# तलाश अपने सपनों की #..16

सच्चे साथ देने वालों की …बस एक ही निशानी है कि
वो ज़िक्र नहीं करते ….हमेशा फिक्र किया करते हैं |

Retiredकलम

भला हो उस इंसान का जिसने ना सिर्फ संदीप के ट्रेन का टिकट कटा दिया, बल्कि इतनी भीड़ – भाड़ वाली बोगी में बैठने के लिए जगह भी दिया | उसी के साथ बात करते हुए दो दिनों का सफ़र कैसे बीत गया ,पता ही नहीं चला |

सुबह के सात बज रहे थे और ट्रेन बिलकुल सही समय पर अपने गंतव्य स्टेशन पर पहुँच गया |

संदीप ने सफ़र के उस साथी को धन्यवाद दिया और अपना बैग लेकर प्लार्फोर्म नम्बर एक पर उतर गया |

प्लेटफार्म के बाहर ज्योंही निकला सामने बजरंग बाली के मंदिर पर उसकी नज़र पड़ी | वह भगवान् के मंदिर में माथा टेकने पहुँच गया |

उसी समय उसके मोबाइल पर रिंग टोन सुनाई पड़ा | शायद कोई मेसेज आया होगा …ऐसा सोच कर संदीप मोबाइल के मेसेज को चेक किया तो चौक गया |

जिसका डर था वही हुआ …सच, संदीप की नौकरी…

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