# वादा निभा रहा हूँ #

अगर किसी को चाहो तो इस अंदाज़ से चाहो कि
वो तुम्हे मिले या ना मिले , मगर उसे जब भी
प्यार मिले तो तुम याद आओ |

Retiredकलम

आज जब मैं ब्लॉग लिखने बैठा हूँ तो अनायास ही अपनी बचपन की दुनिया में खो गया और बहुत सारी भूली बिसरी यादें आँखों के सामने तैरने लगी है |

उसी की कड़ी में एक और घटना का जिक्र यहाँ करना चाहता हूँ ..’

बात उन दिनों की है जब मैं “हाफ –पेंट” पहना करता था | मुझे महसूस होता था कि जब तक हाफ – पैंट पहन रखा है तब तक समझो बचपन है और फुलपैंट आया नहीं कि समझो अपना बचपन समाप्त हो गया |

फुल पैंट वाली उम्र में तो घर और समाज के बड़े लोगों के प्रभाव के कारण हम अपने आप को बदलने की कोशिश करने लगते है | वह स्वछन्द मुस्कान , वो चंचल मन को भूल कर दिखावे में विश्वास करने लगते है |

खैर, मेरी यादें मुझे ५० साल पीछे लेकर आ गया है | मैं था तो केवल दस साल का…

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Categories: Uncategorized

15 replies

  1. Que história amigo!Deve ter sido um susto e tanto!

    Liked by 1 person

  2. Hello sir, what language is that in the above comment.
    Is that Spanish??

    यह आपका फिल्म देखने का शौक बड़े ही मजेदार और ट्रेन में आपका अनुभव तो दिल धड़कने वाली अनुभव था। सुन्दर वर्णन।
    I was able to visualise your situation. 😀👌👌

    Liked by 1 person

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