# चुप – चुप रहते हो #

कई बार ये ज़िन्दगी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहाँ सच बातें बोल दी जाए तो रिश्ते मर जाते है और अगर दिल में रख ली जाए तो इंसान खुद मर जाता है |

ऐसे हालात में इंसान चुप रहना ही उचित समझता है | चुप रहना यानी मौन  रहना  एक भावनात्मक  नियंत्रण  के  साथ  साथ  अभिव्यक्ति  भी  है।

यह एक भाषा  है जिसके माध्यम  से  अनर्गल  विवाद  से स्वयं को  बचा  सकते  है  । मौन में बहुत शक्ति है |

चुप चुप रहते हो

चुप चुप रहते हो, अब कोई सवाल क्यों  नहीं करते,

मेरे रूठने  पर, अब कोई बबाल क्यों नहीं करते

माना कि रिटायरमेंट से  खालीपन आ जाता है

अब अपनी अधूरी शौक का, इंतजाम क्यों नही करते

ज़िन्दगी  में ना जाने कितने  काम है अधूरे

उन्हें पूरा करने का..फरमान क्यों नहीं करते,

यह सच है कि  शरीर कमजोर हो गए है मगर .

दिल में जो जूनून है, उसका इस्तेमाल क्यों नहीं करते

ज़िन्दगी बहुत ख़ूबसूरत है. यारों .

इसकी  खूबसूरती का एहसास क्यों नहीं करते,

अशांत मन,  उदास  चेहरा रहता  हरदम

दोस्तों के साथ मिल कर धमाल क्यों नहीं करते 

चुप चुप रहते हो, अब कोई सवाल क्यों  नहीं करते,

मेरे रूठने  पर, अब कोई बबाल क्यों नहीं करते

पहले की ब्लॉग  हेतु नीचे link पर click करे..

https:||wp.me|pbyD2R-1uE

BE HAPPY….BE ACTIVE….BE FOCUSED….BE ALIVE…

If you enjoyed this post, please like, follow, share and comments

Please follow the blog on social media …link are on contact us page..

www.retiredkalam.com



Categories: kavita

2 replies

  1. Absolute right. Unpleasant truth creates conflict. It is better to remain silent and not to speak unpleasant truth.Nice

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: