# ज़िन्दगी एक तराजू..#

दोस्तों,

हमारी ज़िदगी एक तराजू की तरह है,  जिसके एक पलड़े में ख़ुशी है तो दुसरे पलड़े में गम है .|

जब ख़ुशी का पलड़ा झुक जाता है तो सुख का अनुभव होता है और जब गम का पलड़ा झुक जाता है तो दुःख का अनुभव होता है |

लेकिन भाग्य का विधान  भी अजीब है, क्योंकि सुख और दुःख के पलड़े  बराबर नहीं रह कर कभी ऊपर कभी नीचे होते रहते  है |

और अक्सर जब सुख का पलड़ा  थोडा भारी होता है तभी  हम सब कुछ भूल कर बस अपने आप में मस्त हो जाते है और यह सोचते ही नहीं है कि कल दुःख का पलड़ा भी भारी  हो सकता है .|

इंसान ख़ुशी के पलड़े को झुकाने  के लिए तरह – तरह के प्रयत्न करता रहता है, लेकिन इंसान के कर्म तो ऐसे होते है मानो उस पलड़े पर मेढकों को रख रहा हो , जो ज्यादा देर तक ठहरते ही नहीं, बल्कि उछल कर भाग जाते है .|  

जबकि दुसरे  पलड़े पर खुद ब खुद दुःख रूपी पत्थर बरसते रहते है | नतीजा यह होता है कि हम कोशिश करते रहते है लेकिन थोड़े क्षणों के लिए ही ख़ुशी के पलड़े को झुका पाते है |,

लेकिन ज्यादातर  तराजू का पलड़ा विपरीत दिशा में ही झुका रहता है | परिणामस्वरूप हम हमेशा दुखी रहते है |

इस तरह तराजू के पलड़े को बराबर करने की कोशिश में ज़िन्दगी निकल जाती है और अंत समय में अपनी गलती का एहसास होता है कि हम कहाँ गलतियाँ कर रहे थे, लेकिन हमारे पास तब इसे सही करने का वक़्त बीत चूका होता है |

दरअसल हमने ख़ुशी के पलड़े पर रखने के लिए वैसे चीजो का चुनाव किया जिनका चरित्र और स्वभाव मेढक की तरह था ..जो गाहे बगाहे पलड़े  से कूद कर उसे हल्का करते रहे …

जबकि हमें उन पलड़ों पर सीप या मोती जैसे चीज़ रखना चाहिए था, जो  खुद को  स्थिर रखते हुए, पलडो को झुकाए रखता और आने वाले समय में खुशियों को मोती  के समान कीमती भी बनाता  |

इससे खुशियों की स्थिरता भी बढती और गम के पलड़े  को दूसरी तरफ झुकने का मौका ही नहीं मिलता |

समय का तकाजा है दोस्तों कि अगर हम छोटी – छोटी खुशियों को एन्जॉय  करते रहेंगे तो वो आगे चल  कर बड़ी  और स्थाई खुशियाँ बन जाएगी |

हमें झूठ,  फरेब, धोखा, घृणा जैसी अवगुणों से बचते रहना चाहिए  ताकि जो दुःख वाला पलड़ा है वो हमारे अवगुणों के भार से झुक न जाये बल्कि जीवन के तराजू के वे पलड़े जिस पर ख़ुशी है वो हमेशा नीचे झुका रहे |

आप अपने  अच्छे विचार और अच्छे कर्मो से ख़ुशी वाले पलड़े को झुकाए रखने का प्रयास

करते रहिये   …अनवरत. ..अविरल ….सतत.. .|||

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Categories: motivational

17 replies

  1. Karma Karna chahiye. Nasib me jo lekha hota hai, ohi mileage.Karma guru hota hai. Phal kabhi accha bhi ho sakta ha,bhi nahin. Magar dukhi nahin hona chahiye.
    Nicely presented.

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  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति

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  3. अति सुंदर प्रस्तुति 👌

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  4. Well said. Life is about the balance -the good and the bad, the highs and the lows. But we should realise that the key to happiness is being happy by ourself and for ourself

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