# कहाँ गए वो दिन #….5

पैरों में यदि जान हो तो मंजिल दूर नहीं…
और दिल में यदि स्थान हो तो अपने दूर नहीं….

Retiredकलम

हँसकर जीना दस्तूर है ज़िन्दगी का

एक ही किस्सा मशहूर है ज़िन्दगी का

बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते

यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िन्दगी का

रोने का टाइम कहाँ ..सिर्फ मुस्कुराओ यारों,

क्योंकि, ये ज़िन्दगी दुबारा ना मिलेगी यारों |

पिछला blog पर बहुत मित्रों ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी…लेकिन एक मित्र ने कहा की आगे कि घटना से जल्द अवगत कराएँ , शायद जिज्ञासा बढ़ गई होगी …पिछली बातों का सिलसिला जारी रखते हुए, आगे की  एक और कड़ी ….

रात में  इस नए मकान में बड़ी अच्छी नींद आयी,  शायद इसके दो वजह थे ..पहला कि सुबह जल्दी उठ कर लोटा लिए खेतों में भागने की  जद्दोजहद  नहीं थी | और दूसरी बात कि आज  बैंक  जाने की  जल्दी नहीं थी क्योकि आज रविवार थी |

source: google.com

मैं  सुबह उठा तो करीब सात बज रहे थे,  तो चाय पीने  की  तलब हुई |..

बस…

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Categories: मेरे संस्मरण

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