# मैं और मेरी कविता #

मुमकिन नहीं हर वक़्त मेहरबां रहे ज़िन्दगी ,
कुछ लम्हें जीने का तजुर्बा भी सिखाते है …

Retiredकलम

आज कल भगवान मेरी कोई प्रार्थना नहीं सुनते है। इसकी कोई ठोस वजह मुझे नज़र नहीं आता है |

लोग कहते है कि भगवान को साफ़ – सफाई बहुत पसंद है … मैं घर में और अपने आस पास खूब साफ़ सफाई रखता हूँ |

लेकिन तभी महसूस हुआ कि मुझे तो सफाई करनी थी …. अपने अंतरमन और आत्मा की …. पर मैंने तो ऐसा कुछ किया ही नहीं ….

और बस यहीं से हमारा खेल शायद बिगड गया है | इसीलिए मैं दुःख और बेचैनी का अनुभव करता रहता हूँ |

अब मैं ने तय किया है कि आत्मा को स्वच्छ रखना है | हमारे अन्दर जो वर्षों से गन्दगी जमी हुई है उसे हटाना है, क्योंकि आत्मा में परमात्मा का अंश रहता है ।

कभी – कभी हम अपनी भावनाओं को कविता के माध्यम से प्रकट करने की कोशिश करते है |

जी हाँ, हम कभी -कभी…

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12 replies

  1. सुनना और सुनाना तो किसी और को जाता
    वो तो भीतर ही हैं…….वो मुझसे दुर नहीं थे ना मैं राम जी से दुर था……ग़र मुझे नज़र ना आता था तो ये नज़र का कसूर था😊

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    • बिलकुल सच कहा है आपने |
      हमें आत्म मंथन करने की ज़रुरत है |

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      • संत समाज, कबीर, बुलेशाह, विवेकानंद रूमी हर कोई यही समझा रहा है। पर कबीर ने यह तक कह दिया कि हम बड़े ढिड है……समझते ही नहीं है…….पर आपकी पंक्तियाँ बहुत कुछ कहती है💕😊

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  2. हमारे मन की चाबी उसी के तो पास है…

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  3. कभी -कभी सब छोड़ कर लगता है जिंदगी समझने लिए नहीं जीने के लिए मिली है तो क्यों न सब छोड़ कर जिया जाए

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    • ज़िन्दगी में इतनी उलझनें है कि ज़िन्दगी को समझने में ज़िन्दगी गुज़र जाती है |
      आप के विचार साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |
      आप स्वस्थ रहें…आप खुश रहें…

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