# दिल और दिमाग ..किसकी सुनूँ ? #

अच्छा सोचिये, अच्छा बोलिए और अच्छा कीजिये ,
क्योंकि सब कुछ आपके पास वापस लौट कर आता है…

Retiredकलम

आज जब मैं ब्लॉग लिखने बैठा ही था कि मेरे “बिग ब्रदर”  का फ़ोन आ गया | कुछ पारिवारिक बातें  होने लगी |  इसी दौरान मैंने कहा …कुछ फैसले मैं दिल से लेता हूँ और कुछ फैसले दिमाग से |  

इतना सुनना था कि उन्होंने अचानक हमसे प्रश्न कर दिया ….  दिल और  दिमाग में क्या फर्क है ?

अचानक इस तरह के प्रश्न पूछे जाने पर मुझे तुरंत कोई ज़बाब नहीं सुझा |  मैं कुछ देर रुक कर , फिर कहा ….दिल का सम्बन्ध भावना  से होता है जबकि दिमाग का तर्क से और हकीकत से | बस इतना बोलकर बात मैंने यही समाप्त कर दी |

लेकिन मेरे मन में विचार उठने लगा कि इस विषय पर गहरे से विचार की जानी चाहिए |

सीता हमें बहुत अच्छी लगती है | ,अतः  मैं उसके पास रहना चाहता हूँ क्योंकि  मेरा दिल यह चाहता है |

लेकिन दूसरी…

View original post 1,305 more words



Categories: Uncategorized

6 replies

  1. True life is. Boomerang 😊😊

    Liked by 1 person

  2. बिल्कुल सच कहा है आपने 👏
    सुंदर संदेश देती हुई रचना 👌🏼👌🏼😊

    Liked by 1 person

    • बहुत बहुत धन्यवाद..
      यह सच है कि दिल और दिमाग में सदा ही
      एक जंग छिड़ी रहती है |

      Like

  3. वाह!! बहुत सुंदर तरीके से दिल और दिमाग के बीच होनेवाली अंतर को विश्लेषण किए हैं। 👌👌👍

    Liked by 1 person

    • यह सही है कि दिल और दिमाग में सदा एक द्वंद चलता रहता है ..
      इसलिए इस पर चर्चा करना चाहता था …
      आपके हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद,,

      Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: