भूत प्रेत को खाना खिलाते है ?

हैलो दोस्तों,

जिस तरह हम भगवान को मानते है उसी तरह कुछ लोग प्रेत आत्मा को भी मानते है | वैसे मैंने भूत – प्रेत से जुड़ी कहानी पिछले कुछ ब्लॉग में शेयर किया है  |

मैं भूत प्रेत को नहीं मानता हूँ लेकिन भूत प्रेत से संबन्धित कुछ घटनाओं के बारे में जानने के बाद मुझे भी इन बातों पर यकीन करने को मन करता है |

आज के इस वैज्ञानिक युग में भी एक ऐसा देश है जो भूत प्रेत को मानता ही नहीं बल्कि उसके लिए विशेष त्योहार का आयोजन किया जाता है |

जी हाँ , मैं बात कर रहा हूँ देश कोम्बोडिया का |  वहाँ  इन दिनो एक त्योहार का आयोजन किया जा रहा है जिसे पचम बेन फेस्टिवल के नाम से जाना जाता है |

जहाँ भूतों को खाना खिलते है

कोम्बोडिया एक ऐसा  देश है जो भूत-प्रेत की वजह से हमेशा चर्चा में रहता है। कई लोग इन पर यकीन नहीं करते हैं, तो कुछ भूत प्रेत को लोग मानते हैं।

यह एक ऐसा देश है जहां भूत-प्रेतों को खाना खिलाया जाता है | इसे एक उत्सव के रूप में मनाते  है और  यह सिलसिला 15 दिनों तक चलता है। इसके पीछे एक खास वजह बताई जाती है जिसके बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे।



वहाँ के लोगों  का मानना है कि अगर भूतों का खाना नहीं खिलाया जाता है, तो बुरी आत्माएं और भूत उनके परिवार के लोगों को परेशान करते हैं। अब यह कितना सच है और कितना झूठ इस बारे में हम नहीं बता सकते हैं। हालांकि वहाँ के लोगों को इसके पीछे एक विश्वास है, एक डर है जिसकी वजह से वह ऐसा करते हैं।

आपने भी भूत-प्रेत की कई कहानियां सुनी होंगी, लेकिन ऐसी मान्यता के बारे में शायद ही पहले कभी सुना हो । आइए इसके बारे में विशेष पड़ताल करते है कि आखिर यह मान्यता और इसकी वजह क्या है? 

यहाँ पचम बेन फेस्टिवल मनाते है

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई देश कंबोडिया में इस तरह की मान्यता है। इस देश में शरद ऋतु के दौरान एक त्योहार मनाया जाता है जिसे पचम बेन फेस्टिवल (Pchum Ben festival) के नाम से जाता है।  हर साल सितंबर और अक्टूबर के बीच खमेर चंद्र कैलेंडर के 10 वें महीने में 15 दिनों तक यह त्योहार चलता है।

कंबोडिया में मान्यता है कि इस त्योहार के दौरान नरक के दरवाजे 15 दिनों के लिए खुल जाते हैं। इसके बाद बुरी आत्माएं और भूत बाहर आ जाते हैं और इधर उधर विचरण करने लगते है | ये आत्माएं भूखी होती हैं। इनको शांत करने के लिए खाना खिलाया जाता है। इस त्योहार में चार प्रकार के भूत और आत्माएं होती हैं। एक अस्थायी रूप से मुक्त आत्माएं होती हैं जो खून पीती हैं। इसे खमेर महोत्सव के तौर पर जाना जाता है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान मंदिरों, कब्रिस्तानों और अपने रिश्तेदारों के घरों के आसपास भूत घूमते रहते हैं और अच्छे खाने की तलाश करते हैं। अगर इन भूतों को अच्छा खाना नहीं मिलता है, तो घर के लोगों को परेशान करते हैं। कंबोडिया में लोग इस मान्याता को बहुत अधिक मानते हैं। यहां पर लोग अपने सात पूर्वजों को खाना खिलाते हैं।

भूत रोशनी नहीं पसंद करते

बताया जाता है कि त्योहार शुरू होने के पहले दिन लोग सूरज निकलने से पहले ही भोजन बना लेते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, क्योंकि भूत रोशनी नहीं पसंद करते हैं। अगर थोड़ी सी भी सूरज की रोशनी दिख गई, तो भूत भोजन स्वीकार नहीं करते हैं और लोगों को पापों की सजा मिलती है। 

कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में एक भिक्षु ओम सैम ओल ने कहा था – यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि किसी का मृत रिश्तेदार स्वर्ग में है या नरक में | लेकिन ऐसा माना जाता है कि मरने के बाद कुछ आत्माओं को उनके पापों की सजा मिलती है | उन्हे नरक में भेज दिया जाता है जहां उन्हे तरह तरह की यातनाएं  दी जाती है | वे बहुत पीड़ा का सामना करते है |

नरक लोगों से कोसों दूर है | वे आत्माएं सूर्य की किरण को नहीं देख सकतीं है |  उनके पास पहनने के लिए कपड़े नहीं होते हैं और  खाने के लिए भोजन नहीं होते है ।” उन्होंने आगे कहा, “फचम बेन वह अवधि है जब वे आत्माएं अपने जीवित रिश्तेदारों से प्रसाद प्राप्त करती हैं और शायद कुछ राहत प्राप्त करती हैं | रिश्तेदार उन्हें भोजन और अन्य प्रसाद समर्पित करते हैं।

पूर्वजों का पिंड दान करते है

वैसे हम लोग भी अपने पूर्वजों का पिंड दान करते है | शायद हम लोगों का  भी उद्देश्य  कुछ इसी तरह का है |

हमारे समाज में ऐसी मान्यता है कि विधि पूर्वक पितरों का श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और वो अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं |  पितृ पक्ष हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होता है जो 15 दिनों तक चलता है |  पितृ पक्ष में सबसे खास दिन सर्व पितृ अमावस्या का होता है |  

इस साल 10 सितंबर, शनिवार को पितृ पक्ष शुरू हुआ था | इस दिनों में लोग अपने पितरों का तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध करते हैं ताकि उन्हें शांति मिले | सर्व पितृ अमावस्या को पितृ विसर्जनी अमावस्या भी कहा जाता है |

ऐसा कहा जाता है कि पितरों के प्रसन्न होने से वंशजों का भी कल्याण होता है | पितृ पक्ष के दौरान पितरों की पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं परेशानियां दूर होती हैं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है |.

(Pic Courtesy: Google. com )

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Categories: infotainment

9 replies

  1. It’s an interesting topic, you have rightly taken up. It resembles Taiwanese Ghost Festival, when people pay their respects to deceased relatives. Something like Shab-e-barat in Muslims and our own pitri paksha festival.

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  2. अच्छी जानकारी।

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  3. कंबोडिया में ऐसा कोई उत्सव मनाया जाता है यह अनोखी जानकारी के लिए धन्यवाद, बहुत अच्छी जानकारी मिली।

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  4. Aisa concept mene thoda bhut ek movie me dekha tha!!
    I wonder ki kya yeh sach he ki ni!

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  5. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Good afternoon friends,
    Think big thoughts but relish small pleasures.

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