# कभी कभी ऐसा भी #

साल बदल रहा है , लेकिन साथ नहीं …
स्नेह सदा बनी रहे ..

Retiredकलम

मन की थकान जो उतार दे

ऐसा वह अवकाश चाहिए

इस भागती लडखडाती ज़िन्दगी में

कुछ फुर्सत की सांस चाहिए

चेहरे को नहीं, दिल को भी पढ़ सके

ऐसे ही लोगों का साथ चाहिए |

मेरी पहली ड्राइविंग

बात उन दिनों की है जब मेरा ट्रान्सफर रेवदर शाखा से शिवगंज शाखा में हुआ था | शिवगंज वैसे ना तो शहर था और ना ही गाँव, लेकिन सारे सुख सुविधा उपलब्ध था | इसलिए मन लग जाता था | एक सिनेमा हाल “महावीर टाकिज” था जो हमारे मनोरंजन का एक मात्र साधन था |

आस पास के गाँव में ऋण देने और क़िस्त उगाही के लिए हमारी शाखा में एक जीप थी, और उसका ड्राईवर बाबूलाल जी था | जीप का उपयोग मैं फील्ड विजिट के लिए करता था |

एक बार की बात है कि हमारे जोनल मेनेजर के तरफ से फरमान आया कि हमारे शाखा और आस पास की…

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Categories: Uncategorized

4 replies

  1. आपकी जिंदगी चहकती रहे, आपकी यादों की

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  2. कहानी यूं ही चलती रहे ।

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