# एक अधूरी प्रेम कहानी #..18

ज़िन्दगी के रथ में लगाम बहुत है ,
अपनों के अपनों पर इलज़ाम बहुत है..
ये शिकायत का दौर देखता हूँ तो थम सा जाता हूँ,
लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है…
Be happy….Be healthy….Be alive…

Retiredकलम

source:Google.com

मन ही मन को जानता …मन की मन से प्रीत ,
मन ही मनमानी करे …मन ही मन का मीत .
मन झूमे मन बाबरा … मन की अद्भुद रीत
मन के हारे हार है …. .मन के जीते जीत

हाय री किस्मत

रामवती से मिलाने वाली बात सुमन के मुँह से सुन कर रघु को पसीने आ रहे थे | उसे पता था कि  रामवती सामने पा कर मुझे तो ज़रूर पहचान जाएगी | इस स्थिति को किसी तरह भी टालना होगा |

उससे बचने के लिए क्या करना चाहिए, रोटी खाते हुए रघु  सोच रहा था | चिंता के मारे, उसके मुँह से निवाले नीचे नहीं उतर रहे थे |

पास में बैठा विकास उसकी हालत को देख कर बोल पड़ा …क्या बात है रघु भैया,  आप कुछ चिंतित नज़र आ रहे है | मैंने तो अपना खाना  समाप्त भी कर लिया है और आप अभी तक…

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