दीप तले अँधेरा

ज़िन्दगी में टेंशन ही टेंशन है , फिर भी लवों पर मुस्कान है

क्योंकि जीना जब हर हाल में है, तो मुस्कुरा के जीने में क्या नुक्सान है ..

कोई कैसे सोच सकता है कि… जो इंसान अपनी खुशिओं का हमेशा social media में, फेसबुक के  द्वारा नुमाइश करता रहता है,  दुसरो को नसीहत देता फिरता है कि हमेशा खुश रहो |

जिंदगी जीने के नए आयाम सिखाता रहता है, परन्तु  खुद अंदर से इतना दुखी कैसे हो सकता है |

उसकी आँखों में ख़ुशी के नहीं दुखों के सैलाब नज़र आते है …..लेकिन यह सत्य है दोस्तों कि  दिए तले ही अँधेरा होता है |

कभी कभी इंसान अपनी दुखों  एवं कसक को छुपाने के लिए जीवन रूपी रंग मंच पर हकीकत से परे  अभिनय (role play)  करता है | 

दुनिया को वो सब नसीहत देता फिरता है जो उसके खुद के जीने के लिए जरूरी है |

एक डॉक्टर जो स्वयं  ही diabetic मरीज है वो दुसरो का diabetic ठीक करने का ईलाज करता फिरता है और  उसे सटीक दवा उपलब्ध कराने की कोशिश करता है |

उसे खान- पान में परहेज और  सही जीवन शैली के बारे में सलाह देता है..

 परन्तु वो स्वयं पर इसे  क्यूँ  लागू नहीं कर पाता है ,…. यह सोचनिए विषय है ?  

क्या उसके खुद के जीने कि इच्छा समाप्त हो गई है ?..  शायद नहीं |

वह सब कुछ जानते हुए भी खुद पर लागू क्यों नहीं कर पाता है |

यह कहावत सत्य है कि “दुसरे को उपदेश देना बहुत आसान है, लेकिन खुद उन उपदेशों का पालन करना बहुत ही कठिन है “

यह ज़िन्दगी  है दोस्त, … बस, यह यूँ ही चलता रहेगा ….जब तक कि खुद में दृढ संकल्प और इच्छा शक्ति ना हो उसे अपने पर लागू कर पाने का |

यह प्रश्न  इतना कठिन नहीं है, शायद इसका उत्तर बहुत कठिन है | लेकिन इसका उत्तर ढूँढना होगा, जल्द ही खोजना होगा..  आखिर ऐसा क्यूँ ….??? 

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जिद करना मज़बूरी नहीं

जिद करना ज़रूरी है

ख्वाब बुनना ज़रूरी है

किस्मत के सहारे ना बैठ

 कोशिश करना ज़रूरी है

हाँ, जिद करना ज़रूरी है …

जिद करो कि  मंजिल को पाया जाए

तंग सोच से पीछा छुड़ाया जाए…

जिद हो कि आंधियो  में दिया जलाया जाए

दशरथ मांझी सा हिम्मत जुटाया  जाए

जिद हो कि  रोते को हंसाया जाए

और दुनिया को  खूबसूरत बनाया जाए

असफलता को गले लगाना मजबूरी है

हाँ,  जिद करना ज़रूरी है …..

जिद करो कि हार जीत में बदल जाए

डगमगाते कदम  भी संभल जाए

अपने अन्दर के गन्दगी को हटाया जाए

और, खुद को बेहतर इंसान बनाया जाए 

 जिद  करना  मज़बूरी  नहीं

हाँ ….जिद करना ज़रूरी है  ||

…..विजय वर्मा

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Categories: kavita

11 replies

  1. Story of different types.It has reality and motivation. I enjoyed the doctor advice.

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  2. It is easier to preach than to practise because preaching requires thoughts and words and practising requires thoughts and action. We have all heard ofTulsi Das ji saying ‘ Par upadesh kushal bahutera je acharahin te nar na ghanere’

    Liked by 1 person

  3. Awesome poem and post… Aksar log gyan dete hain par wo khud use aatmsaat karne me asafal rehte hain… Aj ke parivesh me dusron ko gyan deta sabse asan hai par vastavikta me kya khud wo apni zindagi un cheezon ko dhaal pate hain jo wo dusron ko karne ko kehte hain… ye sochne ki baat hai…

    This post also reminded me one of the famous quotes of Mahatma Gandhi: “Be the change you want to see in the world.”

    Bahut hi acha likha hai apne sir… Behatareen…

    Liked by 1 person

    • बहुत बहुत धन्यवाद हौसलाअफजाई के लिए..
      आप ने सच कहा , ज्ञान देना आसान है पर खुद पर लागू करना कठिन |
      आप खुश रहें..स्वस्थ रहें..

      Like

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