनाये काफी बड़ी होती है | अतः आप सबों की सुविधा के लिए उसे धारावाहिक के रूप में प्रस्तुत करता हूँ |

आज भी मैं  अपने इस ब्लॉग में अपना संस्मरण जिसका शीषक मैंने “मेरी पहली विदेश यात्रा” रखा है, वह आप सबों के बीच  प्रस्तुत करने जा रहा हूँ |

यह संस्मरण मेरे विदेश यात्रा के अनुभव की प्रस्तुति है और यह भी लम्बा होने वाला है | अतः इसे किस्तों में लिखने का फैसला किया है ताकि आप इसका अच्छी तरह से आनंद ले सके और आप की दिलचस्पी भी इसमें बनी रहे |

आप सब  मेरे हर ब्लॉग को धैर्य पूर्वक पढ़ते है और पसंद भी करते है | इसके लिए आप सबो का तहे दिल से शुक्रिया |

कभी कभी इंसान जब अपने ज़िदगी के बिताये हुए लम्हों को याद करता है तो कुछ पल ऐसे भी होते है जिसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करने का मन करता है  |

वैसे तो ना जाने कितनी ही बार हवाई सफ़र किया हूँ लेकिन यह सच है कि मैं आज भी प्लेन से सफ़र करने से डरता हूँ और जब तक प्लेन हवा में रहता है तब तक बेचैनी महसूस करता हूँ |

तब और भी डर  महसूस होने लगता है जय एयर होस्टेस का उद्घोषणा सुनाई पड़ती है . कि बाहर मौसम ख़राब है, कृपया अपनी सीट-बेल्ट बाँध ले |

हाँ,  मुझे रेल से सफ़र करने में मजा आता है क्योंकि सफ़र के दौरान नए नए लोगों से मिलने और दोस्ती करने के पर्याप्त अवसर  मिलते है | लेकिन प्लेन में तो एक बार टेक ऑफ  किया फिर एक या दो घंटे में ही लैंडिंग हो जाता है | और तो और जितनी देर प्लेन हवा में रहती है , मेरी तो साँसे भी अटकी रहती है |

बस मन चाहता है कि जल्दी से प्लेन लैंड कर जाये  और मैं यहाँ से निकल भागूं |

मैंने तो “हवाई जहाज़ की पहली यात्रा” शीर्षक पर भी एक ब्लॉग बनाया था जिसमे पहली बार प्लेन में चढ़ने का अनुभव शेयर किया था | आप उसे एक बार ज़रूर पढ़े , link नीचे दिया हुआ है |

https:||wp.me|pbyD2R-R

एक दिन की बात है कि मैं बैंक में अपने चैम्बर में बैठा एक ग्राहक से बात कर रहा था तभी मेरे मोबाइल की घंटी बजी | मैंने देखा तो हेड ऑफिस का नंबर था | जल्दी से मैंने फ़ोन उठाया और कहा …हेल्लो, मैं वर्मा बोल रहा हूँ |

मुझे पता है , आप बोल रहे है | लेकिन  वर्मा जी आप ने मुझे पहचाना ?….उधर से आवाज़ आ रही थी |

मुझे आवाज़ तो जाना पहचाना लग रहा था लेकिन  कन्फर्म नहीं कह सकता था कि  बोलने वाला  कौन है |

मैं अनुमान लगा ही रहा था कि उसने  ही अपना परिचय देते हुए कहा ….मैं प्रदीप शर्मा बोल रहा हूँ … अब, आपने मुझे पहचाना वर्मा जी ?

उसका नाम सुनते ही मैं  ख़ुशी से उछल पड़ा | आज 15 सालों के बाद उससे बात हो रही थी | हमलोग राजस्थान में पास पास के शाखा में थे और तीन सालों तक हमलोग हर रविवार  को या अन्य छुट्टी के दिन  साथ साथ बिताते थे | कभी पार्टी करते तो कभी कही घुमने का प्रोग्राम होता था |

हम दोनो उन दिनों अकेला ही बिना परिवार के रहते थे | हमलोग ने  साथ साथ राजस्थान के बहुत जगहों का भ्रमण किया था |

अचानक बिताये गए उन दिनों को याद करके बहुत अच्छा लग रहा था | उन दिनों बैंक के कामों में उतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता था | क्योंकि उन दिनों राजस्थान की ग्रामीण शाखाओं में काम करके बहुत मज़ा आता था | वहाँ के लोग बहुत अच्छे, ईमानदार और मेहनती थे |

मैं ख्यालों में खो गया था तभी उसकी आवाज़ फिर एक बार सुन कर ध्यान भंग हुआ और मैंने पूछा …कैसे हो शर्मा जी ?

मैं तो ठीक हूँ , और आपको एक खुशखबरी देने के लिए फ़ोन किया है …उसने खुश होते हुए कहा |

कौन सी खुश खबरी ?….मैंने आश्चर्य प्रकट करते हुए पूछा |

आप को विदेश यात्रा के लिए सेलेक्ट किया गया है और आपको अगले माह थाईलैंड जाना है | आप का प्लेन टिकट बैंकाक के लिए भेज रहा हूँ | आप अन्य आवश्यक कार्यवाही ज़ल्दी से ज़ल्दी कर लीजिये |

मैं विदेश यात्रा का जिक्र सुनते ही अपने कुर्सी पर उछल पड़ा, क्योकि यह मेरे जीवन की पहली विदेश यात्रा होने वाली थी | शाखा के इन्सुरेंस बिज़नेस के टारगेट हासिल करने पर मुझे सेलेक्ट किया गया था |

जीवन में कुछ भी पहली  बार होता है तो उसमे उत्साह बहुत ही ज्यादा होता है |

मैं भी ख़ुशी से थ्रिल हो रहा था | लेकिन अचानक दुसरे पल ही मेरा थ्रिल गायब  हो गया और  मेरा  दिल डर  के मारे धक् धक् करने लगा |

इसका मुख्य कारण था कि मुझे विदेश भ्रमण के लिए  प्लेन से यात्रा करना पड़ेगा और वो भी लगातार छः घंटे की यात्रा होगी |

मेरी तो एक या दो घंटे की यात्रा में ही पसीने छूटने लगते है और यहाँ तो छः घंटे लगातार आकाश में रहना पड़ेगा | मैं सोच सोच कर परेशान हो रहा था तभी फिर शर्मा  जी बोल पड़े …क्यों वर्मा जी, सुन कर आप को ख़ुशी नहीं हुई ?

नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है , शर्मा जी  | मैं उसे कैसे समझाऊँ कि  मेरे मन में इस वक़्त क्या चल रहा है |

खैर मैं बातों का सिलसिला बढ़ाते हुए पूछा …कितने दिनों का टूर है ?

आपलोग चार दिनों के लिए थाईलैंड जा रहे है और 24 लोगों का ग्रुप है | मैं पूरी जानकारी मेल द्वारा भेज दिया हूँ |

लेकिन आप की बातों से ऐसा लगा कि आपको  इस विदेश यात्रा की बात सुन कर प्रसन्नता नहीं हुई |

मुझे लाचार हो कर  अपनी कमजोरी के बारे में उसे बताना ही पड़ा |

मेरे सामने बैठे मेरे ग्राहक भी मेरी  वार्तालाप सुन रहे थे और उन्हें भीं मेरी कमजोरी का पता चल गया |  मुझे देख कर वो मुस्कुराने लगे |

खैर, अगर प्लेन वाली बात को छोड़ दिया जाए तो थाईलैंड और उसके आस पास घुमने के लिए चार दिनों का टूर पैकेज थे, जिसको सोच कर मैं आनंदित था |

जब यह बात अपने घर में बताया तो सबसे ज्यादा ख़ुशी मेरे छोटे बेटे को हुई थी |

उसी ने मेरे थाईलैंड  जाने की तैयारी शुरू कर दी | नए नए कपडे ख़रीदा गया, जूते भी ख़रीदे गए यहाँ तक कि travelling बैग भी नया ख़रीदा गया |

विदेश में अपने देश की इज्जत ना ख़राब हो इसका पूरा ध्यान रखा गया था | वीसा और पासपोर्ट वगैरह तो बैंक के तरफ से ही इंतज़ाम किया गया था |

और देखते ही देखते विदेश यात्रा का समय आ गया और मैं पूरी तैयारी के साथ पटना से दिल्ली के लिए रवाना हो गया |

क्योकि वहाँ से ही सब लोगों को साथ साथ थाईलैंड के लिए रवाना होना था |

मैं ग्रुप लिस्ट को जब देखा तो सारे ग्रुप के लोग राजस्थान से थे | मैं ही अकेला दुसरे स्टेट से था और उनमे कोई  पूर्व परिचित भी  नहीं था | मैं मन ही मन सोच रहा था कि कोई परिचित साथ होता तो यात्रा और भी मजेदार होता |

खैर मुझे याद है वह दिन , सोमवार 24 जुलाई , जिस दिन पटना से अपनी यात्रा शुरू की थी |

मैं पटना से  दिल्ली जाने के लिए जय प्रकाश नारायण एअरपोर्ट पहुँचा | साथ में छोड़ने के लिए घर के सदस्य भी आ गए थे | सभी लोग खुश दिखाई पड़ रहे थे, जबकि मेरे चेहरे पर तनाव साफ़ झलक रहा था | यह तो होना ही था क्योकि प्लेन में चढ़ने से पहले मेरा यही हाल हो जाता था  |

अगर कोई बाहरी आदमी उस समय देखता तो उसे महसूस होता कि  मुझे छोड़ कर बाकी सभी लोग सफ़र में जा रहे है | क्योकि मेरे चेहरे पर ख़ुशी की जगह उदासी साफ़ झलक रही थी  |

खैर किसी तरह दिल्ली पहुँच गया और वही एअरपोर्ट पर केयर टेकर और सभी साथी मिल गए | आपस में परिचय हुआ और फिर हमलोग चाय पिने के लिए पास के  रेस्तरां में बैठ गए |

एअरपोर्ट पर ही पता चला कि अभी जो शाम की हमारी फ्लाइट थी वह टेक्निकल कारणों से कैंसिल कर दिया गया है और उसकी जगह अब दूसरी फ्लाइट कल सुबह छः बजे रवाना होगी, एयरलाइन्स वालों ने ऐसा बताया था |

चूँकि बैंकाक  की फ्लाइट कल सुबह जाना था,  इसलिए आज रात होटल में ठहराने की इंतज़ाम की गयी थी |

ग्रुप के सभी लोग फ्लाइट के कैंसिल की खबर सुन कर दुखी हो गए , लेकिन मुझे तो सुन कर बहुत ख़ुशी हो रही थी | रात की फ्लाइट के सफ़र में तो मुझे और भी ज्यादा डर लगता था |

एअरपोर्ट से ही हमलोगों को एक बस के द्वारा “होटल रैडिसन” पहुँचाया गया, जो एअरपोर्ट से कुछ ही दूर पर थी……(क्रमशः )..

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ढोसा से मेरी पहली मुलाकात,,,

आज जब मोर्निंग वाक कर  वापस घर लौटा तो पाया कि सुबह सुबह घर में ढोसा बन रहा है और उसकी खुशबू मुझ तक पहुँच रही है |

ढोसा का स्मरण होते ही अचानक मुझे वो घटना याद आ गई जो बचपन में मेरे साथ घटी थी ..इसे आप इस तरह समझिये कि  बचपन में मेरा ढोसा से परिचय दुर्घटनावश ही हुआ था और उन दुर्घटना को आज भी जब याद करता हूँ तो मेरे चेहरे पर मुस्कराहट बिखर जाती है |

सच,  आज जब घर में ढोसा को बनते देखा तो वह दुर्घटना हमें अचानक याद आ गई और मैं बस अपने टेबल पर बैठ कर इस वक़्त उसी के बारे में ब्लॉग लिख कर  अपनी उस पुरानी यादों को ताज़ा कर रहा हूँ |

जी हाँ , मैं  ढोसा की  कहानी लिख रहा हूँ | वैसे तो ढोसा का  जन्म साउथ इंडिया में हुआ था लेकिन अब तो यह दुनिया के हर कोने में साउथ इंडियन डिश के तहत उपलब्ध है | आज कौन होगा जो ढोसा का स्वाद नहीं  चखा होगा , लोग बड़े चाव से इसे खाते है |

हाँ तो,  मैं कह रहा था कि बात बहुत पुरानी है, जब मैं 8-१० साल का रहा होऊंगा |

मैं नया नया रांची में शिफ्ट हुआ था, इससे पहले एक छोटे से कसबे में रहता था , लेकिन बड़े शहर में रहने का  मेरा पहला अनुभव था |

मैं घर में सबसे छोटा था इसलिए मुझ पर बहुत सी पाबंदियां थी और दोस्तों के साथ होटल वगैरह जाने की मनाही थी |

जब मैं रांची आया तो यहाँ वह पाबंदियां हटा दी गई थी / मुझे कही भी आने जाने की आज़ादी थी | लेकिन यहाँ अभी किसी से भी दोस्ती नहीं हुई थी / मैं बिलकुल अकेला महसूस करता था यहाँ |

एक दिन घर के बाहर मैदान में बैठा कुछ सोच रहा था तभी मुझे अचानक ढोसा की याद आ गई | मैं ने  दोस्तों के मुख से सुन रखा था कि कि लोग  जब  बहुत खुश होते है तो ढोसा खाते है |

मैं भी रांची आकर ख़ुशी महसूस कर रहा था | मैं मन ही मन प्लान बना लिया कि डिनर के बाद “गुप्ता मिस्टान भण्डार” जो घर से आधा  किलोमीटर दूर मार्किट में था, में जाकर ढोसा खाऊंगा |

मैं  सोचता था कि ढोसा किसी  मिठाई का नाम है, जैसे की गुलाब जामुन..|  मैं रात का भोजन कर रहा था और मेरे मन में पूर्व नियोजित प्लान चल रहा था | खाना बहुत स्वादिस्ट और मेरे मन पसंद का था …पनीर की सब्जी और चावल |

मैं कुछ ज्यादा ही खा लिया | और फिर टहलते हुए “गुप्ता मिस्टान भंडार” की ओर चल दिया..|

रात  के नौ बज रहे थे और गर्मी के दिन थे |  मैं  पसीना पोछता हुआ दूकान पहुँच ही गया | मैं पहली बार इस दूकान में आया था | दूकान में भीड़ नहीं थी इसलिए मुझे अकेला एक टेबल मिल गया और मैं आराम से बैठ गया |

थोड़ी देर में आर्डर लेने के लिए एक स्टाफ आया और मैंने  कहा … ढोसा ले आओ | उसके जाने के बाद मैं आराम से गद्देदार सोफे पर बैठ कर पंखे  की हवा खाने   लगा | चूँकि डिनर कुछ हैवी हो गया था इसलिए पंखे की हवा लगते ही नींद सी आने लगी |

मुझे थोड़ी देर के लिए झपकी भी लग गई | अचानक मेरी आँखे खुली तो सोचा अभी तक मेरा मिठाई (ढोसा} नहीं आया है , जिसे टेस्ट कर घर जा सकूँ |

तभी देखा कि  वेटर एक प्लेट में कोई आइटम बगल वाले टेबल पर सर्व कर रहा है ….प्लेट में कागज़ की तरह लम्बा और पतला …..कोई आइटम था जिसे मैं पहचान नहीं पाया |

मैं पहली बार इस तरह का कोई खाने का आइटम देख रहा था | वैसे तो सभी तरह की मिठाइयों की जानकारी थी , लेकिन इसे देख कर मेरे मन में शंका पैदा हुई कि कहीं यही तो ढोसा नहीं है,  जो मेरे लिए आना बाकी है |

मुझे मन ही मन यह सोच कर घबराहट होने लगी,  क्योकि खाना तो मैं खा चूका था,  वो भी बिलकुल टाइट | अगर  सचमुच में यही चीज़ आ गयी तो मैं क्या करूँगा | मुझे सोच कर ही चेहरे पर पसीने की बुँदे नज़र आने लगी |

मैं आँख बंद कर भगवान् से प्रार्थना करने लगा … हे भगवान्, जो बगल वाला खा रहा है वह ढोसा  नाम का व्यंजन ना हो | तभी मेरे टेबल पर  प्लेट रखने की आवाज़ हुई, और मेरी आँखे खुल गई | मैंने  देखा तो वही चीज़ मेरे सामने रखा हुआ  है |

लोग ढोसा खा कर खुश हो रहे थे और मैं उसे देख कर दुखी हो रहा था , क्योकि उसे खाने के लिए पेट में जगह ही नहीं थी और बिना खाए उठ नहीं सकता था | क्योकि लोग समझेंगे कि बिलकुल देहाती है |

मरता क्या न करता … मैं धीरे धीरे पूरा ढोसा खा गया, हालाँकि उसको खाने में मुझे पुरे आधा घंटा लगे | 

इज्जत बचाने के चक्कर में पूरा ढोसा खा तो गया लेकिन अब समस्या थी कि पेट फुल कर फटा जा रहा था और मुझे अभी  आधा किलोमीटर चल कर घर भी जाना था .|.

खैर किसी तरह मैं तो घर पहुँच गया और जब मेरी भाभी ने सारी कहानी को सुना  तो वहाँ उपस्थित सबलोग ठहाका मार कर हँस पड़े और इतना हँसे कि हँसते हँसते सबों के पेट में बल पड़ गए |

मैं बस खिसियानी बिल्ली की तरह  अपने चेहरे पर जबरदस्ती की हँसी  ओढ़ कर हँसने वालों का साथ देता रहा |

 मेरी जो दुर्दुसा हुई थी उसकी शब्दों में वर्णन करना मुश्किल है …आज भी जब मुझे ढोसा से सामना होता है तो वह घटना मेरे आँखों के सामने तैर जाती है ..

मेरा लिखना अभी समाप्त ही हुआ था , तभी घर का बना ढोसा सामने मेरे टेबल  पर आ कर रखा गया है ….अब इसकी स्वाद के बारे में अगले ब्लॉग में बता पाउँगा ..तब तक के लिए……

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भविष्यवाणी ज्योतिष का…

लोग ठीक ही कहते है कि ज़िन्दगी एक कोरा कागज़ की तरह होता है और  हम उस पर विभिन्न रंगों को बिखेर कर  उसे और सुन्दर बनाने का  प्रयास  करते है |

मेरी भी जीवन यात्रा कुछ अलग तरह से गुजरी है जिसे याद कर न सिर्फ मन को शुकून मिलता है बल्कि चेहरे पर बरबस  मुस्कान बिखर जाती है |

बात उन दिनों की है जब मैं कॉलेज में पढता था और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था |

हालाँकि इंटरमीडिएट मे math और एक्स्ट्रा सब्जेक्ट में बायोलॉजी भी ले रखा था और दोनों में पास भी हो गया था | मतलब यह कि इंजीनियरिंग और मेडिकल दोनों के लिए होने वाले  entrance  टेस्ट में appear हो सकता था | 

मुझे आशा थी कि इंजिनियर या फिर मेडिकल  दोनों में से  कोई एक में तो क्वालीफाई  कर ही जाऊंगा | मैं उसी के अनुसार अपनी तैयारी  भी कर रहा था |

तभी मुझे पता चला कि  एक व्यक्ति पेशे से तो इंजिनियर है पर वे लोगों के  हाथ देख कर सटीक भविष्यवाणी करते है |

चूँकि वे काफी पढ़े लिखे व्यक्ति थे और पैसो का भी उनको कोई लालच नहीं था  इसलिए फ्री में हाँथ दिखलाने के चक्कर में  कॉलेज से लौटते समय उनकी घर की तरफ  चल पड़ा | साथ में मेरा एक दोस्त भी था |

जब मैं वहाँ पहुँचा तो वहाँ  लोगों की काफी भीड़ थी | मैं भी अपने  दोस्त के साथ जाकर वहाँ बैठ गया .|

करीब आधा घंटा के बाद मेरा नम्बर आ गया और  मैं उनके चैम्बर में दाखिल हो गया |

उनको देख कर नहीं लगा कि ये ज्योतिषी विद्या भी जानते होंगे |

बिना चन्दन टिका लगाए और बिना गेड़ुआ  वस्त्र धारण किए, वे बिलकुल साधारण से व्यक्ति दिख रहे थे |

खैर , संक्षिप्त परिचय के बाद उन्होंने मेरे दोनों हाथ की हथेली  में कालिख  लगाकर  एक सादे पेपर पर उसकी छाप ले ली, ताकि मेरे हाथों की लकीरें साफ़ साफ़ कागज़ पर अंकित हो जाये |  फिर कुछ देर मुझे इंतज़ार करने को कहा |

मुझे समझ में नहीं आया कि हाथ की रेखाएं ही देखना था तो सीधे मेरी हाथ को देख सकते थे ,परन्तु हमारे हाथ की छाप लेने की क्या ज़रुरत पड़ गयी |

लेकिन मेरे समझने और न समझने से उन्हें क्या फर्क पड़ने वाला था |

मैं वही पास में  रखे बेंच पर बैठ कर इन्ही ख्यालो में डूबा हुआ था और  उनके बुलावे का इंतज़ार कर रहा था |

करीब आधे घंटे के पश्चात् उनके एक आदमी मेरे पास आए और कहा …. आपको अन्दर साहब बुला रहे है |

मैं  उस महाशय के साथ फिर उनके चैम्बर में दाखिल हुआ | मैं उनके सामने कुर्सी पर बैठ गया | मुझे महसूस हुआ कि एक कागज़ के टुकड़े पर उन्होंने कुछ लिख रखा है |

अपनी बात शुरू करते हुए उन्होंने कहा …. आप पाँच साल की उम्र में भयानक दुर्घटना के शिकार हुए थे और आप की जान मुश्किल से बचाई जा सकी थी |

मैं ने कहा …यह तो सत्य है | इसी तरह बहुत सारी बीती  बातों को बताते रहे | लेकिन मुझे ज़िन्दगी में बीत चुके घटना को जानने की कतई  इच्छा नहीं थी | मुझे तो आने वाले भविष्य की जानकारी में उत्सुकता थी |

इसलिए मैं अधीर होते हुए कहा…मुझे आप मेरे भविष्य के बारे में बताएं | मैं अपने भविष्य की जानकारी हेतु आप के पास आया हूँ |

उन्होंने मेरी ओर देखते हुए पूछा…आप क्या जानना चाहते है ?

मैंने कहा…मैं एक विद्यार्थी हूँ और मैं कम्पटीशन की तैयारी कर रहा हूँ | आप मुझे यह बताएं कि मैं मेडिकल क्वालीफाई करूँगा या इंजीनियरिंग | मैं इन्ही दोनों की तैयारी कर रहा हूँ |

उन्होंने अपने पास के कागज़ के टुकड़े को देखा और कहा ….आप का ना तो मेडिकल में जा सकेंगे और ना ही इंजीनियरिंग में, लेकिन इनके अलावा कोई तीसरी टेक्निकल लाइन में आप जाएंगे |

मैं उनकी बात को सुन कर चौंक पड़ा | क्योकि इन दोनों के अलावा कोई तीसरा टेक्निकल लाइन था ही नहीं जिसकी मुझे जानकारी थी और उनके लिए कोई तैयारी भी नहीं कर रहा था |

मैं उनसे बहस करने लगा , लेकिन वे बस एक ही बात कहते रहे कि आप टेक्निकल लाइन में तो जायेंगे लेकिन इन दोनों को छोड़ कर |

मुझे उनकी इन बातों पर विश्वास  नहीं हुआ , हालाँकि मेरे बारे में और सभी बातें बिलकुल सत्य बताई थी |

मैं दुखी मन से वापस अपने घर आ गया और  मेरे दिमाग में उनकी बातें घुमती रहती थी |

आज जब उन  बातों को याद करता हूँ तो बरबस ज्योतिष में विश्वास करने को जी चाहता है |

क्योकि उनकी यह भविष्यवाणी बिलकुल  सही साबित हुई |…… मेरा ना इंजीनियरिंग में एडमिशन हो सका ना मेडिकल में |

हाँ,  मैं एग्रीकल्चर कॉलेज  में एडमिशन हेतु क्वालीफाई कर पाया , लेकिन वह तब टेक्निकल नहीं था | मुझे उनकी बात याद आ गई और मैंने  सोचा कि मैं तो पहले से ही जानता था कि तीसरा technical college में admission की भविष्यवाणी सच नहीं होगी

लेकिन मैं आप सबों को याद दिलाना चाहता हूँ कि  हमलोगों के एडमिशन के एक साल के बाद ही agriculture की पढाई को टेक्निकल घोषित कर दिया गया था  और इस तरह से उनकी भविष्यवाणी सत्य साबित हुई थी |

मुझे कभी कभी  यह सोच कर बहुत आश्चर्य होता है कि हाथ की लकीरों में इतनी सारी जानकारी होती है |  मैं उनकी भविष्यवाणी के अनुसार एक टेक्निकल कॉलेज में पढ़ रहा था |

मुझे लगता है कि जो भी व्यक्ति इस विद्या को सही ढंग से जानता है वह लोगों के भविष्य की जानकारी सही सही दे सकता है |

मैं उस इंजिनियर सह ज्योतिष से दुबारा दो सालों के बाद मिलने पहुँचा  | मेरे दिल में उनके प्रति सम्मान बहुत बढ़ गयी थी |

एक मिठाई का डिब्बा लिए मैं उनके घर पर पहुँच गया, लेकिन वह मिठाई का डब्बा मेरे हाथों में ही रह गया … क्योकि मुझे पता चला कि वे अब इस दुनिया में नहीं है |

इतनी कम  उम्र में उनका इस दुनिया से चले जाना मुझे अन्दर तक झकझोर दिया / मैं सोचने लगा …..

क्या उन्हें अपने भविष्य के बारे में जानकारी थी  कि वे इतने कम उम्र में ही स्वर्ग सिधार जायेंगे ?

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