इस हत्या का दोषी कौन ? – 2

एक बार तो पुलिस को विश्वास ही नहीं हुआ कि 16 साल का मासूम लड़का अपनी माँ की हत्या  कर सकता है | माँ का कसूर बस इतना था कि वह अपने बच्चे को मोबाइल पर गेम खेलने से मना करती थी | सचमुच ये बातें बेचैन करने वाली है | सोशल मीडिया का दखल  हमारे ज़िंदगी में कितना है इस घटना से साफ पता चलता है |

 16 साल के इस बच्चे ने बताया कि पिछले शनिवार को माँ ने  10,000 रुपए कहीं रखे थे, वे गुम हो गए थे | इससे पहले भी मैंने माँ के रखे पैसो की चोरियाँ करता रहता था, जिसके कारण बहुत बार मार भी खाया था |

मैं मोबाइल पर हमेशा गेम में रहता था |  ज्यादा समय सोश्ल मीडिया पर बिताना  अच्छा लगता है | जिसके लिए हमेशा माँ टोका-टाँकी करते रहती थी |  मुझे PUB-G गेम खेलना बहुत पसंद है | लेकिन माँ हमेशा कहती कि पढ़ाई करो और बार बार मेरा मोबाइल छीन लेती थी |

उनके 10,000 रुपए गायब होने के शक में मुझे बहुत भला बुरा कहा गया, हालांकि मैंने वो पैसे नहीं लिए थे | वो पैसे माँ को उस जगह से  मिल गए जहां रख कर वह भूल गई थी | लेकिन इस घटना के कारण मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था |

उसके बाद रात को खाना खाया और हम तीनों एक ही कमरे में सो गए | माँ और बहन बेखबर सो रही थी लेकिन मुझे रात में नींद नहीं आ रही थी | PUB -G गेम खेलते समय मोबाइल छिनने  पर मुझे  बहुत गुस्सा आ रहा था | तभी घड़ी देखा तो रात के दो बज रहे थे | मैं चुप चाप बिस्तर से उठा और पास के कमरे में रखे अलमारी के पास गया |

मैंने धीरे से अलमारी खोल कर उसमें रखे  पापा का सर्विस रिवाल्वर निकाला , क्योंकि मुझे पता था कि वहाँ रिवाल्वर रखी  हुई है |

मैं रिवाल्वर में गोली डाली और चुपचाप माँ के पास आया | मैंने देखा माँ पूरे नींद में सो रही है | मैंने बेहद करीब से माँ के सिर में एक गोली मारी | मैं दूसरी गोली भी चलना चाहता था लेकिन मुझे एहसास हुआ कि गोली की आवाज़ से पड़ोसी जाग सकते है | लेकिन तभी मेरी छोटी बहन गोली की आवाज़ सुन कर जाग गई | उसने वह दृश्य देखा तो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी |

मुझे लगा इसके रोने से आस पास के पड़ोसी न जाग जाएँ , इसलिए रिवाल्वर दिखाते हुए बहन को डराया कि अगर वह चुप न हुई तो उसे भी गोली मार देगा | वह डर  कर चुप हो गई | मेरी माँ मर चुकी थी |

मैंने अपनी बहन को माँ के पास से उठाया और दूसरे कमरे में बिस्तर बिछा कर उसे सुला दिया और मैं खुद भी सो गया , जैसे कुछ हुआ ही नहीं |

अगला दिन रविवार था और मैं रविवार को क्रिकेट मैच खेलने जाया करता था | मैं सुबह उठा हाथ मुंह धोकर तैयार हुआ | बहन को घर के अंदर बंद कर बाहर से ताला लगाया और खेलने चला गया | क्रिकेट खेल कर करीब 2 घंटे बाद घर वापस आया और घर का ताला खोल ही रहा था कि पड़ोस वाली आंटी ने मुझे ताला खोलते देख लिया तो उन्होंने पूछा  – मम्मी कहाँ है ? मैंने उनसे झूठ बोला कि  मम्मी दादी को देखने चाचा के घर गई है |

तब आंटी  ने मुझे  खाना भी दिया और फिर हम भाई बहन खाना खाये | उसके बाद पापा के लैप -टॉप पर मनपसंद फिल्म देखी, फिर बड़े इतमीनान से PUB-G गेम खेला , क्योंकि अब टोकने वाली मम्मी भी नहीं थी |

इस तरह रात हो गई | माँ की लाश दूसरे कमरे में थी | हमने रात का खाना खाया और फिर मैं कमरे में आराम से सो गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं |

अगला दिन सोमवार था, सुबह उठा और फिर मोबाइल पर गेम खेलने में लग गया | गेम खेलते हुए  मुझे  महसूस हुआ कि दूसरे कमरे से भयंकर बदबू आ रही है | अगर यह बदबू बाहर चली गई तो पकड़े जाएंगे |  

मैं बहुत सोचा तो मुझे एक आइडिया आया और मैं ने room freshener  पूरे कमरे में डाला |  जिससे बदबू कुछ कम हुई,  तब राहत की सांस आई | पड़ोसी के द्वारा दिये  हुए खाने को खाया और इस तरह सोमवार की रात को भी वह आराम से सो गया जैसे कुछ हुआ ही नहीं |

इस तरह सोमवार की रात गुज़र गई और मंगलवार के सुबह की धूप से मेरी  नींद खुल गई | सुबह उठ कर फिर  मोबाइल पर गेम खेलने में मशगूल हो गया | लेकिन तभी मुझे एहसास हुआ की लाश की बदबू के कारण घर में रहना मुश्किल हो रहा है  | Room freshener से भी बदबू कम  नहीं हो पा रही थी |

किसी तरह शाम हुई , लेकिन मेरे मन में यह डर बैठ गया कि यह बदबू अगर बाहर तक फैल गई तो पड़ोसी घर में आ जाएंगे और सारा राज खुल जाएगा |

मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था | घड़ी में देखा तो रात के आठ बज रहे थे | कोई और उपाय नहीं सुझा तो पापा को आसनसोल फोन लगाया | पापा ने फोन उठाया तो मैंने  कहा – पापा, बिजली वाले  अंकल ने मम्मी को मार दिया |

पापा ने यह सुना तो वे घबरा गए और तुरंत लखनऊ में ही रहने वाले मेरे मामा जी को फोन लगा कर स्थिति के बारे में बताया और जल्दी घर पहुँचने को कहा | मामा जी खबर पाकर घबराए हुए  घर आए और देखा कि उनकी बहन की लाश कमरे में पड़ी है |

पुछने पर मैंने वही बात दुहराई कि बिजली वाले अंकल ने माँ को मार डाला | चूंकि मामला मर्डर का था , इसलिए मामा ने पुलिस को फोन किया | पुलिस आई और फिर सारी सच सामने आ गई |

फिर पुलिस ने उस लड़के से पूछा – तुम बिना सोचे समझे इतना बड़ा कदम कैसे उठा लिया ? तब उसने पुलिस को सच सच बताया कि माँ हमेशा मुझे मोबाइल पर गेम खेलने से  और ऑनलाइन रहने पर बहुत टोकती थी | गेम खलते समय कोई टोके तो मुझे बिलकुल बरदाश्त नहीं होता है , चाहे मेरी माँ ही क्यों न हो |

मुझे टोका टाँकी बिलकुल पसंद नहीं | मुझे ऐसा लगता था कि मेरी माँ मेरी आज़ादी को कुचल रही है  और मैं इस बन्दिशों से  आज़ाद रहना चाहता था |

अब सवाल यह है कि इस हत्या के लिए किसे दोष दिया जाए | प्रत्यक्ष रूप तो लड़का ही  जिम्मेदार है | लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से आज का माहौल, परिवार और सामाजिक व्यवस्था बहुत हद तक जिम्मेदार है | जिसमें सब का उद्देश्य धन और इज्जत कमाना होता है न कि बच्चों में चरित्र का निर्माण करना |

उनके पास बच्चों के लिए समय ही नहीं बचता है | आज कल तो सोशल मीडिया का हमारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दखल बढ़ता जा रहा है , जिसका दुष्परिणाम भी सामने आने लगे है | लोग समाज और परिवार से कट कर एकाकी  जीवन व्यतीत करने लगे है जिसका परिणाम औसाद और मानसिक असंतुलन के रूप में सामने आ रहा है | यह एक विचारनिए विषय है | (Pic Source : Google.com)

कहानी के पहले भाग के लिए   नीचे link पर click करे..

इस हत्या का दोषी कौन ? – 1



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