# यह कैसा प्रेम है ? -2

सामने खड़ी लड़की को देख कर पुलिस को तो एकबारगी  विश्वास ही नहीं हुआ | क्योंकि उसने उस लड़की का अंतिम संस्कार अपने सामने ही कराया था |  लेकिन यह भी  सच्चाई थी कि सामने खड़ी लड़की मंजुला ही थी |

पुलिस  आगे कुछ उससे पूछताछ करती, इससे पहले एक दूसरा चेहरा कमरे के अंदर से प्रकट हुआ और वो था खुद अशरफ |

पुलिस के दिमाग में एक साथ बहुत सारे सवाल आने लगे | लेकिन अपनी सूझ बुझ दिखाते  हुए , पुलिस ने फौरन दोनों को दबोचा और अपने  साथ गाड़ी में बिठा लिया | उन्होंने  रास्ते भर उन लोगों से पूछताछ की  और फिर उन दोनों को अपने साथ पुलिस स्टेशन, खगौल  लेकर आई |

 थोड़ी देर बाद,  अशरफ को वहीं पुलिस स्टेशन में रोक लिया गया  और  मंजुला को पुलिस वाले उसके घर तक छोड़ आए |  मंजुला गुमसुम अपने घर के दरवाजे पर पहुँची | 

शाम का वक़्त था, थोड़ा अंधेरा छा रहा था |  घर के बाहर बच्चे खेल रहे थे और मंजुला के घर वाले बरामदे  में बैठ चाय पी रहे थे |

अचानक सभी लोगों की नज़र मंजुला पर पड़ी | बच्चे वहाँ से चीखते हुये भाग खड़े हुए और घर वाले भी डर कर घर के अंदर की तरफ भागे |

मंजुला को यह समझते देर न लगी कि  वो लोग उसे मंजुला का भूत समझ रहे है |

फिर मंजुला ने किसी तरह अपनी माँ  को यकीन दिलाया कि वह मंजुला है और वह ज़िंदा है | अब परिवार वालों को  कुछ समझ में  नहीं आ रहा था कि वो खुशी मनाए या मातम |

सवाल यह था कि यह मंजुला है तो फिर दो दिन पहले जिसकी  लाश को जलाया और  क्रिया – कर्म किया गया , वो कौन थी ? अब सब लोग पूरी सच्चाई जानने को उत्सुक थे |

दूसरे दिन पुलिस ने इस केस  की फ़ाइल खोल दी और दोनों को थाने में बैठा कर आगे की कार्यवाही शुरू की | अशरफ बहुत घबराया हुआ था, और पुलिस के दबाब में वह सच्चाई बताने को तैयार हो गया |

उसने बताया कि वह मंजुला से बेहद प्रेम करता है लेकिन उसके घरवाले की रोज़ – रोज़ की धमकी से बहुत परेशान था | मेरा एक दोस्त जावेद मियां है जो एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में ट्रक चलाता है | वह अपने ऑफिस के पास ही मनेर में अकेला रहता है | हालांकि उसका परिवार उसके गाँव गाजीपुर में रहता है |

जब मैंने अपनी समस्या जावेद को बताया  तो उसने कहा कि तुम मंजुला को लेकर यहाँ आ जाओ फिर किसी तरह तुम दोनों को मुंबई भिजवा देंगे और तुम लोग वहाँ  घरवालों की नज़र से महफूज रहोगे |

इसीलिए हम दोनों  घर से भाग कर मनेर उसके घर पहुंच गए  | रात में हम लोगों ने मिल कर पार्टी  का प्लान बनाया | जावेद और मैं  मिलकर दारू पी रहे थे  | तभी मैंने ने अपनी समस्या के बारे में जावेद से चर्चा की | अचानक  जावेद के दिमाग में एक आइडिया आया |

उसने कहा – तुम्हारा काम बन जाएगा , बस तुम्हें मंजुला को मारना होगा |

क्या कह रहे हो तुम , दारू पी रखी  है इसलिए ?  — मैंने गुस्से में कहा |

नहीं रे , पहले पूरी बात तो सुन ले |

मंजुला मेरी बहन समान है, मैं उसके खुशी के लिए  कुछ भी करूंगा | उसने दारू का एक और घूंट लिया और फिर बोलने लगा  — अशरफ, तुम मेरी बातों को ध्यान से सुन |

मैं एक औरत को जानता हूँ | उसका चेहरा बिलकुल मंजुला से मिलता है | अगर अचानक कोई देख ले तो उसे मंजुला ही समझेगा | उसकी उम्र 25 -26  साल है, उसका एक छोटा बच्चा है | वह विधवा और  बहुत  गरीब है |  उसे मैं हमेशा पैसों से मदद करता रहता हूँ |

उसका नाम शांति है और वो  हम पर बहुत भरोसा करती है |  यहाँ से कुछ दूर पर हाईवे के पास ही उसकी  झोंपड़ी है |

लेकिन शांति से हमें क्या लेना देना ? – मैंने जावेद से पूछा |

तब जावेद के कहा – तुम शांति को मंजुला बना कर मार दो | तब मंजुला के परिवार वाले मंजुला को मृत समझ कर उसे कहीं ढूँढने का प्रयास नहीं करेंगे और तुम दोनों किसी दूसरे शहर में आराम से साथ रह सकते हो | एक को जिंदा रहने के लिए दूसरे को मारना ही पड़ेगा | उसने अपना पूरा प्लान मुझे समझा दिया |

मैंने तुरंत कहा — किसी की हत्या करना मुझे मंजूर नहीं है |

तभी मंजुला बीच में कूद पड़ी | उसने कहा – हम दोनों को साथ रहने का और कोई रास्ता नहीं दिखता है | हम कहीं भी भाग कर छुप जाएँ , घर वाले हमें ढूंढ ही लेंगे | और यह भी हो सकता कि हमारा भी लव – जिहाद वाला हश्र न हो जाये | इसलिए मुझे जावेद का प्लान सही लग रहा है |

इस पर जावेद ने कहा – उसका तो मैं कत्ल करूंगा , तुम्हें क्यों डर लग रहा है ?

मैंने ने कहा – मैं पेशे से कसाई ज़रूर हूँ , लेकिन सिर्फ जानवरों को काटता हूँ | किसी इंसान का  कत्ल करना मुझे ठीक नहीं लगता है | लेकिन मंजुला पर तो जैसे भूत सवार था | वह बोली – जावेद भाई का साथ मैं दूँगी |

इस तरह अगले दिन  का प्लान  फ़ाइनल हो चुका था |

अगले दिन जावेद कंपनी का ट्रक ले कर आ गया और हम दोनों उसके ट्रक पर सवार हो कर चल पड़े | शाम का वक़्त था , हम लोग हाईवे पर पहुँच चुके थे | तभी जावेद ट्रक  को किनारे खड़ी  कर शांति के पास गया और उसे बहला फुसला कर अकेले साथ चलने को कहा |

शांति तो उस पर बहुत भरोसा करती थी इसलिए अपने बच्चे को पड़ोसी के घर छोड़ कर चल दी |

तभी बीच में पुलिस पूछ बैठी – शांति से न तुम्हारा कोई दुश्मनी था , न ही मंजुला का था | और न ही उस ड्राइवर के साथ थी | तो फिर तुम दोनों  अपने  मतलब के लिए ऐसी घिनौनी कांड करने के लिए राज़ी हो गए ?

तब मंजुला ने कहा – हमारे आंखों पर पर्दा पड़ा था और दिमाग काम नहीं कर रहा था | हम अंजाम के बारे में सोच ही नहीं सके |

फिर अशरफ आगे की बात बताते हुये कहा —  हम लोग आगे चलते हुए उस जगह पर पहुंचे | अंधेरा भी छा चुका था और पूरा इलाका सुनसान था | तभी ट्रक किनारे खड़ी कर अचानक जावेद शांति का गला दबाने लगा और तब मैंने भी उसका साथ दिया | कुछ ही देर में उसका शरीर शांत पड़  गया |

हम लोग ट्रक से नीचे उतरे और उस  सुनसान जगह में लाश को ट्रक से उतारा  और पास में लिटाया | फिर एक बड़ा  पत्थर उठा कर उसके चेहरे पर वार किया ताकि चेहरा ठीक से पहचान में नहीं आए | उसके बाद हम लोगों ने  शांति के जिस्म से उसके कपड़े उतारे और अपने साथ  लाये मंजुला के कपड़े को उसे पहना दिया , ताकि लाश मंजुला का ही लगे |

और इसे पुख्ता करने के लिए उस लाश के बाएँ पैर में एक काला धागा भी बांध दिया , जिससे घर वालों को यकीन हो जाये | मंजुला के बाएँ पैर में हमेशा काला धागा बंधा होता है |

लाश को भी ऐसी जगह रखी गई कि  सुबह किसी की नज़र पड़े और वो पुलिस को खबर करें | पुलिस के द्वारा मंजुला के घर वालों को भी खबर हो जाये कि मंजुला  अब मर चुकी है |

आगे का प्लान था कि  मुंबई जाकर वहाँ एक नई ज़िंदगी की शुरुआत की जाये |  इसके लिए जावेद के ट्रक का  मुंबई  ट्रिप का इंतज़ार था |

आगे की घटना आपको पता ही है | पुलिस ने पूरी घटना को सुनने के बाद इसे कलम बद्ध किया | दूसरे दिन यह समाचार सभी अखबारों की  सुर्खियां बन गई | सभी लोग इस नृशंस अपराध के लिए मंजुला से नफरत करने लगे | घर वाले भी उससे नफरत करने लगे |

 पुलिस ने जावेद को भी गिरफ्तार कर लिया और तीनों  को जेल भेज दिया | फिर पुलिस ने एक महीना से भीतर ही चार्ज शीट फ़ाइल कर दिया |

और उधर तीनों के तरफ से “बेल पेटीशन” फ़ाइल किया गया |  अशरफ और  जावेद को तो बेल नहीं मिला, लेकिन संयोग से मंजुला को जमानत मिल गई |

जमानत  होने के तीसरे दिन मंजुला जेल से रिहा हो गई |  मंजुला घर पहुंची तो उसे महसूस होने लगा कि सभी लोग उससे नफरत कर रहे है क्योंकि  परिवार वालों को उसके कारण काफी बदनामी हो चुकी थी  |

इसके अलावा मुहल्ले वाले भी  मंजुला को नफरत की दृष्टि से देखते थे | उसे देख कर गंदे कमेंट करने लगे | ऐसी स्थिति में मंजुला काफी बेचैन रहने लगी और आत्मग्लानि महसूस करने लगी  |

अभी एक सप्ताह बीते ही थे कि तभी एक सुबह घर से  थोड़ी दूर पर गुजरने वाली रेल लाइन पर लोगों की भीड़ लगी हुई थी | शायद,  वहाँ किसी की  ट्रेन से कटी  हुई लाश पड़ी थी | उसके मुहल्ले वाले ने वहाँ जाकर देखा तो पाया कि वो लाश मंजुला की थी |

हाँ, इस बार सचमुच मंजुला की ही  लाश थी जो अपने पापों का बोझ संभाल न सकी और अपनी जीवन लीला  को समाप्त कर लिया |

शायद उसे अपने पाप के बंधन से मुक्त होने का यही रास्ता उपयुक्त लगा था | ( समाप्त)

यह एक काल्पनिक कहानी है |

एक दिन हम भी कफन ओढ़ जायेंगे,

सब रिश्ते इस जमीन के तोड़ जायेंगे

जितना जी चाहे सता लो मुझको

एक दिन रोता हुआ सब को छोड़ जायेंगे।

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9 replies

  1. Kahani Bahut Badhia. Ae to Anup Soni ka Crime Patrols jaise Lagata hai.Lekin Shanti ka bachha ka Kya Hua.

    Liked by 1 person

  2. ऐसी कहानियों में जावेद अख्तर या उस्मानी जैसे ही नाम क्यों आतें है, क्राईम की ज्यादातर खबरों में एक खास जाति विशेष के संबंध को भी समझना होगा।

    Liked by 1 person

    • आपने सही कहा सर् ।लेकिन बहुत सारी क्राइम उसकी मानसिकता पर निर्भर करता है।

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  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Good evening friends..

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