# एक अधूरी प्रेम कहानी #…2

पा लेने की बेचैनी और खो देने का डर …
बस यही तो है ज़िन्दगी का सफ़र ..

Retiredकलम

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एक प्रवासी का दर्द

मैं  धारावी से मुंबई स्टेशन पर पहुँचा तो गाँव के कुछ और साथी  पहले से ही  इंतज़ार कर रहे थे | हम सभी मुँह पर मास्क लगाए थे और हिदायत दी गई नियमो का पालन कर रहे थे |

क्योकि हमें पता था कि अगर “चाइना वाली बीमारी” की चपेट में आये तो अपने लाश का भी पता नहीं चलेगा |

सभी  साथी लोग  सरकार की ओर से घर जाने की व्यवस्था होने पर आज बहुत खुश दिखाई पड़  रहे थे | और हो भी क्यों नहीं..बाल बच्चे और खास कर घरवाली  से इतने दिनों बाद जो मिलना होगा |

ट्रेन में बैठ कर खूब धमाल मचा रहे थे | आपस में बिरहा के गीत गा रहे थे और थाली को पिट कर संगीत का मजा ले रहे थे | यह तो स्पेशल ट्रेन खास कर  मजदूरों को बिहार ले जाने के लिए मुंबई…

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