# मेरी पहचान #

ज़िन्दगी में एक दुसरे के जैसा होना ज़रूरी नहीं होता.
एक दुसरे के लिए होना ज़रूरी होता है …

Retiredकलम

मैं अपनी पहचान ढूंढ रहा हूँ | मेरी पह्चान क्या है — जब हम माँ की कोख में थे तो पूरी दुनिया हमें हमारी माँ के मध्यम से जान पाती थी |

जब हम धरती पर पहला कदम रखते है तो उस क्षण हमें एक नाम दिया गया , जिसके बाद पिता का नाम जुड़ जाता है |

हालाँकि बचपन से ही मेरा एक सपना था , अपनी एक अलग पह्चान बनाने की | अपने को समृद्ध  एवं प्रसिद्धि प्राप्त करते हुए देखना चाहता था |

मेरी कोशिश कि हर कोई हमारे माँ-बाप के नाम से नहीं बल्कि माँ –बाप को लोग हमारे नाम से जाने |

इसी भावनाओ को समेटे मैं कुछ लिखने का प्रयास किया है…आप जरूर पढ़े और अपने विचारों से अवगत कराएँ …

मेरी पहचान

विशाल आकाश का सूरज नहीं तो क्या

जलता दीपक बन , अपना घर रोशन तो किया

किसी सागर सा विशाल अस्तित्व…

View original post 131 more words



Categories: Uncategorized

9 replies

  1. बहुत सुंदर लिखा है सर आपने 👌🏼👌🏼

    Liked by 1 person

  2. बहुत बहुत धन्यवाद दीक्षा |
    तुम्हारा प्रशंसा के शब्द मुझे लिखने को प्रेरित करते है |
    स्वस्थ रहो…खुश रहो …

    Like

  3. बहुत ही सुंदर ❤

    Liked by 2 people

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: