जीवन एक संघर्ष है –3

भारतीय दूतावास का आदमी बहुत भला था | उसने अपने वादे और उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्यवाही शुरू की  और भारतीय दूतावास हरकत में आ गई | उसने भारत सरकार और साथ ही दुबई सरकार को भी इस अंतर्राष्ट्रीय धंधे के बड़े नेटवर्क के बारे में  सारी जानकारी उपलब्ध कराई |

इतने बड़े गिरोह के बारे में जानकारी मिलने से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया | आनन – फानन में दोनों देशों के अधिकारियों को मिला कर एक संयुक्त  उच्च स्तरीय टास्क फोर्स  का गठन किया गया |

उसके बाद दोनों देशों की पुलिस एक्शन में आ गई और एक साथ मिलकर विभिन्न ठिकानों पर छापामारी की गई | इसका नतीजा यह हुआ कि जल्द ही पुलिस को सफलता हाथ लगी और  पूरे  गिरोह के लोग सलाखों के पीछे आ गए |

इसके साथ ही उन लोगों के चंगुल से बहुत सारी लड़कियों को आज़ाद कराया गया | दुबई  की सरकार ने उन सभी लड़कियों को इंडिया भेजने का इंतज़ाम किया |

और वो दिन भी आ ही गया जिस दिन सभी को भारत लौटने हेतु विमान पकड़ना था |  सचमुच, आज का दिन उन लोगों के लिए बहुत खुशी का था | शिवानी के साथ सभी लड़कियों अपने वतन आने के लिए प्लेन  में बैठी थी, जो अभी -अभी इंडिया के लिए उड़ान भरने वाली थी |

 सभी लड़कियां खुश थी क्योंकि वो अपने को अब आज़ाद महसूस कर रही थी | वे सभी  शिवानी को बहुत दुआएं दे रही थी | शिवानी भी खुश थी | उसे भी इस नरक की  ज़िंदगी से छुटकारा मिलने वाली थी | अब वह भी  एक आज़ाद पंछी की तरह महसूस कर रही थी |

वह आंखें बंद कर अपने बिताए पिछले एक साल की कष्टमय जीवन को याद कर रही थी तभी उसे अपने  माता  पिता की याद आ गई | सच ही कहा गया है कि बड़े बुजुर्ग का कहा  मानना ज़रूरी है, नहीं तो पछताना भी पड़  सकता है |  उसने अपने पिता का कहना नहीं माना था इसी कारण आज मुसीबतों का सामना कर रही थी | आज पूरे एक साल हो गए उन लोगों को देखे हुए  | पता नहीं वे किस हाल में होंगे | हमें तो उनका सहारा बनाना था लेकिन मैंने तो घर छोड़ कर उन्हें काफी दुख पहुंचाया है |

उनके पास जाकर सबसे पहले उनके पैरों पर गिर कर अपनी गलती के लिए माफी माँगूंगी  और फिर आगे की उनकी  ज़िंदगी को बेहतर बनाने की कोशिश करूंगी |

अब तो वह भी माँ बनने वाली है | वह इस बच्चे को जन्म देगी और  एक अच्छा इंसान बनाएगी | शिवानी अपने आंखें बंद किए यह सब सोच ही रही थी कि प्लेन के टेक ऑफ की घोषणा हुई  और सभी लड़कियों ने मुसकुरा कर खुशी का इज़हार किया  |

शिवानी ने  अपने आंखें खोल कर देखा, सच सभी लोग इस नरक की दुनिया से आज आज़ाद हो कर कितना खुशी महसूस कर रहे थे |

और अंततः हवाई जहाज इंडिया की  ज़मीन पर लैंड कर गया | सभी लोगों ने भगवान को याद किया और अपने -अपने घरों को  जाने को बेचैन दिख रहे थे | शिवानी भी जल्द से जल्द अपने गाँव  पहुँच कर माता -पिता से मिलना चाहती थी | करीब चार घंटे की कठिन यात्रा के बाद उसने  अपने गाँव, अपने घर की  ज़मीन पर पैर रखा |

लेकिन यह क्या ? घर के बाहर लगा ताला देख कर वो चौक गई | फिर शिवानी ने सोचा कि  वे लोग किसी काम से बाज़ार गए होंगे और जल्द ही वापस  आ जाएंगे |

तभी उसकी नज़र वहाँ से गुज़र रही सुषमा पर पड़ी | उसने आवाज़ देकर उसे बुलाया | सुषमा बहुत उदास दिख रही थी | सुषमा उसके बचपन की सहेली थी | उसके उदासी का कारण पूछा तो वो फफक – फफक कर रो पड़ी | पता चला कि एक माह पूर्व उसका पति गुज़र गया है | अब आगे की ज़िंदगी कैसे काटेंगी ? उसको देख कर उसके मनःस्थिति को समझा जा सकता था |

सुषमा ने  रोते हुये यह भी बताया कि तुम्हारे माता पिता 6 माह पूर्व  ही इस दुनिया से चल बसे |  बारिश के मौसम में खेतों में काम करते हुये अचानक  बिजली गिरने से उन दोनों  मौत हो गई | तुम्हारी कोई खबर थी नहीं,  इसलिए गाँव वालों ने मिल कर उनका दाह संस्कार कर दिया  |

यह खबर सुनते ही शिवानी को घर वापस आने की खुशी एक सेकंड में काफ़ुर हो गई | उसके आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा | उसके ऊपर तो  मानो फिर से दुखो का पहाड़ टूट पड़ा था | वह अब इस दुनिया में अकेली हो गई | पेट में पल रहे बच्चे को लेकर  आगे की ज़िंदगी कैसे संभाल पाएगी ?

उसकी हालत को देख कर सुषमा भी घबरा गई और दौड़  कर रामू चाचा और नंदिनी को बुला कर ले आई | उन लोगों ने अपने पास रखे चाभी से घर का ताला खोला और सभी ने मिल कर अस्त व्यस्त घर को ठीक किया | शिवानी को सभी लोग मिल कर हिम्मत बंधा रहे थे |  तुम इस गाँव की बेटी हो, हम लोगों के रहते तुम बेवजह चिंता मत करो | हम सभी तुम्हारे माता पिता के समान है |

उन लोगों के प्यार भरी बातें सुन कर शिवानी को थोड़ी  हिम्मत  हुई | उसने मन ही मन आने वाले किसी भी मुसीबत का सामना करने के लिए अपने मन को तैयार किया | अब तक उसने ज़िंदगी में संघर्ष किया है आगे भी संघर्ष करने से पीछे नहीं हटेगी  |

 रात का समय था / शिवानी घर में अकेली थी | उसे तो नींद ही नहीं आ रही थी | रात काफी बीत  चुकी थी ,परंतु उसकी आँखों खुली थी | वह सोच रही थी कि कमाई का कोई साधन नहीं है फिर आगे की ज़िंदगी कैसे कटेगी ? उसके पास जो थोड़े पैसे है वो भी जल्द खतम हो जाएंगे | इन्हीं सब चिंता में घिरे उसे कब नींद आ गई पता ही नहीं चला |

सुबह -सुबह कोई उसके घर का दरवाजा ज़ोर ज़ोर से पीट रहा था,  जिसकी आवाज़ से शिवानी की नींद खुल गई | उसने हड्बड़ा कर दरवाजा खोला |  सामने रामू काका हाथ में अखबार लिए खड़े थे | (क्रमशः)

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40 replies

  1. Very interesting drawings my friend. I can see how much you love to draw, so keep up the hard work, draw every day for you definitely have the talent, and to develop it further all you need to do is to draw. All the best.

    Liked by 1 person

  2. You are a good-looking human being.

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  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Good morning friends..

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  1. जीवन एक संघर्ष है –3 – El Noticiero de Alvarez Galloso

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