# कलयुग का दशरथ # …3

Don’t compare your life to others..
There is no comparison between the Sun
and the moon. They shine when it is their time.

Retiredकलम

आज दशरथ बहुत खुश था | सुबह- सुबह ही अपने वृद्धाश्रम से चल कर कौशल्या के पास आ गया था. क्योकि अपने डॉ साहब के हॉस्पिटल में न तो समय का बंधन है और ना ही खाने पीने की तकलीफ | बिलकुल घर जैसा ही लगता है |

अपने डॉ साहब तो कौशल्या को माँ के सामान ही समझते है |

मैं तो देख ही रहा हूँ, कल ही उन्होंने सारी सुविधाएँ उपलब्ध करा दी थी | समय पर खाना और दवा भी दिया जा रहा है | कौशल्या के यहाँ आने से मैं अब बहुत शांति महसूस कर रहा हूँ |

मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि यहाँ कौशल्या जल्दी ही ठीक हो जाएगी ..दशरथ उसे नास्ता कराते हुए सोच रहा था |

नाश्ता समाप्त होते ही कौशल्या को कप में चाय दिया और दशरथ खुद भी लेकर पी रहा था, तभी डॉ साहब भी आ गए…

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Categories: story

9 replies

  1. Such a beautiful message in such few words sir …Hats Off

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  2. Beautiful and awesome read indeed!!!😊

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  3. Oh! I am glad but you are talented sir😊

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  4. Thank you sir for your kind words. 😊

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  5. दशरथ की कहानी बेहद सुंदर और उनके पुत्र जैसे नीच औलाद के लिए सही पाठ भी है। सराहनीय। 👏👏👏✌️👍💐

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    • बिलकुल सही कहा आपने |
      आज कल हमारे समाज में ऐसा ही हो रहा है |
      ऐसे औलाद को सबक तो मिलना ही चाहिए |
      कहानी की सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

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