# टोटका है या अन्धविश्वास #

आज मैं ऐसे विषय पर बात करना चाहता हूं जिसे लोग टोटका कहते है  पर हमारे समझ से यह सब सिर्फ अंध-विश्वास है | आप  भी इस ब्लॉग को पूरी पढ़ें और खुद  आकलन करें कि यह टोटका क्या है ?

अक्सर ही अखबारों में या  पत्र – पत्रिकाओं में इस तरह के विज्ञापन देखने को मिलते है कि —

बीमारी से पाना है छुटकारा, तो आजमाएं यह टोटका …

  • कई बार बीमारी पीछा नहीं छोड़ती है । अगर आप भी लंबे समय से बीमारी से परेशान हैं तो यह टोटका आजमा कर देखें निश्चित लाभ होगा ।

सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें। अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें । सेहत ठीक रहेगी।

एक रुपए का सिक्का रात को सिरहाने में रख कर सोएं और सुबह उठकर उसे श्मशान के आसपास फेंक दें, रोग से शीघ्र मुक्ति मिल जाएगी।

  • अगर लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड़ लेकर उसे किसी कपड़े में कस कर बांध लें । फिर उस कपड़े को रोगी के कान से बांध दें । बुखार उतर जाएगा।
  • अगर नन्हे बच्चे की तबियत ठीक नहीं हो रही है तो एक काला रेशमी डोरा लें । ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगाएं । उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें । शीघ्र लाभ होगा |

मुझे महसूस होता है कि बहुत सारे  लोग इन सब टोटके पर विश्वास करते है,  हालाँकि आज के वैज्ञानिक युग में इन टोटकों का महत्व कम हो रहा है | मुझे आज भी याद है कि जब मैं  बच्चा था तो इन टोटकों पर बहुत विश्वास किया करता था |

 इस सन्दर्भ में मुझे एक घटना याद आ रहा है |  उन दिनों  मैं 4 – 5 साल का रहा होऊंगा | एक बार की बात है कि  बहुत बारिस हो रही थी, लगातार मुसलाधार बारिस | घर से निकलना बिलकुल बंद हो गया था |

उस समय मेरी माँ ने लकड़ी और कपडे की मदद से एक गुडिया बनाई |  मेरे पूछने पर उन्होंने बताया  – यह मुसाफिर है | मतलब, यह मुसाफिर  कही जा रहा है लेकिन बारिस अधिक हो रही है तो इसे बहुत परेशानी होगी  और भगवान् इसे बारिस में भीगता हुआ नहीं देख सकते है,  इसलिए वो बारिस बंद कर देंगे |

इतना कह कर उन्होंने मेरे सारे कपडे उतरवा दिए और मुझे वह मुसाफिर देकर कहा— इसे आँगन में लगे  तुलसी के पेड़ के पास जाकर इसे खड़ा कर दो |

 उन दिनों मुझे  ज्यादा अक्ल तो थी नहीं .. सो मैं नंगा होकर उस मुसाफिर को बारिस में भींगते हुए वहाँ मिटटी में खड़ा कर आया  | मुझे आश्चर्य हुआ यह देख कर कि बारिस थोड़ी देर में रुक गयी | उस समय मुझे इस टोटके के परिणाम पर बड़ा आश्चर्य हुआ था लेकिन आज  जब सोचता हूँ  तो पाता हूँ कि वह सब केवल इत्तेफाक था |

मैं समझता हूँ कि  टोटका कोई  चमत्कार नहीं होता है | यह तो बस मन का एक विश्वास होता है जिसे “मन का वहम” भी कहा जा सकता है |

 लेकिन कभी कभी कुछ  परिस्थितियां ऐसी उत्पन्न हो जाती है कि हम टोटके पर विश्वास करने को विवश हो जाते है | इस तरह के बहुत सारे टोटके समय समय पर हम सभी अपनाते रहते है | हम सभी पढ़े लिखे  लोग भी इस बात से अछूते नहीं है जबकि हमें पता होता है कि यह सब मात्र एक संयोग ही  होता है |  फिर भी यह सब बात हमारे मन मस्तिष्क में इस तरह बैठ गया है कि  हकीकत जानते हुए भी हम टोटका  आजमाने पर मजबूर हो जाते है |

अक्सर यह देखा जाता है कि अगर  बिल्ली रास्ता काट दे  तो हमारे अन्दर कुछ अनहोनी का डर पैदा हो जाता है और हम अपना रास्ता बदल लेते है |

ऐसी ही एक घटना आज मुझे याद आ रही है, जो हाल ही में मेरे साथ  घटी थी |  मैं टैक्सी से एअरपोर्ट जा रहा था | शाम का समय था और मौसम सुहाना था | कार अपनी तेज़ गति से सड़क पर दौड़ रही थी | मैं कार की खिड़की से बाहर खुबसूरत दृश्यों को निहार रहा था और हेड फ़ोन से गाने का लुफ्त उठा रहा था | तभी अचानक ड्राईवर ने जोर का ब्रेक लगाया और तुरंत  ही कार खड़ी हो गयी |

मैं घबरा कर  कार के  शीशे से रोड की तरफ देखा , लेकिन रोड तो बिलकुल खाली था | कोई भी गाडी इस समय नहीं आ रही थी | मैं जिज्ञासावश ड्राईवर से पूछा – तुमने अचानक कार क्यों रोक दी ?

उसने कहा – अचानक बिल्ली ने रास्ता काट दिया है |

मतलब ? – मैंने पूछा |

अचानक बिल्ली सामने से सड़क  पार किया था इसलिए मैंने कार रोक दिया है , क्योकि कोई अनहोनी होने  का अंदेशा रहता है | अब कोई दूसरी गाडी पीछे से आकर पार करेगी तभी हम आगे बढ़ पायेंगे | तबतक हमें इंतज़ार करना होगा |

उस ड्राईवर की बातें सुन कर मेरे मन में भी वो टोटका वाली बात याद आ गयी | फिर उत्सुकता से मैंने पूछ दिया – लेकिन पीछे वाला गाड़ी के साथ अपशकुन हो गया तो ?

उसने बहुत ही मासूमियत से ज़बाब दिया – अनजाने में किया गया कार्य का दोष नहीं लगता है |   इसलिए यह  नियम उस पर लागू नहीं होगा | मुझे  उसकी बात पर अनायास ही हँसी आ गयी | उसका तर्क भी वाजिब लग रहा था |  

दोस्तों ,  अंत में यही कहना चाहूँगा कि यह सब तो सिर्फ मन के वहम होते है, असलियत से इसका कोई सम्बन्ध नहीं होता है |

मैं सही हूँ या गलत  .आप अपने विचार ज़रूर साझा करें , मुझे ख़ुशी होगी |

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Categories: infotainment

21 replies

  1. Our Ancestor are very intelligent people’s……they do all these techniques because of some reason and knowledge behind this all techniques they do . Sometimes I feel whatever people called totka is a accent science which is arise from start of earth and nowadays in advance in technology…….we don’t think or we don’t know proper reason or knowledge behind these techniques so we called them blind trust. But if you do some literature survey behind this totka and accent science…you will recognize it.

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  2. Satya kathan. Yadi koi nuksan nahi to karne mein kya harj hai aaisa kaha kar hum apratyaksha roop se in batoo ko badhava dete hain.

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  3. बहुत सुन्दर व विचारनीय।

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  4. बहुत सुन्दर व विचारनीय।

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  5. यह पध्दति सालों से चली आई है, समयानुसार बदलाव होता रहा है, कुछ अच्छी तो कुछ बुरी तरह बदला गया हो सकता है। कच्चे मन को एक डोर मीले ईसके लिए उसकी शरुआत कि गई होगीं। कुछ बातें उपयुक्त है तो कुछ अनोप्युक्त। आपने सही बयान किया है।

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    • जी, बिलकुल सही विचार व्यक्त किया है | कुछ बातें अभी भी प्रासंगिक है /
      अपने विचार रखने के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद |

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  6. बस मन का वहम है और कुछ नही।

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  7. We are Hindus. We have trust on our God and believes. Same has been in our mind since long and transmitted generation to generation. Nicely presented.

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  8. Sahi kaha aapne ye ek man ka विस्वास है

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  9. आपने सही कहा ,कुछ लोग अपनी सुविधा के अनुसार नियम बदल भी लेते हैं

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  10. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    Time decides who you meet in life.
    your heart decides who you want in your life,
    and your behavior decides who stays in your life..
    HAPPY CHOCOLATE DAY..

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