खुशियों  से अनबन

अमूमन देखा जाता है कि हम जिससे बहुत ज्यादा प्रेम करते है उससे  हमेशा  नोक झोंक होती रहती है |  लेकिन कई बार ये अनबन इतनी बढ़ जाती है कि रिश्ते बिगड़ने लगते हैं। मतलब छोटी सी बात से शुरू हुई अनबन रिश्ता टूटने का भी कारण बन जाता  है।

ऐसे में  हमें सतर्क रहने की जरूरत होती है और समय रहते इस समस्या का समाधान कर लेना चाहिए |

हमारी ज़िन्दगी में समय सिमित है हम उसे लड़ने झगड़ने में  क्यों जाया करें ..बस प्यार से रहें और लोगों में  प्यार ही  फैलाते रहें ..यही तो  है असली ज़िन्दगी |

खुशियों  से अनबन

कल रात ..

अचानक मेरी “खुशी” से अनबन हो गई

हालांकि जाते हुए

मुड़ – मुड़  कर  वह देख रही थी,

मैंने  भी

वापस बुलाना  मुनासिब नही समझा..

क्योंकि  उसी  समय

 “उदासी”  मेरे पास आकर बैठ गई थी,

कहने  लगी

मुझसे  मुहब्बत कर ले

मैं एक बार चिपक गई तो

दूर तलक साथ दूंगी .

में अपने वादे  की सच्ची हूँ ..

धुन की पक्की हूँ ..

एक बार गले लगा कर तो देखो,

खोने का डर कभी ना होगा..

मैं इसी उधेड़ बुन में,

 करवट बदलता रहा..कि,

तभी देखा खुशी को

दूर खड़ी मुस्कुरा रही थीं

इशारो ही इशारों से कुछ समझा रही थी

मुझे मेरी  गलती का एहसास करा रही

मैंने भी उसे अपने पास बुला लिया

 उसे प्यार से अपने पास बैठा लिया

मेरे सीने से लगते हुए उसकी आँखे भर आई |

हमने  साथ साथ जीने मरने की कश्मे खाई

यह सिलसिला चल  ही रहा  था कि

जोर की आवाज़ आई

मेरी नींद अचानक खुल गयी .

और मैं घबरा गया

सपनों की दुनिया को छोड़

हकीकत की दुनिया में अ गया ,

..

मैंने फिर

अपनी आंखें बंद कर ली..

मन शांत था..

नींद में ना सही..

हकीकत में बात कर ली |

मैं पास  सोई हुई

मेरी खुशी(पत्नी) को नींद से जगाया

अपने इस घटना क्रम  से

उसे अवगत कराया..

मैं ने साफ साफ

दो  टूक लहजे में उसे  बताया

तुम “खुशी” हो,

छोटी छोटी गलतियों  में नाराज़ ना होना..

“उदासी” को

अपनी सौत समझना..

तुम भी मेरा दूर तक साथ निभाना..

अंत में बस यही कहूँगा

खुशी जब तक साथ है,

तो फिक्र की क्या बात है…

                    .….विजय वर्मा

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Categories: kavita

10 replies

  1. अमूल्य, अप्रितम, अतुलनीय, अदभूत👌👌

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  2. बेहद उम्दा💕

    Liked by 2 people

    • बहुत बहुत धन्यवाद |

      आपलोगों के कमेंट्स पाकर मुझे बेहद ख़ुशी मिलती है |

      आपको तहे दिल से शुक्रिया .. आप हमेशा खुश रहें…

      Liked by 1 person

  3. I liked the personification in this poem. Beautifully written. लेकिन सौत क्यों भाई, चाहे वह उदासी ही क्यों न हो। भाभी जी नाराज हो जाएंगी। जरा सम्हल के।

    Liked by 2 people

    • हाहाहा ..
      पत्नी को सौत का डर बहुत होता है ,
      फिर सेवा अच्छी तरह प्राप्त होती है |
      सर ,आप हमेशा मेरी लेखनी में हौसलाअफजाई करते है |
      मैं आपका शुक्रगुज़ार हूँ |

      Liked by 1 person

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