# कभी कभी सोचता हूँ #

नवरात्रि का पहला दिन, माँ शैलपुत्री की कृपा
आप और आपके समस्त परिवार पर सदैव बनी रहे |
नवरात्रि की शुभकामनाये |

Retiredकलम

मन में विचारों का चलते रहना अनिवार्य है, यह जागरुकता और क्रिया का सर्वोच्च रूप है। विविध विचारकों ने अपने विचारों से ही विभिन्न सभ्यताओं का निर्माण किया है। हमारे सारे संबंध उस उपयुक्त, अनोपुयुक्त विचारधारा पर ही आधारित हैं।

हम सब स्वीकार करते हैं कि जब हमारे मन में विचार नहीं चल रहे होते है तो हम सोते हैं, निष्क्रिय जीवन जीते हैं या दिवास्वप्न देखते हैं;

और जब हम जाग्रत होते हैं तो सोचते हैं, कार्य करते हैं, जीते हैं, लड़ते हैं—केवल इन्हीं दो अवस्थाओं को हम जानते हैं ।

आदर्श स्थिति तो यह है कि हम दोनों अवस्थाओं से परे हो जाएं, …विचार से भी खाली तथा सक्रियता से भी … .

यह .कैसा रहेगा ?……

कभी कभी सोचता हूँ

सोचता हूँ ज़िन्दगी को बस यूँ ही गुज़र जाने दूँ

इजहारे मुहब्बत को अपने होंठो पे न आने दूँ

कल शायद नई सुबह हो , और नए…

View original post 168 more words



Categories: kavita

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: