जीवन एक संघर्ष है –4

रामू काका शिवानी को प्यार से देखा और उसके सिर पर हाथ रख कर कहा – बेटी, पूरे गाँव को तुम पर गर्व है |  तुमने अपने बहादुरी से हमारे गाँव का नाम रोशन किया है | इतना कहते हुए हाथ में लिए अखबार को शिवानी की ओर बढ़ा दिया |

शिवानी ने देखा उस समाचार में उस का फोटो छपा है और साथ में उसके बहादुरी के किस्से भी छपे है | अंतर्राष्ट्रीय गिरोह को पकड़वाने में मदद करने के लिए शिवानी को 15 अगस्त को सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना है | इस खबर को पाकर शिवानी खुश हो गई  | उसने झट से रामू काका के पैर छु कर आशीर्वाद लिया | 

रामू काका ने आशीर्वाद देते हुए कहा – तुम्हें तो 4 दिनों बाद ही स्वतन्त्रता दिवस पर वहाँ जाना है | तुम अपनी तैयारी शुरू कर दो | मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा |

शिवानी को आज अपने गाँव की ताज़ी हवा और अपने हरे- भरे खेतों को देख कर बहुत अच्छा लग रहा था | वह टहलते हुए अपने खेतों की ओर से वापस आ रही थी और सोच रही थी कि अब हमारी भी ज़िंदगी इसी तरह खुशनुमा बन जाएगी |

अपने खेतों से वापस घर आकार अपने ब्रीफकेस चेक किया तो उमसे कुछ पैसे थे | उन पैसों से उसने घर के कुछ आवश्यक सामानों का इंतज़ाम किया | उसकी सहेली सुषमा चूंकि विधवा हो गई थी और गाँव में ही छोटा मोटा काम कर गुज़ारा कर रही थी | इसलिए उसे अपने साथ रहने को राज़ी कर लिया ताकि दोनों एक दूसरे का सहारा बन सके |  

इस तरह चार दिन बीत गए | पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार वह पंद्रह अगस्त के सुअवसर पर समारोह में उपस्थित थी | रामू काका भी साथ थे |

कुछ ही देर में शिवानी के नाम की घोषणा हुई | साथ ही साथ उसके बहादुरी की भूरी- भूरी  प्रशंसा की गई | वह प्रशस्ति पत्र पाकर बहुत खुश थी | तभी शिवानी को माइक पर बोलने का अवसर मिला |

शिवानी ने कहा – मैं इस सम्मान को पाकर बहुत खुश हूँ |  मैं देश और समाज की सेवा करना चाहती हूँ | अगर मुझे पुलिस महकमे में सेवा करने  का मौका मिला तो मेरी खुशी और बढ़ जाएगी |

उसकी बातों को आला अधिकारी सभी सुन रहे थे | उसके भाषण समाप्त होते ही एक बड़े पुलिस अधिकारी ने घोषणा किया  कि फिलहाल शिवानी को अपने महकमे में कांस्टेबल के पद पर काम करने का ऑफर दिया जाता है |

शिवानी  इस ऑफर को पाकर खुश हो गई | उसे तो अपनी ज़िंदगी को फिर से पटरी पर लाने के लिए एक सुनहरा मौका मिला था | रामू काका भी खबर सुनते ही शिवानी के पास जाकर खुशी प्रकट की और उसके अच्छे भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया | 

करीब 15 दिन बीते थे कि उसे अपने कस्बे के ही पुलिस स्टेशन में कांस्टेबल के पद पर शिवानी को ज्वाइन करने हेतु आदेश प्राप्त हुआ | दिन बीतते गए और  शिवानी खूब मन लगा कर अपनी जिम्मेवारी निभा रही थी | उसे अच्छे काम के लिए  आला ऑफिसर से सराहना भी  मिल रही थी |

वह पढ़ी लिखी तो थी ही , इस तरह करीब तीन साल बीतने के बाद उसे प्रमोशन दे कर दारोगा बना दिया गया | शिवानी की जैसे दुनिया ही बदल गई | उसके गोद में अपना बेटा था और अब प्रमोशन भी मिल गया | इस सफल जीवन यात्रा में सुषमा भी उसकी बहुत मदद कर रही थी |

लेकिन अब एक समस्या आन खड़ी हो गई | प्रमोशन मिलते ही उसे दूसरे शहर योगदान देना पड़ा | अब तो ड्यूटि की ज़िम्मेवारी बहुत बढ़ गई थी, इसलिए अपने बच्चे को साथ नहीं रख पा रही थी | उसने  अपने बेटे को बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया |

सुषमा को भी जीवन यापन करने के लिए पैसों की ज़रूरत थी | इसलिए उसे मदद करने हेतु उसी शहर के रेलवे  स्टेशन के पास  खाने पीने  की एक स्टॉल खुलवा दी | इस तरह दोनों समस्या का समाधान करने के बाद वह पारिवारिक समस्याओं से निश्चिंत हो गई | अब वह चिंतामुक्त  होकर नौकरी करने लगी |

थोड़े दिनों में ही उसके महकमे में उसके कामों की खूब तारीफ  होने लगी | अपने इलाके में किसी भी  अबला नारी पर जुल्म होता देख उसकी सहायता हेतु तुरंत पहुँच जाती थी | इस तरह वह कमजोर और दुखियारी महिलाओं का मसीहा बन चुकी थी |

एक दिन वह अपने ऑफिस में बैठी थी तभी एक औरत अपनी समस्या लेकर उसके  पुलिस स्टेशन आई | उसे देखते ही शिवानी उसे पहचान गई | यह तो वही  ममता थी जो  दुबई में उस गिरोह का शिकार बनी थी और उसके साथ ही आज़ाद होकर वापस इंडिया आई थी |

उसने जल्दी से ममता को कुर्सी पर बैठाया और उसका हाल- चाल पूछा और फिर उसके लिए चाय मंगवाया |

ममता ने बताया कि मेरा पति  मुझे रोज़  पीटता है | मेरे दुबई से आने के बाद मेरे घर वालों  ने  भी मुझसे मुंह मोड लिए है | मैं पिछले  एक साल से किसी तरह मुसीबत भरी ज़िंदगी काट रही हूँ | उसकी बात सुन कर शिवानी को बहुत दुख हुआ | लगता है सारे मरद एक जैसे होते है — वह मन ही मन बुदबुदाई |

खैर, दूसरे दिन ही शिवानी उसके घर पहुँच गई | ममता के पति को, कुछ डंडे दिखा कर और कुछ प्यार से समझाया | नतीजा यह हुआ कि उजड़ता हुआ घर फिर से बस गया | वे लोग प्रेम पूर्वक रहने लगे | उन यादों को सोच शिवानी को हंसी आ गई |

तभी शिवानी को अचानक हँसता देख सुषमा पूछ बैठी |  क्यों, किसी की याद आ गई क्या ? शिवानी अपने सपनों की  दुनिया से हकीकत की  दुनिया में वापस आ गई और फिर दोनों एक दूसरे को देख कर ज़ोर से हंस पड़े | (यह कहानी काल्पनिक है और फोटो Google.com के सौजन्य से )  

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9 replies

  1. Kahani Bahut Badhia. Mujhe laga Sushma kuchh julum Kiya hai. Isiliye usko arrest karne ke liye Sibani ne kahi. Dosti ki pehchhan. Majak tha.

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  2. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Magic is believing in yourself. If you can do that,
    you can make anything happen”

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