# संतान – सुख #

हर दीपक आपकी दहलीज़ पर जले ,
हर फूल आपके आँगन में खिले
आपका सफ़र हो इतना प्यारा
हर ख़ुशी आपके साथ साथ चले |

Retiredकलम

आज किराये के इस नए घर में मेरा सातवां  दिन था और  मैं सोच रहा था कि माँ जी (मकान मालकिन ) रोज ही रात का खाना खिला देती है जिससे मुझे होटल का खाना से छुटकारा भी मिल गया क्योकि लंच तो बैंक में ही हो जाता |

अच्छी कैंटीन थी बैंक की , और  बिरजू बहुत ही अच्छा खाना बनाता था | वो काफी मिहनत करता था, क्योकि उसे आशा थी कि एक ना एक दिन इसी बैंक में वो परमानेंट (Permanent) हो जायेगा |

लेकिन आज तो sunday था और हमारा बैंक बंद | मैं ने मन ही मन भगवान से कहा कि यदि आज दिन का खाना (lunch) भी माँ जी खिला दे, तो आज भी होटल जाने से बच जाएँ |

लेकिन लंच के बारे में उन्होंने मुझसे कुछ कहा नहीं है | अभी सुबह के नौ बज चुके थे और  सुबह का चाय…

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5 replies

  1. Que bonito… Gratidão ✨🙏

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