# मेरा जुर्म क्या है # –2

दीक्षित उस समय अपनी गाडी से अपनी माँ, अपनी पत्नी और एक पांच साल की बेटी   के साथ कोटा से लखनऊ के पास अपने गाँव जा रहा था | लेकिन सूरत की पुलिस की टीम कोटा (राजस्थान) पहुँच कर उन लोगों को गिरफ्तार कर लेती है | उनलोगों को पूछ ताछ के लिए कोटा से सूरत ले कर आ जाती है |

तफ्तीश  के दौरान  पुलिस दीक्षित की पत्नी अनुराधा से प्रश्न करती है – आपने एक बेटी को तो अपने पास रखा है पर दूसरी बेटी को सड़क पर क्यों फेका ?

अनुराधा इस सवाल को सुन कर आश्चर्य प्रकट करती है और कहती है कि मैंने किसी को सड़क पर नहीं फेका है और आप को जो बच्ची मिली है वो मेरी नहीं है |

फिर पुलिस दीक्षित से वही सवाल करता है  तो वह कहता है कि हाँ, यह मेरी बेटी है  और उसका नाम शिवानी है |

दोनों के अलग  अलग बयान सुन कर पुलिस का सिर चकरा गया |

पत्नी बोली उसकी बेटी नहीं है और पति बोला – बेटी उसकी है | हकीकत क्या है ?

तभी पुलिस दीक्षित को अलग  कमरे में ले जा कर गहन  पूछ-ताछ करती है | उसी पूछ – ताछ के दौरान उसने पुलिस को कुछ बताता है |

पुलिस सच्चाई जानने  के लिए बड़ोदरा पुलिस को फ़ोन करती है और उसे एक सोसाइटी का फ्लैट नंबर  और लोकेशन बताती है और उसे  कुछ निर्देश भी  देती है |

बड़ोदरा की पुलिस बताये गए लोकेशन पर जाती है, जहाँ फ्लैट के बाहर ताला लटक रहा होता है  | पुलिस ताला तोड़ कर सीधा  फ्लैट के किचेन में जाती है जहाँ एक बड़ा सा बैग रखा होता है | और फिर जैसे ही वो पुलिस उसे खोल कर देखती है तो उसके होश उड़ जाते है |

क्योंकि उस बैग के अन्दर एक महिला की लाश होती है | दीक्षित की बैग वाली बयान  सही निकलती है  | जब  पुलिस आगे पूछताछ करती है तो पूरी कहानी  दीक्षित  बयान कर देता है  और रहस्य से पर्दा उठ जाता है |

उसने पुलिस को बताया कि छह साल पहले घर वालों की मर्ज़ी से उसकी शादी अनुराधा से हुई थी | वह लखनऊ  का रहने वाला है और अहमदाबाद में नौकरी करता था | वो सपरिवार वहाँ रहता था | एक साल के बाद अनुराधा ने एक बेटी को जन्म दिया |

लेकिन दीक्षित और उसके माँ बाप को कोई ख़ुशी नहीं हुई, क्योंकि वे लोग बेटा चाहते थे | और संयोग से डॉ ने यह भी कह दिया कि अब वो फिर माँ नहीं बन सकती है | इस बात को लेकर दीक्षित मन ही मन दुखी रहता था |

उन्ही दिनों  उसकी मुलाकात मॉल में काम करने वाली एक लड़की से होती है |  उसका नाम हीना था और वह बेहद ख़ूबसूरत थी | दोनों के बीच दोस्ती हो जाती है और फिर धीरे धीरे प्यार हो जाता है | यह सिलसिला एक साल तक चला तभी दीक्षित का  ट्रान्सफर बड़ोदरा में हो गया |

उसने वहाँ  एक फ्लैट किराये पर लिया और हीना को अपने साथ बड़ोदरा ले गया | वे दोनी  उसी फ्लैट  में लिव इन रिलेशन में साथ रहने लगे |  बाकि के परिवार सभी अहमदाबाद में रहते थे , क्योंकि वहाँ उनका अपना फ्लैट था |

दीक्षित साप्ताहिक छुट्टियों में और अन्य छुट्टी के समय अपने माँ बाप और पत्नी के पास अहमदाबाद में रहता था |

उसने सोचा था कि हीना से उसे बेटा ज़रूर पैदा होगा तब वो इस रहस्य को अपने घर वालो के सामने खोलेगा | बेटे की चाह में माँ बाप और बीबी मान ही जाएगी |

लेकिन होनी को कौन टाल सकता है | एक साल गुजरने के बाद हीना ने भी एक बच्ची को जन्म दिया | इस बात से दीक्षित और भी परेशान रहने लगा | उसने तो अभी तक हीना से विधिवत शादी भी नहीं किया था |

इस कारण से हीना हमेशा शादी के लिए दबाब बनाती, लेकिन दीक्षित टालता रहता था |

एक दिन दीक्षित ऑफिस की समस्या के कारण काफी परेशान था और उन्ही दिनों दशहरे की छुट्टी में अपने परिवार को लेकर उसे अपने गाँव जाना था | यह उसके माँ बाप की  इच्छा थी |

लेकिन हीना अड़ गयी कि  इस पर्व के मौके पर आप गाँव नहीं जाओगे बल्कि मेरे और मेरे बच्ची के साथ रहोगे | इसके अलावा वो फिर से शादी करने की बात छेड़ दी |

दीक्षित जो पहले से ऑफिस के कारण परेशान था | दुसरे,  उसके मन में इस बात  का दुःख था कि हीना ने भी बेटी को जन्म दिया था , जिससे उसका सोचा हुआ प्लान फेल  हो गया था | उसके बाद वो चिडचिडा रहने लगा था और हीना से पीछा छुड़ाने  का मन बना लिया था |

उस समय हीना से  जब  तू- तू  मैं- मैं हो रही थी तभी अचानक उसे जोर का गुस्सा आ गया और पास में रखे लकड़ी के टुकड़े से हीना के  सिर पे दे मारा |  सिर पर गहरी चोट लगने के कारण उसकी तत्काल मौत हो गयी |

अचानक गुस्से में यह सब कुछ हो गया था और तब उसे एहसास हुआ कि हीना की मौत ही चुकी है | इस घटना से वह घबरा गया | उसने आनन् फानन में घर में रखे एक बैग में उसकी लाश को डाल कर बंद कर दिया और उस बैग को किचेन में रख दिया | ताकि बाद में ठिकाने लगाया जा सके |

लेकिन अब घर में वो छः माह की बच्ची अकेली रह गयी थी | वह उसे मारना नहीं  चाहता था | लेकिन वह उस बच्ची को अहमदाबाद भी लेकर नहीं जा सकता था |

अतः उसने मन ही मन एक प्लान बनाया | जिसके तहत वह उस बच्ची को लेकर सूरत के उस गौशाला में आ गया | इस गौशाला के बारे में उसे पूरी जानकारी थी क्योंकि वह अपनी पोस्टिंग के दौरान यही से डेरी के सामान लेता था और यहाँ के बारे में पूरी जानकारी थी |

इसलिए वो इस बच्ची को  यहाँ छोड़ने का फैसला किया | क्योंकि उसे पता था कि कोई न कोई यहाँ उस बच्ची को  देख लेगा और उसे अपने पास रख लेगा | इसलिए वो वहाँ छोड़ कर भाग गया था |

चूंकि हीना के बारे में दीक्षित के घरवालों को कुछ पता नहीं था इसलिए इसे वह राज़ ही रखना चाहता था |

अंततः इस जुर्म में दीक्षित को जेल हो गया | लेकिन अब उस बच्ची का क्या होगा ? यह एक मूक प्रश्न है |  माँ का साया उसके सर से तो पहले  ही उठ चूका  था  और अब पिता भी सलाखों के पीछे है |

लेकिन उस बच्ची को पता नहीं उसे किस जुर्म की सज़ा मिल रही है |  अब उसका क्या होगा ?

क्या अनुराधा को ही उसे अपना लेना चाहिए , क्योंकि रिश्ते में तो वो माँ ही है .. आप का क्या अनुमान है ?

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Categories: story

7 replies

  1. मार्मिक घटना का सटीक चित्रण।

    Liked by 1 person

  2. Heart wrenching story

    Liked by 1 person

  3. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    यह नया साल आपके लिए सबसे अच्छा रहे और ईश्वर आपको
    और ज्यादा कामयाब बनाएं | इसी दुआ के साथ आपको
    नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं …

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