ख़ुदकुशी या मर्डर -(1)

दोस्तों,

कोरोना से लड़ते हुए हमारा यह दूसरा साल बीत रहा है | सच पूछा जाये तो हमारे यह दो साल कोरोना की भेंट चढ़ गई है |

हम में से शायद ही ऐसा कोई शख्स होगा जो इस से पहले कोरोना जैसी भयावह परिस्थितियों से गुज़रा होगा |

पिछले साल  मार्च में पुरे देश में पहली बार देश में लॉक डाउन लगा था | उसके बाद से अब तक कही भी राहत दिखाई नहीं देती है |

 कोरोना ने हमारी  ऐसी दुर्दशा की है कि शहर – शहर, गाँव -गाँव में कोहराम मच गया है | लोग घरों में बंद हो गए  और सारे व्यसाय ठप्प हो गए |

सच  कोरोना ने ज़िन्दगी के हर  पहलु पर असर डाला है |

घर, दफ्तर, दूकान, रोज़गार, शादी ब्याह जैसे आयोजन, सभी कुछ को बंद करना पड़ा |

इस कोरोना के कारण बहुत सारी परिस्थितियां भी बदली |

कोरोना के कारण  बहुत सारी मौतें हुई |  हमने बहुत सारे अपनों को खोया है | लेकिन जो जिंदा बच गए उसमे बहुत बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए |

लोग पैसे पैसे के लिए मोहताज़ हो गए | खाने के लाले पड़ गए |

छोटे दूकानदार. ठेला लगाने वाले, फुटपाथ पर दूकान लगाकर पेट पालने वाले , यहाँ तक कि  बड़े बिज़नसमैन को भी कोरोना ने  बेहाल कर रखा है |

सच,  हमारी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी पर इस कोरोना ने बड़ा असर डाला है |

आज इसी से जुडी एक ऐसे नौजवान की कहानी प्रस्तुत करने जा रहा हूँ , जिसने  कोरोना के कारण उपजी परिस्थितियों से मजबूर होकर अपनी जान खुद ही ले ली |

ऊपर से देखने तो यह ख़ुदकुशी का मामला लगता है , परन्तु पूरी कहानी पढने के बाद आप सोच में पड़ जायेंगे कि यह ख़ुदकुशी है या हत्या |

उस नौजवान का नाम था राजेश कुमार, उम्र करीब चालीस साल |  उसकी दिल्ली से सटे एक इलाके में राशन  की दूकान थी |

उसके परिवार में बूढी माँ, बीवी और एक सुन्दर सा चार साल का बेटा था | दूकान से इतनी आमदनी हो जाती थी कि वह सपरिवार ख़ुशी ख़ुशी रहता था |

शौक मौज के लिए उसके पास कार  भी था | मतलब कोरोना से पहले उसके पारिवारिक ज़िन्दगी मज़े से चल रही थी |

लेकिन अचानक कोरोना का आतंक आते ही, औरों की तरह राजेश पर भी विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा |

लॉक डाउन के कारण उसकी राशन की दूकान बंद हो गई,| उसके आमदनी का और कोई दूसरा जरिया भी नहीं था |

कुछ दिन उसने इस आशा में काट गए कि ज़ल्द ही लॉक डाउन हटेगा और बिज़नस फिर चल पड़ेगी  | लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ |

उसने दूकान के व्यवसाय के लिए उधार भी ले रखे थे, लेकिन  उसके पैसे भी नहीं चूका पा रहा था | ऊपर से कुछ और भी क़र्ज़, माँ के इलाज़ और घर चलाने के लिए ले लिया था |

एक तरफ  क़र्ज़ धीरे – धीरे बढ़ता गया, तो दूसरी तरफ क़र्ज़ देने वाले पैसों के लिए दबाब भी बढाने लगे |

थक – हार कर  उसने दुबारा क़र्ज़ के लिए बैंक का दरवाज़ा खटखटाया  और वहाँ से किसी तरह 6.00 लाख का लोन उसे  मिल गया  |

उसने सोचा कि ये पैसे उधारी वालो को देकर कुछ दिन की और मोहलत ले लेगा | स्थिति सामान्य होते ही  बैंक का क़र्ज़ भी धीरे धीरे चूका देगा |

लेकिन उसके भाग्य ने यहाँ भी साथ नहीं दिया  और उसके खाते से ATM के द्वारा 4.00 लाख रूपये किसी ने निकाल  लिए |

साइबर क्राइम के अनुसार उसके खाते में फ्रॉड हो चूका था | उसने पुलिस  में रिपोर्ट भी लिखाई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ |

वह तो पैसे के अभाव में पहले से ही परेशान था,  और चार लाख की धोखाधड़ी से उसकी परेशानी और भी बढ़ गयी |

उसे अपनी बीवी और अपने छोटे से बच्चे के दुःख देखे नहीं जा रहे थे | घर में एक बूढी माँ जो बीमार थी, उसका  भी इलाज़ नहीं करवा पा रहा था |  क़र्ज़ देने वाले वैसे ही परेशान  कर रहे थे |

एक सुखी  संपन्न परिवार पर अचानक मुसीबतों का पहाड़ मानो टूट पड़ा था |

देखते देखते राजेश depression में आ गया और हालात ऐसे हो गए  कि उसे depression की दवा लेनी पड़ी |

मानसिक परेशानी के कारण उसके मन में तरह तरह उल्टे – सीधे विचार आने लगे | उसने एक करोड़ का अपना  जीवन बीमा भी करा रखा था |

वह पैसों की कमी और देनदारों के दबाब के कारण  इतने तनाव में आ गया कि उसने सोचा की ऐसी ज़िन्दगी से अच्छा है इससे छुटकारा पा लिया जाए |

उसने रात के अँधेरे में गले में फंदा डाल कर ख़ुदकुशी भी करने की कोशिश की | तभी उसके मासुस से छोटे बेटे का चेहरा उसके आँखों के सामने आ गया |

उसके मन में विचार आया कि मैं तो मर जाऊँगा लेकिन मेरे परिवार, मेरी बूढी माँ, बीवी और मेरे मासूम बेटे का क्या होगा ?

क़र्ज़ का बोझ  मुझसे हट कर मेरे परिवार पर आ जायेगा | वो लोग इतने क़र्ज़ कहाँ से चूका पायेंगे |

इससे तो मेरे परिवार को गहरा  सदमा लगेगा | एक तो घर के कमाने वाले सदस्य की मौत और दूसरा बीवी और बच्चो पर बड़ा क़र्ज़ का बोझ भला वह लोग कैसे सह पाएंगे |

 इन सब बातों पर  गहराई से विचार करने के बाद उसने ख़ुदकुशी का प्लान कैंसिल कर दिया | लेकिन परेशानियाँ दिनों-दिन बढती ही जा रही थी | वह रात दिन इस समस्या के हल के बारे लगातार सोचा करता था |

माँ की तबियत भी दिन ब दिन ख़राब हो रही थी, उनका तकलीफ देखा नहीं जा रहा था |

ऐसी विकट  परिस्थितियों में उसने  मन ही मन एक अजीब फैसला कर लिया |

वह पढ़ा लिखा तो था ही,  उसे पता था कि ख़ुदकुशी करने पर बीमा के पैसे नहीं मिलेंगे |

हाँ अगर मेरा  मर्डर हो जाये तो बीमा के एक करोड़ रूपये परिवार वालों को मिल जाएंगे और फिर सारी  समस्याएं हल हो सकती है |

ऐसा सोच कर उसने एक फुल-प्रूफ प्लान बनाया, …अपनी जान लेने का |  लेकिन अपनी हाथों से  नहीं बल्कि अपना ही सुपारी देकर खुद का क़त्ल कराने  की साजिस रच डाली |

उसे पता था कि खुद से जान लेना यानी खुदकुशी पर उसके  बीमा के पैसे उसके परिवार को नहीं मिलेंगे और दूसरों के हाथो क़त्ल हो जाए तो नियमतः वो बीमा के रकम परिवार वालों को मिल जाएंगे और उन्हें  सारी परेशानियों से निजात मिल जायेगा  |

उसके राशन की दूकान के पास ही एक लड़का जिसकी उम्र करीब 16 साल थी वह एक सिलाई मशीन रख कर कपड़ों की सिलाई करता था और उससे अच्छी दोस्ती थी |

उसने उससे संपर्क किया और कहा कि तुम मेरे परिवार पर एक एहसान कर दो | तुम कोई ऐसा आदमी ढूंढो जो मेरा क़त्ल कर दे | मैं इसके लिए उसे पैसे भी दूंगा और किसी को पता भी नहीं चलेगा |

राजेश की बात सुनकर वह दर्जी लड़का को अजीब लगा ..कि कोई अपना खुद का क़त्ल क्यों करवाएगा , वो भी पैसे देकर ?

वैसे सुपारी दूसरों के क़त्ल के लिए दी जाती है , कभी ऐसा नहीं सुना कि कोई खुद की सुपारी किसी को दे |

लेकिन राजेश उसे बार बार कहता रहा कि ऐसा करके तुम मेरे परिवार पर एक एहसान कर रहे हो |

उसने यह भी कहा कि लॉक डाउन के कारण तुम्हारी भी पैसों की तंगी चल रही होगी | हमारे दिए पैसों से तुम्हारे घर में खाने पिने की समस्या का हल निकल जाएगा |

पैसो की बात सुन कर अंततः वह यह काम करने को राज़ी हो गया |,,,

(यह एक काल्पनिक कहानी है …. अगले भाग में ) …

Pic source: Google.com

भाग -2 हेतु नीचे link पर click करे..

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Categories: story

10 replies

  1. Excellent sir

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  2. Good story. I had a staff working under me who had made fraud in the bank.Bank dismissed him.He had one crore insurance. He went to metro station and while entering rushed cabin,he made a slip and went down the train. Finished. His wife got one crore insurance. 😀

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