# कोलकाता की पहली यात्रा #

दोस्तों

आज मैं अपनी  पुरानी यादों के पन्ने उलट रहा था तो एक बीती घटना की याद आ गयी | मेरी इच्छा हो रही है कि आज उसी घटना को आप लोगों के साथ शेयर करूँ..|

आज मैं जिस  घटना की चर्चा करना चाहता हूं वह करीब 20  साल पुराना है | उन दिनों मैं मुजफ्फरपुर शाखा में कार्यरत था |  अचानक एक दिन क्षेत्रीय प्रबंधक महोदय का फोन आया कि मुझे डेपुटेशन पर गया ब्रांच जाना है |  

हमारा घर पटना में  है और गया ब्रांच से  रेलवे व्यवस्था के कारण घर आने जाने की सुविधा थी  | इसलिए डेपुटेशन की खबर पाकर मैं बहुत खुश था | मैं मन ही मन सोचा कि शनिवार और रविवार को घर पर रहने का मौका मिलेगा | मुझे 15 दिनों के लिए डेपुटेशन पर भेजा गया था |

मैंने गया शाखा ज्वाइन कर लिया और काम करते हुए शनिवार का इंतज़ार करने लगा ताकि घर जा सकूँ |

मैंने वहाँ होटल में एक कमरा ले रखा था  क्योंकि मैं अकेला ही था | मैं रोज सुबह समय से पहले ही ब्रांच आ जाता था ताकि कुछ लंबित काम निपटा सकूँ  |

शनिवार का दिन था और आज बैंकिंग बंद होने के बाद ट्रेन से पटना (घर)  जाने की सोच कर मैं बहुत खुश था |

मैं शाखा में सुबह के 9.३० बजे आ गया था और कुर्सी पर अपनी  टांग चढ़ा कर अखबार पढ़ रहा था | मैं  उसमे राशिफल और फ़िल्मी गप शप वाला पेज ज़रूर पढता था | उस समय भी  अखबार  में एक फ़िल्मी हेरोइन की फोटो देख रहा था | मैं पेपर पढने  में इतना मशगुल था कि  एक  शख्स आकर हमारे सामने खड़ा हो गया लेकिन तुरंत मेरा ध्यान उस पर नहीं गया. |

फोटो वाला न्यूज़ पढने के बाद जैसे ही नज़रें उठा कर मैंने  उस शख्स को देखा तो हड्बडा कर कुर्सी से उठा खड़ा हुआ | दरअसल  सामने खड़े वो शख्स मेरे क्षेत्रीय प्रबंधक महोदय थे | वे ब्रांच विजिट  में क्षेत्रीय कार्यालय पटना से आये थे |

मुझे घबराया हुआ देख कर उन्होंने कुछ नहीं कहा  बल्कि मेरे सामने ही कुर्सी खीच कर बैठ गए | अभी तक कोई दूसरा स्टाफ नहीं आया था और ब्रांच का काम शुरू होने में आधा  घंटा की देरी थी |

हमने कैंटीन बॉय को बुलाकर चाय लाने कहा और फिर ब्रांच के बारे में साहब के साथ कुछ ज़रूरी सूचनाएं  साझा कर रहा था | तब तक सारे स्टाफ आ  चुके थे | साहब ने सबों के साथ एक  मीटिंग की फिर  ब्रांच का काम सुचारू रूप से चलने लगा |

 इस तरह लंच का टाइम हो गया और हमलोगों ने साथ लंच किया | अचानक साहब ने मुझसे पूछा – पटना चलना है क्या ?

उनसे हमारा पुराना परिचय था और वे जानते थे कि मैं शनिवार को पटना अपने घर जाता हूँ |

मैंने उनकी ओर देख कर कहा – जी, सर,,  आपकी इज़ाज़त अगर हो तो मैं पटना ज़रूर चलूँगा  |

उन्होंने  कहा–  तुम मेरे साथ चल सकते हो |

उनकी बात सुन कर मैं बहुत  खुश हो गया | ट्रेन की भीड़ से बचकर आराम से साहब के कार  में सफर कर लूंगा | मैंने जल्दी-जल्दी अपना काम निपटाया और करीब 3:00 बजे  उनके  साथ में पटना के लिए रवाना हो गया | उन दिनों शनिवार को आधा दिन  बैंकिंग हुआ करता था |

कार अपनी रफ्तार से चल रही थी और साहब  इधर उधर का नजारा देख रहे थे | आज उनका  मूड ठीक था | | मैं  उनके बगल में बैठा था  इसलिए मैंने सोचा – क्यों न,  अपने ट्रांसफर की बात की  जाये | मेरा  मुज़फ्फरपुर से ट्रान्सफर होने वाला था और मैं अपना  ट्रांसफर पटना चाहता था |

 साहब अगर मान जाए तो  मेरा काम आराम से बन सकता था | मैंने  उनकी ओर देख कर कहा —  सर,  मैं आपसे कुछ निवेदन करना चाहता हूं |

उन्होंने  कहा —  हां हां बोलो, क्या कहना चाहते हो ?  

मैंने कहा – मेरा  मुजफ्फरपुर से ट्रान्सफर होना  है इसलिए मैं चाहता हूँ कि मेरा पोस्टिंग पटना के किसी शाखा में हो जाए | मैं कुछ दिन अपने घर का सुख प्राप्त करना चाहता हूँ |

मैं उनसे  निवेदन  करता रहा और वे अपनी  आँखे बंद किये सब सुनते रहे |

मुझे विश्वास हो चला था कि साहब मेरा काम ज़रूर कर देंगे क्योकि उन्होंने एक बार भी कोई प्रश्न नहीं किया , बल्कि आँखे बंद  किए  मेरी बात सुनते रहे |

मैं पटना पहुँच कर बहुत खुश था .|  अपने परिवार में भी इस घटना का ज़िक्र किया और कहा -– इस बार मेरा  ट्रान्सफर पटना ज़रूर हो जायेगा |

डेपुटेशन समाप्त कर मैं वापस अपने मुजफ्फरपुर शाखा में आ गया और सभी स्टाफ को भी यह खबर सुनाया कि साहब  मेरा ट्रान्सफर पटना करने को राज़ी हो गए है |

फिर वो दिन भी आ गया जब ट्रान्सफर का लिस्ट निकलने वाला था | मैं बेसब्री से अपने पोस्टिंग का  इंतज़ार कर रहा था | दिन के 12.00 बज रहे थे और मैं शाखा में अपने काम में व्यस्त था, तभी फैक्स की घंटी बज उठी |  मैंने अनुमान लगाया कि मेरा ट्रान्सफर का फैक्स मेसेज होगा | हम दौड़ पर अन्दर चैम्बर में आ गए जहाँ फैक्स रखा हुआ था , कुछ और भी स्टाफ आ गए जो  कौतुहल वश  मेरे मनचाहा ट्रान्सफर की  ख़ुशी में शरीक होना चाह रहे थे |

मैंने जब  फैक्स मेसेज पढ़ा तो मुझे जोर का झटका लगा | क्योकि मेरा ट्रान्सफर  पटना नहीं बल्कि कोलकाता किया गया था |

मेरे आँखों से आँसू छलक गए | इसके दो कारण थे .. पहला कि साहब ने जब मेरी  पोस्टिंग पटना करने को राज़ी हो गए थे तो अचानक  उन्होंने अपना निर्णय क्यों बदल दिया ?

और दूसरा कारण था कि मैं कभी मेट्रो शहर में नहीं रहा | मुझे इस नयी जगह से बहुत घबराहट होती थी | तभी मेरे शाखा के हेड- केशियर ने सांत्वना देते हुए कहा –आप बेकार ही परेशान हो रहे है. | कोलकाता में जब मेरी पोस्टिंग थी तो, मुझे वह जगह बहुत पसंद आया था |

मेट्रो शहर में रहने का एक अलग ही मज़ा है | वहाँ का माहौल यहाँ से बिलकुल भिन्न है |  आप एक बार वहाँ जायेंगे तो फिर आप मुझे याद ज़रूर करेंगे  कि मैंने ठीक ही  कहा था |

उसके बाद मैं जो कोलकाता आया तो बस फिर कोलकाता का होकर  ही रह  गया |  मैं यहाँ 11 साल तक रहा | और फिर मैं दूसरा टर्म भी अपना ट्रान्सफर कोलकाता में कराया |

और अंत में  मेरा रिटायरमेंट भी कोलकाता से हुआ है | सबसे मजे की बात कि अब यह मेट्रो सिटी मुझे बहुत पसंद है इसलिए तो मैं आज भी कोलकाता में ही रहता हूँ |  और हाँ,  उस हेड – केशियर की कही गयी बातें मुझे  आज भी याद आती है |

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Categories: मेरे संस्मरण

14 replies

  1. बहुत अच्छा संस्मरण।

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  2. कोलकाता बहुत अच्छा शहर है, मुझे भी पसंद है। मेरे नोर्थ ईस्ट के दौरे यही से गुजर कर होते है।

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  3. Thanks for sharing the wonderful experience.

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  4. किस्मत कभी अनचाहे भी कुछ ऐसा दे देती है जिसकी कल्पना भी आदमी नहीं करता। अच्छा संस्मरण।
    :– मोहन”मधुर”

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  5. Very good. Love of Kolkata is first and last of your Banking life.Choosing Kolkata and settled there show your love for Kolkata.

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