# कौन हूँ मैं – 2 ?

ज़िंदगी ने सबसे कोई न कोई कीमत वसूल की |
कोई सपनों की खातिर, आफ्नो से दूर रहा ‘
कोई अपनों की खातिर सपनों से |

Retiredकलम

कौन हूँ मैं ? यह एक कठिन प्रश्न है | लोगों को अपने बारे में जानने में सारी उम्र गुज़र जाती है | सच, ज़िंदगी में सबसे कठिन समय यह नहीं होता है जब कोई मुझे समझता नहीं है , बल्कि यह तब होता है जब हम अपने आप को ही नहीं समझ पाते.|

चलो , कुछ समय निकाल कर अपने बारे में पता करते है …कौन हूँ मैं ?

कौन हूँ मैं ?

दुनिया के भूल भुलैया में

खोया हुआपहचान हूँ मैं ,

अपनो ने जो ज़ख्म दिए

उन ज़ख्मों के निशान हूँ मैं,

बार बार क्यों पूछते हो यारो

कहाँ से आया, कौन हूँ मैं ?

अनजान चेहरों के जंगल में

अपना वजूद ढूंढता, इंसान हूँ मैं

(विजय वर्मा)

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2 replies

  1. Bhut khoob sir ji 👏🏻👏🏻

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