#कोरोना से संवाद#

दोस्तों

डर बहुत खराब चीज़ होती है | डर चाहे किसी भी चीज़ से हो, अगर एक बार मन में बैठ गया तो हमारा जीना दूभर हो जाता है | उससे पार पाने का बस एक ही रास्ता है कि उसका डट कर मुकाबला किया जाए |

सच तो यह है कि आजकल डर का एक बड़ा व्यवसाय चल रहा है | आज रक्षक ही भक्षक हो रहा है | कुछ तो सोशल मीडिया ने कोरोना का इतना दशहत फैला रखा है कि हर आदमी डर के साए में जीने को मजबूर है |

हाँ दोस्तों, आज कल देश में कोरोना की तीसरी लहर आ चुकी है और संयोग से दिल्ली और मुंबई के अलावा कोलकाता में भी विस्फोटक स्थिति है जहाँ मैं रहता हूँ |

मैं एक सीनियर सिटीजन हूँ इसलिए पिछले दो साल से डर डर कर अपनी ज़िन्दगी जी रहा हूँ | क्योंकि लोगों ने शुरू में ही यह बोल कर मेरे मन में डर पैदा कर दिया था कि यह कोरोना सीनियर सिटीजन को अपना शिकार आराम से बना लेता है |

पिछले दो दिनों से मुझे छींक आ रही है | मैं सर्दी जुकाम से ग्रसित हो गया हूँ | वैसे जाड़े के मौसम में अक्सर सर्दी जुकाम का शिकार हो जाता हूँ |

करवट बदलते हुए रात कट रही थी क्योंकि मन में एक बेचैनी थी कि कही मुझे कोरोना तो नहीं हो गया |

तभी बाहर के दरवाजे पर धीरे से किसी ने दस्तक दी | इतनी रात को कौन हो सकता है ?   ऐसा सोचकर मैंने तुरंत दरवाज़ा खोल दिया | लेकिन वहाँ तो कोई भी नज़र नहीं आ रहा था |

मैं वापस दरवाज़ा बंद ही कर रहा था तभी एक आवाज़ आई — सर जी, आपने मुझे नहीं पहचाना ? मैं कोरोना हूँ |

उसका नाम सुनते ही झट से मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया |

अरे सर जी,  अब आपको सुगंध नहीं आएगी । खांसी और जुकाम भी हो रहा होगा, क्योकि अब मैं आ गया हूँ |

मैंने पीछे मुड़कर देखा तो कोरोना महाशय अन्दर ही खड़े थे ।

मैंने घबराकर पूछा — -दरवाज़ा तो बंद है,  तुम…, तुम यहाँ कैसे आये ?

वो शायराना अंदाज़ में कहा … तुमने बुलाया और हम चले आए ।

उसकी  बेसुरी राग  पर मुझे जोर का गुस्सा आया |

जी चाहा कि दरवाजे से उसे बाहर  भगा दूँ | परन्तु  वो तो मेरे सामने ही कुर्सी पर बैठ गया |

 मुझे देख मुस्कुराते हुए बोला — आओ बैठो,  खड़े  क्यों हो ? अब तो मैं आपके साथ ही हूँ ।

मैं ना चाहते हुए भी उसके सामने बैठ गया |

अब तो रोज ही इसको झेलना है अकेले कमरे में ।

फिर मैं वहाँ से उठा और अपने कमरे में आकर बिस्तर को व्यवस्थित करने लगा | हमने पहले ही घर के बाकी सदस्यों से अपने को quarantine कर लिया था |

घर के लोग मेरे नजदीक आने से डर रहे थे |

कोरोना मुस्कुरा रहा था | अचानक  वह बोला – quarantine करने से कुछ नहीं होगा क्योंकि मैं तीसरी बार एक नए रूप में आया हूँ, मेरा नाम है ओमिक्रोन  |

और हाँ, अब quarantine करने से कुछ नहीं होगा | क्योंकि मैं पहले के मुकाबले ज्यादा तेज़ी से इंसान के शरीर में जगह बना लेता हूँ  |

इसका क्या मतलब ?  तुमसे तो सब दुरी बना कर रखते है |  मास्क लगाते है , सैनीटायीज़ (sanitize) करते है,  और तो और मैंने तो वैक्सीन के दोनों डोज़ भी लगा रखे है |

वो सब मुझे नहीं मालूम, हाँ मैं आसानी से सभी जगह पहुँच सकता हूँ और तुम्हारे घर में भी तुम्हे ही नहीं,  तुम्हारे घर के दो सदस्य भी हमारे लपेटे में है |

तभी मुझे ज्ञात हुआ, जिसे हम सभी सर्दी खासी समझ रहे थे, वो तो यही महाशय है |

फिर मैंने हिम्मत कर जोर से उसे डाँटा | और कहा अब तू मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता है |

उसने कहा — वैसे तो मैं मस्तीखोर हूँ पर यूँ शांत प्रवृत्ति का हूँ |  बस मैं अपना रूप बदलते रहता हूँ | तभी तो लोग मुझे double mutant virus कहते है, अब लोग मुझे ओमिक्रोन नाम से याद करते है |

वैसे मैं बहुत ज़िद्दी हूँ, अगर मैं जिद पर आ गया तो तुरंत ही शमशान घाट भी पहुँचा देता हूँ | तुमने गंगा में बहती लाशें तो देखी  होगी |

यह तुम्हारा भरम है | अब तुम्हारा शक्ति बहुत कम हो चूका है |

हमारे देश के आकडे बताते है कि अब कोरोना उतना घातक नहीं है, जितना दूसरी  लहर के समय था | अब तो कोरोना एक फ्लू जैसी बिमारी बन कर रह गयी है |

उसने मेरी ओर देखा और  पूछा – वो कैसे ?

मैंने कहा – आंकड़े बताते है कि पिछले दिन सबसे ज्यादा 1.80 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हुए है | लेकिन मौतों का आकड़ा बहुत कम है | पिछले साल मई में भी प्रतिदिन इतने ही मामले आये थे, लेकिन  तब प्रतिदिन  मौतों का आंकड़ा औसतन ३६०० था जो दूसरी लहर बन कर आया था |

लेकिन उतनी ही संक्रमित लोगों में इस बार मौतों की संख्या सिर्फ १४६ है | सबका मानना है कि मौतें अब 25 गुना तक कम हो चुकी है |

इसका मतलब यह है कि दुनिया भर में संक्रमण का मामला बहुत तेजी से फ़ैल तो रहा है , लेकिन मौतों का आंकड़ा बहुत कम है | उतनी है जितना एक साधारण रोग से मौतें होती है |

इतना ही नहीं अब तो लोग घर में ही रह कर सात दिनों में ठीक हो रहे है , इसलिए अब तुझे बहुत ज़ल्द ही पृथ्वी से भगा दिया जायेगा |

लेकिन यह क्या … वह डरने के बजाए  मेरी ओर देख कर मुस्कुरा रहा था ।

मैंने इशारों में पूछा – क्या मैं गलत बोल रहा हूँ ?

नहीं, तुम बिलकुल सही बोल रहे हो, अब मैं उतना घातक  नहीं हूँ |  लेकिन जो लोग सीनियर सिटीजन है, जिन्होंने वैक्सीन नहीं लिया है और जो अन्य रोग से ग्रसित है, वे तो हमारा निवाला बनेगे ही |

वो इत्मीनान से बोलता जा रहा था… तुमने घर पर रह कर सभी नियमों का पालन किया लेकिन बाहर वालों ने तो नहीं किया था न । आज भी लोग फेसबुक पर पोस्ट करने के लिए अपनी सेल्फी लेते है तो शान से मास्क को हटा देते है ताकि फोटो सुन्दर आ सके |

और तो और अब तुम ही लोग चिल्लाते हो कि मैं (कोरोना) चुनावों , रैलियों , जुलूसों में नहीं जाता हूँ , मुझ पर जोक्स बनाते फिरते हो | पर ये क्यों नहीं समझते कि मैं तो मंच पर भी रहता हूँ,  नेता के भाषण में भी हूँ, — कहाँ नहीं हूँ मैं ?.. सिर्फ तुमलोगों को दिखाई नहीं देता हूँ |

अभी तो कुछ राज्यों में चुनाव कराने को तुम्हारी सरकार अड़ी हुई है | संस्थान भी खुल रहे है | गंगा सागर स्नान भी है | मुझे तो बैंक वालों पर तरस आती है | सिर्फ हवाई यात्रा बंद करने से क्या होगा | तुम्हारी इन्ही हरकतों से मैं इस प्लानेट (planet)  से जल्द  बिदा होने वाला नहीं हूँ |

मैं आश्चर्य और शर्मिंदा हो कर उसकी बातें सुन रहा था । गलती तो हमलोग ही कर रहे है |

मैं दवा लेने हेतु अपने बिस्तर से उठा | गरम पानी का भाप भी लेना चाह रहा था |

तभी इसने फिर अपना खेल दिखाया और मेरी नाक को जैसे पकड़ कर चोक कर दिया । मेरा नाक और गला चोक हो चूका था | मैं घबराता हुआ पूरी ताकत से गर्म भाप को अंदर लेने की कोशिश करने लगा |

तभी नाक खुल चुकी थी लेकिन लगा कि कोई गला पकड़ कर दबा रहा है | मेरे  माथे पर पसीना आ गया था । अब वो थोड़ा रुका और मैं हांफने लगा |

मैं  उसकी और देखा तो वो भी हांफ ही रहा था शायद । मैं तभी उसका गला पकड़ लिया और जोर से ज़मीन पर पटक दिया |

तभी मेरी आँख खुल गयी, तकिया हाथ से दूर जा गिरा था …शायद यह बहुत भयंकर सपना था |

मैंने दीवाल पर टंगे घडी को देखा,  रात के दो बज रहे थे और मैं बिलकुल स्वस्थ महसूस कर रहा था | बुखार गायब और खांसी भी ठीक हो चुकी थी |

आगे की बात मैं आप सब लोगों पर छोड़ रहा हूँ | .. मेरे इस सपने के बारे में आप अपने ढंग से अर्थ निकाल सकते है |

.. बस, मैं अंत में यही कहना चाहता हूँ कि कोरोना का सही vaccine है इसके बारे में सही जानकारी |

आप सोशल मीडिया पर फैलाये जा रहे भ्रम के जाल में न फंसे और  covid से जुड़े गाइड लाइन को

पूरी तरह फॉलो करे |

कल रात सपने में आया कोरोना….

उसे देख जो मैं डरा, तो मुस्कुरा के बोला

मैं हूँ कोरोना … मुझसे डरो ना…

कितनी अच्छी है तुम्हारी संस्कृति,

न चूमते, न गले लगाते हो

ना ही हाथ मिलते हो..

मास्क पहनो , दुरी रखो 

   इतना तुम करो ना .. मुझसे डरो ना..

एक वादा हेतु  नीचे link पर click करे..

https://wp.me/pbyD2R-4UT

BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…

If you enjoyed this post, please like, follow, share and comments

Please follow the blog on social media … visit my website to click below..

        www.retiredkalam.com



Categories: motivational

5 replies

  1. मनोरंजन के साथ शिक्षाप्रद भी।

    Liked by 1 person

  2. Corona created panic among us.Good information about the new variant of Corona.Video clips educate us how to fight against Corona. Rest on God.

    Liked by 1 person

  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    हँसना और हँसना कोशिश है मेरी ,
    हर कोई खुश रहे, यह चाहत है मेरी ,
    भले ही मुझे कोई याद करे या ना करे ,
    हर अपने को याद करना ये आदत है मेरी ||

    Liked by 1 person

Leave a Reply to ramankishori Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: