# एक सच्चा दानवीर#

हम लोग फिल्मी पर्दे पर एक नायक को देखते है |  उसके किए गए अच्छे कार्यों की दिल से सराहना करते है और उसे असल ज़िंदगी में अपना आदर्श मानने लगते है | लेकिन असल ज़िंदगी में भी कुछ नायक  है जो  समाज के लिए बहुत अच्छे कार्य करते है | वे जीते जी अपनी ज़िंदगी में मिसाल बन जाते है | वो इसी ज़िंदगी में इतना कुछ कर जाते है जितना तो लोग सोच भी नहीं पाते | फिर भी उनके बारे में ज्यादा चर्चा नहीं होती है | किसी ने ठीक ही कहा है ‘’’

वो मदद ही क्या जो ढिंढोरा पीट कर की जाये |

आज मैं बात करना चाहता हूँ एक ऐसे शख्स की, जिन्हें दानवीर कर्ण की उपाधि दी जाये तो अतिशयोक्ति न होगी | जी हाँ, आज बात कर रहे है, एशिया के सबसे बड़े दानवीर और  एक भारतीय व्यापार टाइकून, निवेशक और परोपकारी अज़ीम प्रेमजी की | इन्होंने अपने संपाति का 75% हिस्सा भारत के गरीब लोगों के लिए दान कर दिया है |

लोगों का मानना है कि अगर उन्होंने अपने संपत्ति को दान न किया होता तो शायद आज वे हमारे देश के धनवानों की लिस्ट में दूसरे सबसे धनी व्यक्ति होते |

आज मैंने उनको अपने ब्लॉग में इसलिए शामिल किया है कि उनके ज़िंदगी से हमें  बहुत कुछ सीख मिलता है | उनसे प्रेरणा लेकर हम भी अपने व्यक्तित्व का विकाश कर सकते है और देश – समाज के ज़रूरतमन्द लोगों की मदद कर सकते है |

 आइये आज के ब्लॉग में इस महान शख्स के ज़िंदगी के बारे में चर्चा करते है..

ज़िंदगी की सारथी बनें

उनका मानना है  कि ज़िंदगी में ज़िम्मेवारी निभाने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए | उनके ज़िंदगी की कहानी भी बड़ा दिलचस्प है | वे एक बिज़नस घराने में पैदा हुये |

उनके पिता मोहम्मद हाशिम प्रेमजी ने 1945 में, महाराष्ट्र के जलगांव जिले के एक छोटे से शहर अमलनेर मे Western India vegetable  product ltd को शामिल किया। यह सनफ्लॉवर वानस्पति के ब्रांड नाम के तहत खाना पकाने के तेल का निर्माण करता था, और एक कपड़े धोने वाला साबुन 787 कहा जाता था, जो तेल निर्माण का उपज था।

1966 में अज़ीम प्रेम जी इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए Stanford university अमेरिका गए हुए  थे | तभी उनके पिता हशीम प्रेमजी  का देहांत हो गया | अज़ीम प्रेम जी तुरंत  अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ कर भारत वापस आ गए | उनके सामने अब दो ही रास्ते थे | वे अपनी पढ़ाई को पूरी करें या अपने पिता के बिज़नस  को संभालें |

उन्होंने अपने पिता के सपनों को साकार करने के लिए और उनके बिज़नस को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए ठान  ली | इसलिए उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई | हालांकि उन्हे बिज़नस की ज्यादा समझ नहीं थी, लेकिन धीरे – धीरे अपने पिता के बिज़नस को सफलता की उँचाई पर ले जाने का प्रयत्न करते रहे |

और अंततः एक सफल बिज़नस मैन बन गए | लेकिन उनके दिल में पढ़ाई अधूरी छोडने  का मलाल सता रहा था | लेकिन  उन्होंने 30 साल की उम्र में उसी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ साइंस किया |  उन्होंने 2001 में “अज़ीम प्रेम जी फाउंडेशन” की स्थापना की जो ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की अच्छी शिक्षा में मदद  करने को प्रयत्नशील है |

सुनो सब की परंतु करो अपने मन की

यह बात उन पर पूरी तरह लागू होती है | उनके पिता की  “Western India vegetable  product ltd ” को उन्होंने संभाला | तो अपनी सूझ बुझ का परिचय देते हुये उसे  diversified करना शुरू किया | हैयर ऑइल, बच्चो के प्रॉडक्ट और दूसरे तरह के प्रॉडक्ट बनाने शुरू किए | इसका फायदा जल्द ही नज़र आने लगा और कंपनी का बिज़नस काफी बढ़ गया |

फिर 1980 के दशक की बात है, जब कम्प्यूटर का ज़माना आने वाला था | वे भी इस बिज़नस में हाथ आजमाना चाहते थे | हालांकि यह  बिज़नस उनके वर्तमान बिज़नस से बिलकुल अलग था  | लोगों ने उन्हें  बहुत मना किया कि  इस नए क्षेत्र में जाने की क्या ज़रूरत है | लेकिन उन्होंने सभी का सुना लेकिन किया अपनी ही मन का |

वे अपनी दूरदर्शिता का परिचय देते हुये कम्प्यूटर के धंधे में कूद पड़े | सबसे पहले उन्होंने अपने कंपनी का नाम बादल दिया और Western India vegetable  product ltd से बदल  कर  WIPRO Ltd  कर दिया |  शुरुआत में उन्होंने कम्प्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर (software) दोनों को बिज़नस में शामिल किया | लेकिन बाद में उन्होंने computer software पर फोकस किया | उनके  दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज WIPRO Ltd भारत की एक प्रसिद्ध आइटी (IT) कंपनी बन गई है |

लोगों के मना  करने के बाद भी उन्होंने आईटी जैसे नई बिज़नस में हाथ आजमाया और अनुभव न होने के बावजूद सफलता की मुकाम हासिल किया |

देने की शपथ

प्रेमजी ने कहा है कि अमीर होने से उन्हें “रोमांच नहीं मिला”।  उन्हें परोपकार करने  में ज्यादा आनंद आता है | वे सबसे बढ़िया लोगों को परोपकारी कारणों हेतु प्रोत्साहित करने के लिए, वॉरेन बफेट और बिल गेट्स के नेतृत्व में एक अभियान, “द गिविंग प्लेज” के लिए साइन अप करने वाले पहले भारतीय बने। इस परोपकार क्लब में शामिल होने के लिए रिचर्ड ब्रैनसन और डेविड सैन्सबरी के बाद वह तीसरे गैर-अमेरिकी हैं। 

हमेशा विनम्र बने रहना चाहिए

आप कितने अच्छे इंसान है यह आपके बैंक बैलेन्स या आलीशान बंगला नहीं बताता है | आप कितने प्यार से लोगों के साथ पेश आते है | कितना अच्छा आप का व्यवहार है, यह तय करता है कि आप कितने अच्छे इंसान है |

अज़ीम प्रेम जी के networth की बात करें तो उनके पास $1120 crore की संपत्ति है | इसके बावजूद भी इनके विनम्रता में कहीं कोई कमी नहीं आई | वे बहुत सादा ज़िंदगी जीते है | हवाई सफर करना हो तो इकॉनमी क्लास में जाना पसंद करते है | होटल  की जगह company के guest house में रहना पसंद करते है | वे फालतू के खर्चे के खिलाफ है  |

simple living high thinking जैसी उनकी सोच है | वे अपने कपड़े भी खुद धोते है  | एक बार उनके कंपनी के प्रेसिडेंट ने पूछ लिया था कि  ऐसा क्यों है कि  आप अपने कपड़े खुद ही धोते है | जबकि इसे laundry  में भी धुलवाया जा सकता है |

उन्होंने बड़ा ही खूबसूरत जबाव दिया –  सही है, मैं laundry में कपड़े तो धुलवा तो लूँगा | लेकिन धोने का बिल कपड़े की कीमत से ज्यादा होगा | जो हमारे बिज़नस के उसूल के खिलाफ है | मैं ज़मीन से जुड़े रहना पसंद करता हूँ |

उन्हें 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से नवाजा गया | देश की जनता उनसे बहुत प्यार करती है, क्योंकि उन्होंने देश के गरीब लोगों, खास कर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले बच्चो के भविष्य बनाने में मदद करते आ रहे है |

2010 में, उन्हें एशियावीक द्वारा दुनिया के 20 सबसे शक्तिशाली पुरुषों में से एक चुना गया था। उन्हें दो बार 2004 और 2010 में टाइम मैगज़ीन द्वारा 100 सबसे अधिक प्रभावशाली लोगों में सूचीबद्ध किया गया था |

हर इंसान को बराबर समझना

वैसे तो जो कंपनी के ऊंचे ओहदे पर पहुँच जाते है तो उनमें थोड़ा घमंड आ जाता है और अपने से छोटे लोगों को हिकारत की नज़र से देखते है | लेकिन प्रेमजी एक ऐसे शख्स है, जिनकी नज़र में सभी स्टाफ बराबर है |  कभी भी उनमें भेद – भाव नहीं करते है |

उनके जीवन की एक दिलचस्प घटना है | वे अपनी कंपनी में अपनी गाड़ी एक खास जगह पार्क करते थे | एक दिन उन्होंने देखा कि उनके पार्किंग की जगह मे किसी और ने अपनी गाड़ी पार्क कर रखी  है | वे अपनी कार दूसरी जगह पार्क की,  जहां जगह खाली थी |  कंपनी के अधिकारी को जब यह बात पता चला तो इस विषय में एक circular जारी कर दिया गया कि उनके पार्किंग प्लेस में कोई कर्मचारी अपनी कार पार्क न करें |

जब अज़ीम प्रेमजी को यह बात पता चली तो उन्होंने उस सर्क्युलर को  कैन्सल करवा दिया और कहा — हमारे स्टाफ को आज़ादी है कि वह पार्किंग में कहीं  भी अपनी गाड़ी पार्क करें अगर वहाँ जगह खाली हो तो | अगर हमें उसी जगह अपनी कर पार्किंग करनी है तो मुझे समय से पहले आना चाहिए ताकि वहाँ खाली जगह मिल सके |

यह घटना दर्शाता है कि उनमें समानता का भाव है | ऐसी ही बातें उनके ज़िंदगी में आगे बढ्ने में सहायक सिद्ध हुई |

एक और दिलचस्प किस्सा उनके बारे में है कि  1947  में जब भारत का बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान से जिन्ना साहब का उनके लिए नेवता आया कि वे पाकिस्तान चले आयें , यहाँ उन्हें वित्त मंत्री (finance minister) बना दिया जाएगा | उन्हें हर तरह की  सुविधा मुहैया कराई जाएगी | लेकिन प्रेम जी के पिता  ने साफ – साफ मना कर दिया | उन्होंने जबाव में कहा – मुझे अपने वतन की मिट्टी से प्यार है, मैं इसे छोड़ कर कहीं नहीं जा सकता |

एक रिपोर्ट के अनुसार financial year 2019-20 (एक साल में ) में अज़ीम प्रेम जी ने 7904 करोड़ रुपए देश की जनता के लिए दान  किए | अगर इसे 365 से भाग किया जाये तो  करीब 22 करोड़ रुपया रोजाना के हिसाब से देश के ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए  दान दिये है | वे समय – समय पर दान अपनी संस्था  “अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन “ के तहत देते रहते है | इस फ़ाउंडेशन  की ओर से COVID  के पहले 1000 करोड़ दान किए और vaccination ड्राइव के समय फिर 1000 करोड़ रुपया दान दिया |

इसलिए उन्हें भारत का दानवीर कहा जाता है | उनकी कही  गई तीन बातें हमें हमेशा याद रखनी चाहिए –

  • अगर आपके  लक्ष्य पर लोग नहीं हंस रहे है तो समझो आपने लक्ष्य बहुत छोटा चुना है |
  • हर इंसान को दो बार सफलता प्राप्त  करनी  होती है | पहली बार अपने मन में और दूसरी बार वास्तविक जीवन में |
  • कभी – कभी आप अपनी ज़िंदगी में इतना हासिल कर लेते है कि आपको खुद पर भी शक होने लगता है कि क्या मैं इसके काबिल हूँ या नहीं |

आज सब लोग जब धन – दौलत के पीछे भाग रहे है | हर आदमी एक दूसरे को पीछे छोड़  आगे निकालना चाहता है | ऐसे माहौल में भी जो इन धन दौलत के मोह माया में न फंसा |  जिसे दुनिया का नंबर गेम में विश्वास नहीं है और अपने लाभ का अधिकांश हिस्सा गरीबों के कल्याण हेतु दान कर देता है | आज के समय में वही संत है, पूज्य है |

उनसे प्रेरणा लेना चाहिए और अपनी कमाई का कुछ हिस्सा हमे भी देश और  समाज की भलाई के लिए दान करना चाहिए | आज हम उन सबों को नमन करते है

( Pic Source : Google.com )

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Categories: infotainment

6 replies

  1. It’s a welcome trend being seen now in top businessmen. Yesterday Gautam Adani on his 60th birthday committed to give away Rs 60000 crore in charity.

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  2. Grate Sir, Can I join public services

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