# एक अधूरी प्रेम कहानी #..17

कल न हम होंगे न गिला होगा ,
सिर्फ यादों का सिलसिला होगा …
जो लम्हे है , चलो हंस कर बिता लें..
जाने कल ज़िन्दगी का क्या फैसला होगा ….
Be happy….Be healthy….Be alive…

Retiredकलम

सोर्स:google.com

ज़िन्दगी की उलझनों ने किस कदर उलझा दिया

कहीं दूर तक मंजिल नहीं …जाने कहाँ पहुँचा दिया

अब नहीं बाकी किसी से कोई भी …उम्मीदे ए वफ़ा

अपनों ही ने हर कदम जितना हुआ …धोखा दिया  

मन की उलझन

टैक्सी में बैठा रघु सोच रहा था….., कल तो सुमन मेरी  तबियत  ख़राब होने  की खबर सुन कर ही  रास्ते की कठिनाइयों को पार कर मेरी खोली  में आ गई थी | और आज उसको पता होने के बाबजूद कि मुझे बुखार है फिर भी आना तो दूर फ़ोन भी करना उचित नहीं समझा |

वह अपने माथे पर हाथ रख कर महसूस किया कि अभी भी बुखार है और ऐसी हालत में घर से नहीं निकलना चाहिए था |

टैक्सी अपनी गति से सड़क पर दौड़ रही थी और रघु आँखे बंद किये बस उस गेस्ट के बारे में सोच रहा था जिसके कारण आज रविवार होने के…

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Categories: story

2 replies

  1. Thank you very much..

    Please read complete story. I hope it will be worth reading

    Stay connected ….stay happy….

    Like

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