मेरा बचपन…मेरा गाँव

आज इस तस्वीर को देख कर अपने गाँव की याद आ गई | गाँव में बिताये गए बचपन के दिन कोई नहीं भूलता | आज के भाग दौड़ बड़ी ज़िन्दगी में सुकून के पल ढूंढता …मेरा मन आज गाँव की ओर चला गया ….

अपने गाँव में

आओ फिर कुछ दिन बिताएं,  हम अपने गाँव में

टहलें गाँव की अमराइयों में, बैठे पीपल की छांव में

खंडहर घर, सुनी गलियां और टूटे हुए खाट यहाँ

खुद ब खुद रुकते है, जैसे बेड़ियाँ अपने पांव में |

रूठे रिश्ते, रूठे ख्वाब और बहुत सारी यादें

छोड़ दें इन सबको आज,  क्यों करें फरियादें,

संजोयें खंडहर से घर को, मिल कर हम सब

आज हम करें फिर से, आओ नए – नए वादें |

आओ फिर कुछ पल बिताये अपने प्यारे गाँव में

‘बनाएं ख्वाबों का आशियाना, फिर अपने गाँव में

घर के आँगन में,  टूटी खाट पर लेट कर

आओ गुनगुनाये प्यार का गीत चांदनी रातों में

हाल पूछेंगे अपनों का , यहाँ बैठ ठंढ़ी छाँव में  ..

आओ फिर कुछ दिन बिताएं, हम अपने गाँव में |

(विजय वर्मा )

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Categories: kavita

12 replies

  1. आज इस तस्वीर को देख कर अपने गाँव की याद आ गई | गाँव में बिताये गए बचपन के दिन कोई नहीं भूलता | आज के भाग दौड़ बड़ी ज़िन्दगी में सुकून के पल ढूंढता …मेरा मन आज गाँव की ओर चला गया ….👌👌 life is always meant to be lived in villages and those are undying memories for most of fortunate people who born n broght up in that culture of nature. Thanks for sharing Sir 🙏

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    • जी हाँ, यह सत्य है कि बचपन के सुनहरे पल जिसने गाँव में देखि है ..
      वह ज़िन्दगी के अनमोल पल है |आज भी वो पल याद आते है |
      आप स्वस्थ रहें…खुश रहें..

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  2. Gaon ki bat kuchh anokha hoti hai.Bit gaye wo din.Yaddon ko Taja Karne ke Liye aapka prayas bahut sundar.

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    • बिलकुल सही कहा आपने..
      गाँव की बचपन याद आतें ही मन खुशियों
      से भर जाता है |
      हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

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  3. Very interesting ✌️👌👍

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  4. Your blog reminded me of the wonderful time we spent when we used to go to our village near Danapur. Now only the memory remains as we have disposed of our agriculture landholdings.

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