सकारात्मक विचार – 14

मिले  जहां जब भी जो  खुशी,
फैला  के दामन  बटोरा  करो,
जीने  का  हो अगर   नशा,
हर  घूंट में जिंदगी  को पिया करो,
किस्तों  में  मत  जिया   करो …..

यह सच है कि हमारी सोच पर बहुत कुछ निर्भर करता है | अगर  हमारी  सोच सकारात्मक होंगे तो  आस पास के वातावरण में पॉजिटिव vibes का संचार होगा और तब हम सकारत्मक ज़िन्दगी जी सकेंगे ….

दरअसल हमारे पास दो तरह के बीज होते हैं, सकारात्मक  और नकारात्मक विचार वाले बीज |  हम जैसा बीज बोते है, आगे चलकर वैसा ही हम  अपने नजरिये और व्यवहार रूपी पेड़ का निर्धारण करते हैं।

हम जैसा सोचते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि जैसे हमारे विचार होते हैं, वैसा ही हमारा आचरण होता है।

यह सच है कि हमारे विचारों पर हमारा स्वयं का नियंत्रण होता है इसलिए यह हमें ही तय करना होता है कि हमें सकारात्मक सोचना है या नकारात्मक ।

यह पूरी तरह से हम पर निर्भर करता है कि हम अपने दिमाग रूपी जमीन में कौन- सा बीज बोना चाहते हैं।

अगर थोड़ी सी समझदारी का उपयोग करें तो  हम कांटेदार वृक्ष  को भी महकते फूलों के वृक्ष में बदल सकते हैं।

अगर आने वाले समय में  हमें  अपने जीवन में सफल होना है तो हमें आज से ही अपनी सोच सकारात्मक बनानी होगी।  

इसी बात को ध्यान रखते हुए हम अपने ब्लॉग में रोज़ सुबह सकारात्मक विचारों को लिखते है ताकि हमारी सुबह सकारात्मक सोच से शुरू हो सके |

आज कल हमारे आस पास का  वातावरण  कुछ ऐसा हो गया है कि नकारात्मक विचार खुद ब खुद हमारे अंदर आ जाती है | परन्तु सकारात्मक विचार को मन में लाने के लिए हमें अपने आप को motivate (mind को activate)   करना पड़ता है |

कल ही की बात है… मैं सुबह में मोर्निंग वाक के लिए घर से थोड़ी दूर स्थित पार्क की ओर पैदल ही जा रहा था |  रास्ते में हमारे पुराने मित्र राम शरण जी से मेरी  मुलाकात हो गयी |

आज बहुत दिनों के बाद उनसे मुलाकात हुई थी, सो हमने पूछ लिया ….और कैसी कट रही है ?

तभी उनके चेहरे पर चिंता के भाव उभर आये  और उदास होते हुए बोले… क्या कहें डिअर, अब तो जीने की इच्छा ही समाप्त हो गई है |

मैंने तुरंत पूछा …ऐसा क्यों बोल रहे है ?

 उन्होंने कुछ सोचते  हुए कहा… अब क्या बताएं. …मन बहुत दुखी रहता है … शारीरिक चिंता, पारिवारिक कलह , आर्थिक चिंता  सब कुछ मिल कर चैन से रहने नहीं देता है |

बात करते हुए हमलोग पार्क में पहुँच  चुके थे | हम दोनों वही एक चबूतरे पर बैठ गए | चूँकि उनसे बहुत दिनों बाद मुलाकात हो रही थी तो मैंने बातों का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए पूछा…  अब इस उम्र में तो थोड़ी बहुत शारीरिक कष्ट तो लगी ही रहती है, और धन सम्पति के बारे में इस उम्र के पडाव में क्या चिंता करना |

बस दो वक़्त की रोटी आराम से पा रहे है | घर में बाल बच्चे सब settle कर गए है | फिर तो आप को हमेशा खुश रह कर ज़िन्दगी जीना चाहिए |

करीब  आधे घंटे तक तर्क वितर्क होता रहा | हर चीज़ में उनकी नकारात्मक सोच दिख रही थी |  तब मैंने उन्हें एक सुनी हुई  कहानी सुनाई …

एक बार भगवान् गौतम बुद्ध अपने शिष्यों को उपदेश देते हुए एक कहानी सुना रहे थे |

एक  राजा अपने नियमित  विचरण के लिए हाथी पर बैठ कर राज्य का  भ्रमण कर रहे थे |

वो थोड़ी दूर ही चले होंगें कि एक दूकान के सामने अपने हाथी को रोक दिया और साथ चल रहे मंत्री से कहा…. मालूम नहीं क्यों , मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि इस दूकानदार को कल सुबह फाँसी पर लटका दूँ  |

मंत्री अपनी जिज्ञासा शांत करने के ख्याल से राजा जी से पूछने ही वाला था कि तब तक राजा  ने हाथी को आगे बढ़ा दिया और दूसरी ओर चल दिए |

मंत्री बहुत होशियार था, लेकिन उसके मन में अब भी यह प्रश्न उठ रहे थे कि राजा ने ऐसा क्यों कहा | दुकानदार ने तो कोई गुनाह भी नहीं किया |

जब राजा  वापस अपने महल में पहुँचे,  तो वो मंत्री वहाँ से भेष बदल कर साधारण जनता की तरह वापस  उस दूकानदार के पास पहुँचा | वह  देखता है कि दूकानदार चन्दन की लकड़ियाँ बेच रहा है | उसने दुकानदार से  कहा… और सेठ जी,  आप का व्यापार कैसा चल रहा है ?

सेठ जी मंत्री को पहचान नहीं सके और एक साधारण प्रजा समझ कर उनसे कहा …क्या बताएं दोस्त, व्यापार बहुत मंदा चल रहा है | ग्राहक आते तो है, चन्दन की लकड़ियों की खुशबू का आनंद लेते है, उसकी तारीफ भी करते है, लेकिन खरीदता कोई नहीं |

मैं तो सिर्फ इस इंतज़ार में बैठा हूँ कि  अपने राज्य की राजा  की मौत हो जाये तो उसके अंत्येष्टि में ढेर सारे चन्दन की लकड़ी की ज़रुरत पड़ेगी और उस दिन से  शायद मेरा  व्यापार चल निकले |

अब मंत्री को माज़रा समझ में आ रहा था | उसके राजा  के प्रति नकारात्मक विचार को  यहाँ से गुजरते हुए राजा ने महसूस किया  होगा |और उनके दिमाग में भी उसके लिए वैसा ही नकारात्मक विचार आया होगा |

मंत्री बुद्धिमान थे | उनके मन में एक विचार आया और  कुछ सोच कर उन्होंने कहा …. मैं थोड़ी चन्दन की लकड़ी खरीदना चाहता हूँ | 

उनकी खरीदने की बात सुन कर  दूकानदार बहुत खुश हुआ | बहुत दिनों के बाद कोई ग्राहक आया था  |

उसने  अच्छी तरह कागज में लपेट कर चन्दन की लकड़ी मंत्री को दे दी |

दुकानदार को मालूम नहीं था कि वे उसी राजा के मंत्री है |

मंत्री जी अगले दिन चन्दन की लकड़ी लेकर राजा  के पास पहुंचे और उनसे बोले … महाराज, वो जो दूकानदार था, वह आपके लिए यह तोहफा भेजा है |

राजा तोहफा पाकर बहुत खुश हुए | और कहने लगे… मैं तो बेकार में ही उस दुकानदार  को फांसी पर लटकाने की सोच रहा था  | उसने तो मेरे लिए तोहफा भेजा है |

उसने पैकेट खोल कर देखा तो चन्दन की खुशबूदार लकड़ी थी | राजा ने भी बदले में कुछ सोने के सिक्के उन दुकानदार के लिए भिजवाए |

मंत्री अगले दिन सोने के सिक्के लेकर आम जनता की भेष में ही  दुकानदार के पास  पहुंचे और राजा  द्वारा दी गयी सिक्के उसे सौप दिया |

दुकानदार  सोने के सिक्के पाकर बहुत खुश हुआ और बोला…मैं तो फालतू में ही सोच रहा था कि राजा को चले जाना चाहिए इस दुनिया से | जिसकी चिता के लिए  चन्दन की लकड़ी खरीदी जाएगी |

राजा तो बहुत अच्छे है, बड़े दयालु है |  भगवान् उनकी उम्र लम्बी करे |

यह एक छोटी सी कहानी बताती है कि ये जो हमारे मन में विचार चलते है और जो विचार शब्दों के रूप में बाहर निकलते है और जो  भावनाएं  हम प्रदर्शित करते है  वो सब सब हमारे कर्म है |

गौतम बुद्ध ने कहा था … आपके विचार ही आपके कर्म है | अगर हमने  अपने विचारों को नियंत्रित  कर लिया तो हम को हमेशा सुख की अनुभूति होगी |

इसीलिए आप हमेशा सकारात्मक सोचिये  और सुखी रहिये. …

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

11 thoughts on “सकारात्मक विचार – 14

    1. बहुत बहुत धन्यवाद ,
      सकारात्मक विचारों से दिन की शुरुआत अच्छी है ..
      आप स्वस्थ रहे…खुश रहें…

      Liked by 1 person

    1. Yes sir,

      Start the day with positive thought and develop positive attitude in life…
      Thank you sir, your positive comments also help me towards positivity ..

      Like

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