# ममता की छाँव में #….

आपकी उपस्थिति से कोई व्यक्ति स्वयं के दुःख भूल जाए ,
यही आपकी उपस्थिति की सार्थकता है …

Retiredकलम

नयना आज बहुत उदास थी, क्योकि आज उसकी माँ की  बरसी  थी | आज सुबह – सुबह  उसने  माँ के फोटो  के सामने एक कैंडल जलाया और एक बुके रख कर फुट फुट रोई |

आज उसे  फिर वो सारी  पिछली बातें याद आ गई और अपनी  गलतियाँ भी |

फिर याद आने लगा वो सब पिछली बातें , .. जब वो ८ साल की थी और  एक बड़े स्कूल में पढ़ती थी |, वहाँ शहर के रईस के बच्चे ही वहाँ पढ़ा करते थे |

पिता जी की दोनों हाथ एक एक्सीडेंट में कट चुके थे | ऐसी हालत में  माँ ही दूसरों के घरों  में काम कर के हम परिवार का पेट नहीं पाल रही थी | इतना ही नहीं वह नयना को एक  बड़े से पब्लिक स्कूल में पढ़ा भी  रही थी ताकि  वह  एक नेक  इंसान बन  सके |

लेकिन माँ मैले कुचैले कपड़ो में  नयना…

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14 replies

  1. मुझे मदद की जरूरत है क्या आप मेरी मदद कर सकते हो सर

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    • Good morning..
      How can I help you ?

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      • Hello Sir Meri एक किताब publish hone वाली थी मगर उसके लिए बहुत सारे पैसो की जरूरत है bahut Sare लोगो se madad maagi he Koi madad nahi कर रहा he जिससेे भी मदद मांग रही हु सब बोल रहे है मै Jhut bol रही hu क्या आप मेरी मदद कर सकते हो book publish होने मै या Fir आप किसी को जाते हो जो मेरी book publish कर दे please help me sir

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        • हमारा भी यही स्थिति है, मैं भी अपनी किताब publish करने लिए बहुत दिनों से प्रयास कर रहा हूँ |
          लेकिन बहुत सारे ब्लॉगर है जो इसमें मदद करते है / मैं भी उनसे contact कर रहा हूँ /
          आपको भी उनसे मदद मिलेगी / थोडा धैर्य रखिये |

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  2. बहुत अच्छी कहानी। हरेक औलाद जरूर अपने माता-पिता के ख्याल रखना चाहिए। उनके मृत्यु के बाद रोने से क्या फायदा हो सकता है। सच्चाई तो यह है कि केवल वे ही अपने बच्चों के भलाई के लिए सबकुछ बर्दाश्त करके उन्हें सिर्फ प्यार ही देते हैं।

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    • आप ने बिलकुल सच कहा | कोई चीज़ खो जाने पर उसकी कीमत का पता चलता चलता है |
      आजकल के परिवेश में बच्चे अपने बुज़ुर्ग को उचित सम्मान नहीं देते है |
      आपके विचार साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

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  3. एक मार्मिक कहानी।

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  4. बहुत ही सुन्दर रचना है

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  5. अब afsoos karne se kya faida

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