# जगन्नाथपुरी के भगवान् #

दोस्तों,

आज मैं भगवान्  जगन्नाथ और उनसे जुडी कुछ यादों पर चर्चा करना चाहता हूँ |

बात उन दिनों की है जब मैं एग्रीकल्चर कॉलेज में  पढता था | हमलोगों को  एजुकेशनल टूर के तहत नार्थ इंडिया घुमने का का सौभाग्य प्राप्त हुआ | …चूँकि cuttack  में विश्व प्रसिद्ध   Rice Research Institute है इसलिए  हमलोग वहाँ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था |

और हमलोगों ने इसी का फायदा उठा कर इसके पास के दर्शनिए स्थान, पूरी और कोणार्क घुमने का प्रोग्राम बना लिया |

सुबह का समय था और हमलोग  ट्रेन से पूरी रेलवे स्टेशन पहुँचे |

हमलोग का ४० स्टूडेंट का ग्रुप था, और यह घटना आज से करीब ४० साल पुराना है  | वहाँ स्टेशन पर उतरते ही बहुत सारे  पांडा लोग  हमलोगों की आगवानी के लिए उपस्थित थे |

 वे लोग पहले तो हमारे गाँव और पिता जी का का नाम पूछा और जैसे ही स्थान और पिता या दादा का नाम बताया , तो वे लोग पूरा का पूरा हमारी जनम पत्री  खोल कर रख दिए |…यह सब सुनकर हमें आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा |

उस समय तो कंप्यूटर युग भी नहीं था, फिर इन्हें इतनी जानकारी  कैसे रहती होगी | शायद इनका communication system बहुत मजबूत रहा होगा |

हर पांडा का अपना अपना एरिया बंटा रहता है इसलिए हमारे गाँव जिला के हिसाब से

उन्होंने हमें हमारे पण्डे के पास भेज दिया |

इनके पास रहने और  भोजन आदि की पूर्ण  व्यवस्था रहती है |

Source: Google.com

 हमारे कुछ मित्र इन पंडों की सेवा लेने से इनकार कर दिया , बस वे  पांडा लोग उनके पीछे पड़  गए और विरोध करने पर जोर जबरदस्ती और दुर्वयाहार पर उतर आये  | धर्म की नगरी में यह सब देख कर बहुत बुरा लग रहा था | किसी तरह हमलोग मंदिर दर्शन को तैयार हो गए |

 हमलोगों ने  मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की और उनलोगों ने हमें मंदिर से जुडी बहुत सारी जानकारी दी,  जिसे मैं यहाँ शेयर कर रहा हूँ …

भगवान् जगन्नाथ  भगवान  विष्णु के पूर्ण कला अवतार श्रीकृष्ण का ही एक रूप हैं । यहाँ उन्ही के नाम से  इस शहर का नाम  जगन्नाथपुरी रखा गया है ।

यहाँ हर वर्ष जुलाई में वार्षिक रथ यात्रा उत्सव का आयोजन किया जाता है।

इस मंदिर की स्थापना मालवा के राजा इंद्रदयुम्न ने कराया था. इनके पिता का नाम भारत और माता का नाम सुमति था |

पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा को एक बार सपने में भगवान जगन्नाथ  के दर्शन हुए थे | सपने में  भगवान  ने राजा से अपनी एक मूर्ति को नीलांचल पर्वत की गुफा में ढूंढने को कहा और फिर उस  मूर्ति को एक मंदिर बनवाकर उसमे स्थापित करने की इच्छा जताई |

Source: Google.com

ऐसा माना जाता है कि एक दिन  भगवान जगन्नाथ  की बहन सुभद्रा ने नगर देखने की इच्छा के साथ  द्वारका के दर्शन कराने की प्रार्थना की थी |  जिसके बाद  भगवान जगन्नाथ ने अपनी बहन को रथ में बैठाकर उसे नगर का भ्रमण करवाया था |. जिसके बाद से यहाँ हर साल जगन्नाथ रथयात्रा निकली जाती है |

इसके लिए  इस यात्रा से जुड़ी सभी तैयारियों को समय से पूरा कर लिया जाता है | उस समय काफी  भीड़ होती है और सभी लोग रथ खीचने की क्रिया में भाग लेना चाहते है ||

लोगों का ऐसा मानना है कि रथ खींचने वाले को सौ यज्ञ के बराबर पुण्य प्राप्त होता है |

रथ यात्रा के दैरान किसी भक्त को कोई कष्ट न हो इसका  पूरा इंतज़ाम किया जाता है |

जगन्नाथ रथ उत्सव 10 दिन तक मनाया जाता है | भगवान जगन्नाथ जी की रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथपुरी में आरंभ होती है और दशमी तिथि को समाप्त होता है |

इस यात्रा में  भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्रा  की प्रतिमाएं रखी जाती हैं | . इन सभी प्रतिमाओं को रथ में बिठाकर नगर का भ्रमण करवाया जाता हैं. |

ऐसा माना जाता है कि  भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ा तो उनका अंतिम संस्कार किया गया |  उनका सारा शरीर तो पांच तत्त्व में मिल गया,  लेकिन उनका हृदय बिलकुल सामान्य एक जिन्दा आदमी की तरह धड़क रहा था और वो बिलकुल सुरक्षित था |  

उनका हृदय आज तक सुरक्षित है जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है  और उसी तरह धड़कता है ,|

महाप्रभु जगन्नाथ (श्री कृष्ण) को कलियुग का भगवान भी कहते है | जगन्नाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निवास करते है |

इसके अलावा कुछ रहस्यपूर्ण बाते है जिसे हम सब को पता होना चाहिए |

हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ती को बदला जाता है | उस समय  पुरी शहर में ब्लैकआउट किया जाता है, यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है । लाइट बंद होने के बाद मंदिर परिसर को चारो तरफ से घेर लिया जाता है | …उस समय कोई भी मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता है |

उस समय मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है | …पुजारी की आँखों मे पट्टी बंधी होती है,  …और उनके हाथ मे दस्ताने होते है | ..

 वो पुरानी मूर्ती से “ब्रह्म पदार्थ” निकालता है और नई मूर्ती में डाल देता है… ये ब्रह्म पदार्थ क्या है आजतक किसी को नही पता… इसे आजतक किसी ने नही देखा. ..हज़ारो सालो से ये एक मूर्ती से दूसरी मूर्ती में ट्रांसफर किया जा रहा है |

इस ब्रह्म पदार्थ का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है… मगर ये क्या है, कोई नही जानता | … ये पूरी प्रक्रिया हर 12  साल में एक बार होती है | 

मगर आज तक कोई भी पुजारी ये नही बता पाया कि महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ती में आखिर ऐसा क्या है ? 

कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथ मे लिया तो खरगोश जैसा उछल रहा था. |.. आंखों में पट्टी थी… हाथ मे दस्ताने थे तो हम सिर्फ महसूस कर पाए |

आज भी हर साल जगन्नाथ यात्रा के उपलक्ष्य में सोने की झाड़ू से पुरी के राजा खुद झाड़ू लगाने आते है |

जगन्नाथपुरी समुद्र के किनारे  है | लेकिन भगवान जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार से पहला कदम अंदर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर सुनाई नहीं देती, जबकि आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देती है |

आपने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे – उड़ते देखे होंगे, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता । 

शिखर पर लगा  झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशा मे लहराता है |

दिन में किसी भी समय भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती।

भगवान जगन्नाथ मंदिर के  45 वें  मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदला जाता है, ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं  बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा |

इसी तरह भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है, जो हर दिशा से देखने पर आपके मुंह की तरफ दीखता है।

भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, जिसे लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है |  इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है ।

भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर दिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जैसे ही मंदिर के पट बंद होते हैं वैसे ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है।

Source: Google.com

हालाँकि इस तरह की बातें सुन कर .और देख कर आश्चर्य तो होता है, परन्तु आस्था भी बढ़ जाता है |

हम लोगों ने  भी प्रसाद का भोग किया और भगवान् जगन्नाथ का आशीर्वाद लिया |

यक्षं प्रश्न हेतु नीचे link पर click करे..

https://wp.me/pbyD2R-2su

https:||wp.me|pbyD2R-1uE

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Categories: मेरे संस्मरण

13 replies

  1. Mera gaon.Mera desh. Jai Jagnnath.

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  2. hahahaha….yes sir,

    I was posted at Cuttack and visited puri so many times..

    I have great faith…JAI JAGANNATH..

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  3. I can agree on many of the points mentioned here as I have also visited Puri temple during my college and witnessed these in-person.

    Liked by 1 person

  4. जय श्री जगन्नाथ भगवान

    Liked by 1 person

    • जय जगन्नाथ ,
      जगन्नाथ मंदिर से जुड़े बहुत सारे रहस्य है,
      जिसका उत्तर नहीं पाया जा सका है ,, इसलिए आस्था और
      भी बढ़ जाती है ..

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  5. Haa ji मैं गई हूं ,ये लकड़ी के बने है बलराम जी और बहन सुभद्रा

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  6. जी, बहुत अच्छी जगह है,,
    मैं भी बहुत भी गया हूँ …

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  7. Excellently recited.
    Thanks for creative endeavours.

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  8. Reblogged this on Retiredकलम and commented:

    आज भगवान् जगन्नाथ की रथ यात्रा है | ऐसी मान्यता है कि
    इस रथ यात्रा के दर्शन मात्र से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते है …
    जय जगन्नाथ …

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