कर भला होगा भला

आज कल ठण्ड का मौसम है | ऐसे में सुबह सुबह कोहरे से सामना होता है , जो एक अच्छी सीख देता है …

सही, कोहरे से एक चीज़ सिखने को मिलती है कि ज़िन्दगी में जब दूर का दिखाई देना बंद हो जाए तो एक एक कदम चलते रहिये रास्ता अपने आप खुलता  जायेगा |

दोस्तों,  आज एक ऐसे राजा की कहानी है, जो बहुत ही क्रूर था और अपनी ही जनता से पैसे, धन, सोने जवाहरात लुट कर अपने खजाने में भरने लगा | उसे खूब धन और हीरे जवाहरात जमा करने का जूनून था | इसके लिए उसने तरह तरह से अपनी ही जनता का शोषण करता था | जब उसने बहुत सारे धन इकठ्ठा कर लिए तो चोरी होने की  चिंता सताने लगी |

इसलिए अपने एक खास मंत्री से सलाह – मशवरा कर एक घने जंगल में तहखाना बनवाया और फिर अपनी सारी दौलत,  हीरे जवाहरात सोना चांदी उस तहखाने में छुपा दिया | उस तहखाना की दो चाभी थी | दूसरी चाभी राजा ने उस मंत्री को दे दिया क्योंकि वह उसका सबसे विश्वस्त आदमी था | और समय समय पर उसे भेज कर तहखाना की निगरानी भी कर लिया करता था |

अब वह तहखाना राजा के लिए जन्नत के सामान  बन गया था | उसमे  ऐसे ऐसे रत्न जमा हो गए थे जो शायद दुनिया के सबसे बेशकीमती थे | राजा उन रत्नों को जमा कर अपने को दुनिया का सबसे नायाब इंसान समझने लगा था |

एक बार राजा के मन में ख्याल आया कि क्यों न उस तहखाने को देखा जाए | वो आश्वस्त होना चाहता था कि वे सब सुरक्षित है |

सुबह सूर्योदय होने वाला था तभी राजा चुपचाप अपने महल से बिना किसी को बताये निकल पड़ा और थोड़ी देर में वह उस घने जंगल में बने तहखाने में पहुँच गया | जब ताला खोल कर अन्दर पहुँचा तो देखा सभी हीरे जवाहरात सलीके से सजा कर रखे हुए थे | उसकी चमक से राजा की  आँखे ख़ुशी से चकाचौंध हो गयी और वह मंत्रमुग्ध हो गया | वह अपने को दुनिया का सबसे खुशनसीब व्यक्ति मानने लगा |

उसने सभी हीरे जवाहरात को निकाल कर ज़मीन पर सजा दिए | वह उन सबो को ख़ुशी ख़ुशी निहारने लगा और उसमे खो गया | वह अपने को दूसरी दुनिया में महसूस कर रहा था | 

तभी संयोग से उसी समय वह मंत्री उस रास्ते से गुज़र रहा था तो उसने तहखाना का दरवाज़ा खुला पाया | उसके मन में विचार आया कि जब मैं पिछली बार यहाँ आया था तो गलती से इसे बंद करना भूल गया होऊंगा | उसने सोचा कि राजा को यह बात पता चलेगी तो मुझे मृत्युदंड दे देगा |

पहचान कौन ?

ऐसा सोच कर जल्दी से दरवाजे के पास गया और अपने पास के चाभी से उसे बाहर से ताला बंद कर दिया | फिर, वहाँ से राज महल की तरफ चला गया | राजा तो उन बेसकीमती रत्नों में इतना मशगुल था कि उसे पता ही नहीं चला कि कोई बाहर से दरवाज़ा बंद कर चूका है | कुछ समय पश्चात् राजा को उन हीरे जवाहरात से मन भर गया तो वह वापस राज महल की तरफ चलने को सोचा | तभी उसने देखा कि दरवाज़ा तो बंद है |

उसने दरवाज़ा खोलने की बहुत कोशिश की लेकिन वह तो बाहर से बंद था | राजा के पास चाभी होते हुए भी वह दरवाज़ा खोल नहीं सकता था | उसने अन्दर से खूब आवाज़ लगाईं, लेकिन उस सुनसान जंगल में उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई तो था नहीं | काफी समय गुज़र गया लेकिन राजा अन्दर ही कैद रहा |

अब, उसे जोरों की भूख और प्यास सता रही थी | लेकिन,वहाँ  न तो पानी था और न खाना | वह प्यास से तड़पने लगा और दरवाजा के पास से उठ कर अन्दर आया | उसने अपने सबसे कीमती हीरे को हाथ में लेकर कहा – ऐ नायब हीरे ! क्या तू मुझे एक घूँट पानी दे सकता है ? फिर उसने सारे रत्नों को हाथ में लेकर कहने लगा – तुम तो बेस्किमती हो, लेकिन तुम भी मुझे रोटी का एक नेवाला नहीं दे सकते | अब मैं क्या करूँ ?

राजा को महसूस हुआ कि वे सभी हीरे जवाहरात उस पर हँस रहे है, मानो उससे कह रहे हों कि  ज़िन्दगी में तूने कितने मजबूर इंसान को दुःख तखलीफ़ पहुँचाया है | धोखे से तूने बहुत लोगों के धन को छीन कर यहाँ तहखाने में जमा कर रखा है |इसलिए उनलोगों की बद-दुआएं ही तुम्हे इस हाल में पहुँचा दिया है |

तभी राजा को आभास हो गया कि अब वह भूख – प्यास के कारण यही मर जाएगा | उसने अपने सभी हीरे जवाहारतों को जमीन पर रख कर अपना बिस्तर बनाया | लेकिन, तभी वह बेहोश होकर वही गिर पड़ा | कुछ देर के बाद राजा को होश आया | उसने देखा कि वह हीरे जवाहरातों के बिस्तर पर पडा है , लेकिन उसे महसूस हुआ कि अब तो उसकी चंद साँसे ही शेष बची है | मौत उसने सामने खड़ी थी |

तभी उसके मन एक विचार आया और उसने एक पत्थर से अपनी एक हाथ पर दे मारा | उसकी ऊँगली कट गयी और उससे खून बहने लगा | वह इस दुनिया से विदा होने से पहले दुनिया को एक सन्देश देना चाहता था |

उसका सन्देश बहुत सरल  लेकिन महत्वपूर्ण था | उसने अपने खून से कुछ लिखा और वो फिर उसने अपने प्राण त्याग दिए |

इधर राजा के इतने दिनों तक महल में नहीं लौटने के कारण मंत्री और बाकी लोग परेशान हो उठे | उन्होंने सोचा,  शायद शिकार करते हुए राजा को जानवरों ने हमला कर मार दिया होगा  | तभी उस मंत्री को तहखाने की याद आयी | उसने सोचा – राजा तो अब है नहीं, तो क्यों न उस तहखाने के धन को अपने कब्ज़े में कर लिया जाए |

ऐसा सोचा कर वह उस जंगल में बने  तहखाने में पहुँचा और जैसे ही दरवाज़ा खोल कर अन्दर आया  तो अचंभित हो गया | राजा की सड़ी गली लाश उस हीरे जवाहरात के बने बिस्तर पर पड़ी थी |

तभी उसने  देखा कि सामने दीवार पर कुछ लिखा है /  वह उसे गौर से पढने  लगा … मेरी  जिंदगी भर की कमाई,  ये हीरे जवाहरात मुझे  वक़्त पर न एक घूंट पानी और रोटी का नेवाला भी नहीं दे सका | मेरे अंतिम समय में सिर्फ मेरे किये कर्म ही साथ जा रहे है |

दोस्तों , इसलिए कुछ जमा करना है तो धन नहीं लोगों की दुआएं जमा करें | ज़रूरतमंद इंसान की मदद करें .. आप की ज़िन्दगी खुशियों से भर जायेगी | 

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4 replies

  1. शानदार कहानी। बहुत बड़ी सीख और इन्सानी समझ देने वाली राजा के दर्दनाक अन्त की कथा।

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  2. Karma hi bhagwan hai.Raja Kya Karega. Sundar Kahani.

    Liked by 1 person

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