# मैं ज़िद्दी हूँ #

चार दिन की ज़िन्दगी , हँसी ख़ुशी में काट ले ..
मत किसी का दिल दुखा , दर्द सबके बाँट ले
कुछ नहीं है साथ जाना , एक नेकी के सिवा
कर भला होगा भला , गाँठ तू ये बाँध ले…

Retiredकलम

दोपहर का समय और  उन दिनों काफी गर्मी पड़ रही थी,| वैसे भी राजस्थान की गर्मी बहुत कष्ट दायक हुआ करती थी |

भैरो सिंह का ट्रेक्टर seize कर उसके गाँव से चल पड़ा था | परन्तु रास्ते में खतरे की आशंका बनी हुई थी, इसलिए जल्द से जल्द वापस अपनी शाखा में पहुँच जाना चाहता था,|

लेकिन ड्राईवर बाबू लाल जी बार बार बोल रहे थे कि उन्हें भूख लगी है, पहले कुछ खाना खा लेते है फिर आगे की यात्रा करते है |

धुल भरी आंधी अलग से परेशान कर रही थी | मैं पहली बार राजस्थान में ऐसी धुल भरी आंधी देख रहा था |  सड़क पर इतना बालू भर गया था कि रास्ता ही नहीं पता चल रहा था |

चारो तरफ बालू ही बालू दिखाई पड़ता था | मैं सूरज ढलने के पहले किसी तरह इस क्षेत्र से मैं निकलना चाहता था ताकि खुद को…

View original post 883 more words



Categories: Uncategorized

10 replies

Leave a Reply to Gottfried Cancel reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: