हर ब्लॉग कुछ कहता है ..15

फुटपाथ की ज़िन्दगी  

दोस्तों, आज सुबह  मैं नास्ता  वगैरह से निवृत होकर ब्लॉग लिखने बैठा था | पहले मैं अपने मोबाइल पर आये हुए मेल चेक करता हूँ और कुछ समय सोशल मीडिया पर  व्यतीत करता  हूँ |

आज जब मैं मोबाइल पर मेसेज देख ही रहा था तभी एक फोटो पर मेरी नज़र ठहर गई | और मेरी एक पुरनी याद ताज़ा हो गयी  . वो  पुराने दृश्य चलचित्र की तरह दीमग में चलने लगे | …..

यह तब की बात है जब  मैं ट्रान्सफर होकर पहली बार कलकत्ताा (अब कोलकाता ) शहर आया था | उन दिनों मैं गिरीश पार्क  इलाका  में रहता था और रोज़ वहाँ के एक सुन्दर  पार्क में सुबह मोर्निंग वाक करने जाता था | कुछ ही दिनों में वहाँ कुछ मित्र बन गए थे |

जाड़े का मौसम, उस पार्क के बेंच पर हमलोग रोज बैठ कर सुबह की सुनहरी धुप का मजा लेते और घंटो गप्पें मारा करते थे |

एक दिन हम लोग रोज की तरह  सुबह की मीठी धुप का मजा ले ही रहे थे तभी एक झोला झाप डॉक्टर , हमलोगों के पास आया और कान सफाई  करवाने की बात करने लगा |

सच पूछिए तो ये भी एकतरह -का  झोला झाप डॉक्टर ही है । इस झोला झाप डॉक्टर के हाथ में तेल की शीशी और कान के ऊपर फाहा लगी हुई थी । ये डॉक्टर बिना किसी सर्टिफिकेट के हर कोई का इलाज़ करते है ..ऐसा मेरे मित्र ने बताया |

 इनकी क्लीनिक फुटपाथ पर सजती है ।

उन्होंने आगे बताया कि  .. इन डॉक्टरों से इलाज करवाने वाले ज्यादातर मरीज रिक्शा चलाने वाले और गरीब तो होते ही है , इसके आलावा अन्य सभ्य लोग भी इन से इलाज़ करवाते है |

मैं पहली बार इस तरह के स्पेशलिस्ट को देख रहा था जो कान की सफाई के साथ साथ  लोगों के सिर का मालिश भी कर रहा था |

मैं तो डर  से पहले ही मना  कर दिया , लेकिन मेरे मित्र ने अपनी कान सफाई कराने को तैयार हो गए |

सचमुच मुझे देख कर आश्चर्य हो रहा था |  वह  किसी अनुभवी डॉक्टर के सामान धीरे धीरे करके कुछ ही समय में बहुत सारी  गन्दगी कान के  भीतर से निकाल कर उनके हाथ पर  रख दिया |

मुझे यह  देख कर आश्चर्य हो रहा था कि हमारे  कानों के भीतर इतनी गन्दगी मौजूद रहती है और हमलोग इस ओर ध्यान ही नहीं देते है |

मेरे मित्र की कान की सफाई हो गयी तो उन्होंने मुझे भी कान साफ करवा लेने की सलाह देने लगे | मैं अपने डर को काबू में किया और अपनी कान की सफाई कराने को तैयार हो गया |

फिर क्या था ,, उसने धीरे धीरे मेरे कान से भी मैल निकाल कर मेरे हाथ पर रख दिए |

यह मेरे लिए नया अनुभव था | वहाँ बैठे कुछ लोग तो मालिश भी करा रहे थे |

और तो और,  हजामत बनाने  वाले भी अपनी एक छोटी सी लकड़ी के बक्से में औजार लेकर लोगों के बाल दाढ़ी भी बना रहे थे |

इसी तरह चलता फिरता दुकान लेकर कोलकाता के सडको पर ये गरीब लोग घूम घूम कर धंधा कर के अपना पेट पाल रहे थे |

ये बेचारे गरीब तबके के लोग होते  है और इनके ग्राहक भी ज्यादातर गरीब और मजदूर किस्म के लोग होते है | जो इसी तरह से  फूटपाथ पर ही रह कर अपनी ज़िन्दगी बसर करते है |

इस तरह से  फूटपाथ पर ज़िदगी बसर करने वालों की एक बहुत बड़ी जमात है जिनकी ज़िन्दगी की शुरुआत फुटपाथ से होती है और अंत भी फुटपाथ पर होता है |

दिन भर अपना काम या मजदूरी करने के बाद वही फुटपाथ पर ही सजने वाली दूकान में खाना खाते है और रात में वही फुटपाथ पर सो जाते है |

यूँ तो गर्मी के समय में यहाँ  मौसम ठीक रहता है तो इन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होती है सिवाए इसके कि रात में गश्त करने वाली पुलिस गाहे – बगाहे शक के आधार पर दो चार डंडे मार देती है |

लेकिन बरसात और ठण्ड से ठिठुरती रातो में इनका बुरा हल होता है |

वैसे तो फुटपाथ पर रहने वाले लोग ज्यादात अनपढ़ होते है और उनमे विभिन्न जातीय औए धार्मिक परिवेश से आये हुए होते है …परन्तु  उनमे एक दुसरे को मदद करने का और मिल जुल कर रहने का भाव और आपसी सहयोग होता है |

हाँ, अभी मेरे दिमाग में यह प्रश्न घूम रहा है कि इस कोरोना काल में जब  चारो तरफ लॉक डाउन लगा हुआ है… वे कहाँ रहते होंगे ?… क्या खाते होंगे ? …कैसे अपना जीवन बसर करते होंगे ?….एक  प्रश्न बार बार मेरे मन में कौंधता है और मन उनलोगों के बारे में सोच कर दुखी हो जाता है |

फिर समाज के कुछ  वैसे तबके और लोगों के बारे में पढने को मिलता है जो अपने सारी जमा पूंजी लगा कर ज़रूरतमंदों  को ….चाहे खाना खिलाना हो या उनकी दवा – दारु की व्यवस्था करना हो .. मदद करने का प्रयास कर रहे है |

यह सब देख कर मन को तसल्ली होता है और  मैं उनलोगों को जो इस नेक काम में लगे हुए है, .और कोरोना के बीमारी का खतरा उठा कर भी घर से बाहर निकल रहे है , और लोगों की मदद कर रहे है …उनका अभिनन्दन करता हूँ.. ..

और गरीबों की तरफ से उन सभी नेक दिल इंसान का शुक्रिया अदा कर रहा हूँ .. जो इस कठिन समय ने भी मानव धर्म को निभा रहे है |

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Categories: मेरे संस्मरण

6 replies

  1. Jindegj hota hai aisa. Footpath ki jindegj. Pet ke liye aadmi kuchh bhi karaleta hai.Nice

    Liked by 1 person

  2. Lockdown has been very harsh on footpath vendors, household maids, rickshawallah, auto wallah etc and they should be provided income support or financial assistance by the Govt besides support of individuals, NGOs and other charitable organizations.

    Liked by 1 person

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