# कौन हूँ मैं ?

With Trust, even silence is understood.. But
Without trust, every word is misunderstood.
Trust is the soul of relationship..

Retiredकलम

जानते हो, मैं कौन हूँ ?

यह वाक्य न जाने कितनी बार हम अपने बारे में लोगों से पूछते है और इसी तरह बहुत लोग अपने बारे में दुसरो से पूछते होंगे | आखिर इस तरह के प्रश्न पूछने का क्या मतलब है ?

मैं कौन हूँ ? सच, इस प्रश्न का उत्तर उतना आसान नहीं है जितना हमें लगता है | हमारा नाम, पता, धर्म जाति या अपना पद मात्र से अपना खुद का सम्पूर्ण परिचय नहीं हो सकता है |

इसी सन्दर्भ में एक छोटी सी कहानी यहाँ उद्धरित करना चाहता हूँ —

सिकंदर, विश्व-विजयी बनने के पश्चात् जब भारत से वापस जा रहा था तो उसने नदी के किनारे एक फ़क़ीर को बैठे हुए देखा | उसके बदन पर कपडे भी नहीं थे | वो फ़क़ीर नंगे बदन बैठा वहाँ धुप सेक रहा था और वो अपने आप में मगन था | उसे देख सिकंदर को उससे…

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16 replies

  1. Yes, trust is really important.

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