# एक कहानी सुनो #-11

नबाब साहब

वैसे तो हमारे देश में बहुत सारे ऐसे नबाब हुए है जो अपने शानो – शौकत भरी ज़िन्दगी के लिए मशहूर रहे है | ..

इसमें से बहुत सारे नबाब अपने विचित्र स्वभाव एवं अपने झाक्किपने के लिए भी विख्यात रहे है | ….

कुछ तो ऐसे भी थे जो  साधारण सी गलती के लिए लोगों को भयंकर सजा देते थे, तो कुछ  अपने जी हुजूरी करने वाले और चाटुकारों की बातों में आ कर अपना बहुत सारा धन लुटाया |

कुछ ऐसे  नबाब भी हुए है जो ना सिर्फ बहादुर थे बल्कि शौकिन  मिजाज़ और कला प्रेमी भी थे. | उन्होंने गीत – संगीत और भवन निर्माण जैसे  विभिन्न कलाओं को सम्मान दिया और उसे संरक्षित भी किया |

आज मैं यहाँ एक ऐसे नबाब के बारे में चर्चा करना चाहता  हूँ जो बड़े सीधे और सरल स्वभाव के थे | उनके मातहत और चापलूस लोग उनकी इस कमजोरी का फयादा उठाया करते थे |

बिहार के शेखपुरा जिले के पास हुसैनाबाद नामक एक रियासत थी जिसके एक नबाब थे जो हुसैनाबाद के नबाब  के नाम से  प्रसिद्ध थे |

उनकी रियासत में काफी बड़ा इलाका आता था | जैसा कि  अक्सर होता है, रियासत का काम चलाने के लिए दरबार भी लगा करता था और नबाब साहब इस बात का ख्याल रखते थे कि  उनके राज्य की प्रजा हमेशा सुख से रहे |

उनके बारे में बहुत सी कहानियाँ प्रचलित है कि कैसे उनकी सीधे और भोले स्वभाव के कारण उनके मातहत उनको बुद्धू बनाकर उनके मंत्रीगण  धन ऐंठा करते थे |

एक दिन की बात है कि नवाब साहब का दरबार लगा हुआ था |  नवाब  साहब के साथ उनके दरबारी लोग बैठे हुए थे |

तभी नबाब ने एक दरबारी को तलब किया और उससे पूछा … रात में खेतों की ओर से कुछ जानवरों के रोने की आवाज़ आती है |

जरा तुम पता करना कि वे क्यों रोते है ?

दरबारी ने उनके सम्मान में सिर झुकाते हुए कहा .. हुज़ूर,.. आज रात को मैं वहाँ जाकर पता करूँगा और कल दिन में आप को अवगत काराऊंगा | ..

दुसरे दिन जब दरबार लगा तो नबाब साहब ने कल के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब जानना चाहा .|

इस पर उनका वह दरबारी जिसे जानकारी जुटाने का जिम्मा सौपा गया था,  उठ खड़ा  हुआ और पहले नबाब साहब को झुक कर सलाम किया |

फिर उसने  बड़े अदब से कहा… जहाँपनाह,  मैं कल रात में खेतों की तरफ गया था जहाँ से जानवरों के चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी |

वहाँ मैंने देखा कि बहुत सारे सियार थे जो ठण्ड से कांप रहे थे और हुआ हुआ कर चिल्ला रहे थे |

यह सुन कर नबाब बहुत दुखी हुए  और बोले  … मेरे राज्य में सियार सब रात में अगर ठण्ड से कांपते है और  हुआ हुआ करते है तो मेरे लिए बहुत  शर्म की बात है |

उन्होंने  सब दरबारियों से पूछा .—बताइए,  इन सियारों के लिए क्या किया जाए ताकि वे ठण्ड से बच सके और रात में हुआ हुआ न चिल्लायें. ??.

तभी वह दरबारी जो बहुत चालाक  और मक्कार किस्म का था,  उसने नबाब से कहा … हुजुर, अगर आप उन सब सियारों को कम्बल दिलवा देंगे तो उन्हें ठण्ड नहीं लगेगी और वे रात को चिल्लायेगे भी नहीं |

नवाब को उस दरबारी की बात अच्छी लगी और उसने उस दरबारी को आदेश दिया कि आप खजाने से पैसा निकलवा लीजिये और  उससे कम्बल खरीद कर उन सभी जानवर में बंटवा दीजिये |

दरबार में उपस्थित सभी लोगों ने नवाब के निर्णय की भूरी – भूरी प्रसंसा की |

उस दरबारी ने खजाने से बहुत सारा धन निकलवाया और आपस में बंदरबाट कर लिया और नबाब को झूठी सुचना दे दी गयी कि सियारों में कम्बल बंटवा दिया गया है |

नबाब साहब  यह  सुचना पा कर कि सभी सियार को कम्बल बंटवा दिया गया है, बहुत खुश हुए  |

कुछ दिनों के बाद,  नबाब साहब अपने उन्ही दरबारियों के साथ बैठे हुए थे |

रात का समय था और दरबारी सब नबाब का मनोरंजन करने में व्यस्त थे तभी खेतो की तरफ से सियारों के हुआ -हुआ कर चिल्लाने की आवाज़ सुनाई पड़ी |

नबाब चौक कर अपने दरबारी से पूछा ..आपने मेरे कहानुसार कम्बल इन  सियारों के बीच  बंटवा दिए थे न. ताकि इन्हें ठण्ड ना लगे |

इस पर वह दरबारी बोला …जी हुज़ूर आप के हुक्म  की तामिल की जा चुकी है  |

इस पर नबाब ने पूछा …तो आज ये  फिर क्यों हुआ – हुआ कर  चिल्ला रहे है |

इस पर दरबारी ने कहा .. हुज़ूर आज यह सब  सियार ठण्ड से परेशान होकर नहीं चिल्ला रहे है बल्कि आप ने जो इन्हें कम्बल बंटवाया है उसके लिए सब सियार एक साथ मिलकर आपको सलाम कर रहे है और आप के नेक काम  के लिए आप को दुआ दे रहे है |

यह सुन कर नबाब साहब खुश हो गए |

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Categories: story

7 replies

  1. Really the Nawab was absolutely mad.Nice story.

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  2. I love your photos of family.

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  3. सच में इस तरह के बेवकूफ़ी के क़िस्से मशहूर है।

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