# खुशियों के आँसू #..

मैं अपना ज़िक्र सरेआम नहीं करता,
मैं तो एक रिटायर्ड बैंकर् हूँ यारो .
लिखने के सिवा और कोई काम नहीं करता…

Retiredकलम

Photo by Lisa Fotios on Pexels.com

राजेश अपने ऑफिस में बैठा बचपन के दोस्त रतन के साथ चाय पी रहा था और गप्पे मार रहा था | आज करीब एक वर्ष के बाद दोनों का मिलना हो रहा था |

वैसे तो बचपन से दोनों साथ पढाई की थी और पूरा बचपन साथ ही बीता था |

राजेश के माता पिता तो बचपन में ही दुनिया छोड़ गए थे | लेकिन रतन के माता पिता राजेश को भी अपने बेटे की तरह समझते थे |

बड़ा होने पर दोनों के रास्ते अलग अलग हो गए | जहाँ राजेश एक बड़ा बिल्डर बन गया तो दूसरी तरफ रतन ने अपनी स्टील की फैक्ट्री खोल ली थी |

दोनों अपने कामों में इतना मशगुल रहते है कि आज एक वर्षो के बाद मिलना हो रहा था | हालाँकि अब दोनों अलग अलग शहरों में रहते है |

रतन आज भी यहाँ आया…

View original post 1,618 more words



Categories: Uncategorized

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: