यक्ष प्रश्न

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कोरोना महामारी का प्रकोप फिर तेज़ी से हमारे देश में फ़ैल रहा है | अतः फिर से लॉक डाउन लगाए जाने की  संभावनाए बढ़ रही है | आने वाले वक़्त में  लॉक डाउन लगेगा या नहीं यह आज हमारे सामने  ‘यक्ष प्रश्न’ की तरह है | 

अक्सर हम लोग उन सवालों को ‘यक्ष प्रश्न’ कह देते हैं, जिनका जवाब देना बड़ा मुश्किल होता है |

यक्ष प्रश्न की बात जेहन में आते ही .. महाभारत की वो घटना याद आता है जिसमे यक्ष और युधिष्ठिर के बीच  संवाद हुआ था | उसमे यक्ष ने  युधिस्टर से बड़े ही गूढ़ प्रश्न पूछे थे और युधिस्ठिर ने उन सभी पश्नो का सही और सटीक जबाब देकर यक्ष को प्रसन्न किया था |

उनके  संवाद सुनने  के बाद मुझे अजीब तरह की अनुभूति हुई थी, इसलिए   इस ब्लॉग में महाभारत के इस घटना के बारे में लिखने की प्रबल इच्छा हुई | यह जीवन दर्शन को दर्शाता है |

जिस तरह यक्ष के मन में प्रश्न उभरे थे उसी तरह हम सभी भी  अपने जीवन काल में  कुछ सांसारिक प्रश्नों के उत्तर  ढूंढने में लगे रहते है |

इस संवाद के द्वारा ऐसे ही अध्यात्म, दर्शन और धर्म से जुड़े प्रश्न किये गए है जो हकीकत में हमारी जिंदगी से जुड़े प्रश्न है ।

यक्ष द्वारा पूछे गए प्रश्नों को हम “यक्ष प्रश्न ” के नाम से आज भी याद करते है और युधिष्ठिरः द्वारा दिए गए उत्तर आज के परिवेश और परिस्थितियों में भी बिलकुल खरा  उतरता है | तो आइये आज उन यक्ष प्रश्नों की  हम चर्चा करते है |

यह घटना उस समय की है जब पांडवजन अपने तेरह-वर्षीय वनवास के दौरान वनों में भटक रहे थे | इसी दौरान युधिष्ठिर को प्यास लगी |  वे अपनी  प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश करने लगे | जब आस पास कही पानी नहीं दिखा तब उन्होंने अपने सबसे छोटे भाई

सहदेव को  पानी का प्रबंध करने का जिम्मा सौपा ।

सहदेव पानी की तलाश में भटकते  हुए एक जलाशय के पास पहुँचे | वे  जलाशय से जल लेने का प्रयास कर ही रहे थे,  तभी  जलाशय के स्वामी अदृश्य यक्ष ने आकाशवाणी  द्वारा उन्हें रोकते हुए पहले कुछ प्रश्नों के  उत्तर देने की शर्त रखी।

 सहदेव यक्ष  और उनके शर्तों को अनदेखा कर जलाशाय से पानी लेने लगे । तब यक्ष ने उसकी शर्त न मानने पर क्रोधित हो कर सहदेव को निर्जीव कर दिया ।

सहदेव के न लौटने पर क्रमशः नकुल, अर्जुन और फिर भीम ने बारी बारी से पानी लाने की जिम्मेदारी उठाई । वे भी उसी जलाशय पर पहुंचे और यक्ष की शर्तों की अवज्ञा की | फलस्वरूप उन सबो का भी वही हश्र हुआ और यक्ष के द्वारा सभी को एक एक कर निर्जीव कर दिया गया |

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अंत में चिंतातुर युधिष्ठिर स्वयं अपने भाइयों की खोज करने निकल पड़े और वे भी उस जलाशय के समीप पहुंचे ।  उन्हें प्यास लगी थी इसलिए वे भी पानी पीने  के उद्देश्य से जलाशय के नजदीक गए | वहाँ वे अपने सभी भाइयों को मूर्छित पाकर आश्चर्य चकित हो गए. |

तभी अदृश्य यक्ष उनके सामने प्रकट हुआ और  उनसे आगाह किया कि अगर वे उसके प्रश्नों के उत्तर नहीं देंगे तो उनकी भी हालत अपने भाइयों जैसी हो जाएगी |

युधिष्ठिर शांत चित व्यक्ति थे इसलिए उन्होंने धैर्य दिखाया  और यक्ष से प्रश्न पूछने को कहा |

उन्होंने न केवल यक्ष के सभी प्रश्न ध्यानपूर्वक सुने अपितु उनका तर्कपूर्ण उत्तर भी दिया जिसे सुनकर यक्ष संतुष्ट हो गया।

यक्ष के द्वारा पूछे गए वो प्रश्न क्या थे और संतुष्ट होने के बाद यक्ष ने क्या किया ..आइये आगे जानते है ..

#1 . यक्ष : पृथ्वी से भी भारी क्या है? आकाश से भी ऊंचा क्या है?

युधिष्ठिर : माता पृथ्वी से भी भारी है. पिता आकाश से भी ऊंचा है.


#2. यक्ष: हवा से भी तेज चलने वाला क्या है? तिनकों से भी ज्यादा असंख्य क्या है?

युधिष्ठिर: मन हवा से भी तेज चलने वाला है. चिंता तिनकों से भी ज्यादा असंख्य होती है.

#3 यक्ष: रोगी का मित्र कौन है? मृत्यु के समीप व्यक्ति का मित्र कौन है?

युधिष्ठिर : वैद्य रोगी का मित्र है. मृत्यु के समीप व्यक्ति का मित्र है दान.


#4 यक्ष : यश का मुख्य स्थान क्या है? सुख का मुख्य स्थान क्या है?

युधिष्ठिर : यश का मुख्य स्थान दान है. सुख का मुख्य स्थान शील है.


#5 यक्ष : धन्य पुरुषों में उत्तम गुण क्या है? मनुष्य का परम आश्रय क्या है?

युधिष्ठिर : धन्य पुरुषों में उत्तम गुण है कार्य-कुशलता. दान मनुष्य का परम आश्रय है.

#6 यक्ष : लाभों में प्रधान लाभ क्या है? सुखों में उत्तम सुख क्या है?

युधिष्ठिर : निरोगी काया सबसे प्रधान लाभ है. सबसे उत्तम सुख है संतोष.

#7 यक्ष: दुनिया में श्रेष्ठ धर्म क्या है? किसको वश में रखने से मनुष्य शोक नहीं करते?

युधिष्ठिर : दया दुनिया में श्रेष्ठ धर्म है. मन को वश में रखने से मनुष्य शोक नहीं करते.

#8 यक्ष: किस वस्तु को त्यागकर मनुष्य दूसरों को प्रिय होता है? किसको त्यागकर शोक नहीं होता?

युधिष्ठिर: अहंकार को त्यागकर मनुष्य सभी को प्रिय होता है. क्रोध को त्यागकर शोक नहीं करता.

#9 यक्ष: किस वस्तु को त्यागकर मनुष्य धनी होता है? किसको त्यागकर सुखी होता है?

युधिष्ठिर : काम-वासना  को त्यागकर मनुष्य धनी होता है. लालच को त्यागकर वह सुखी होता है.

#10 यक्ष: मनुष्य मित्रों को किसलिए त्याग देता है? किनके साथ की हुई मित्रता नष्ट नहीं होती?

युधिष्ठिर : लालच के कारण मनुष्य मित्रों को त्याग देता है. सच्चे लोगों से की हुई मित्रता कभी नष्ट नहीं होती.

#11 यक्ष : दिशा क्या है? जो बहुत से मित्र बना लेता है, उसे क्या लाभ होता है?

युधिष्ठिर : सत्पुरुष दिशाएं हैं. जो बहुत से मित्र बना लेता है, वह सुख से रहता है.

#12 यक्ष : उत्तम दया किसका नाम है? सरलता क्या है?

युधिष्ठिर : सबके सुख की इच्छा रखना ही उत्तम दया है. सुख-दुःख में मन का एक जैसा रहना ही सरलता है.

#13 यक्ष : मनुष्यों का दुर्जय शत्रु कौन है? सबसे बड़ी बीमारी क्या है?

युधिष्ठिर : क्रोध ऐसा शत्रु है, जिस पर विजय पाना मुश्किल होता है. लालच सबसे बड़ी बीमारी है.

#14 यक्ष : साधु कौन माना जाता है? असाधु किसे कहते हैं ?

युधिष्ठिर: जो समस्त प्राणियों का हित करने वाला हो, वही साधु है. निर्दयी पुरुष को ही असाधु माना गया है.

#15 यक्ष : धैर्य क्या कहलाता है? परम स्नान किसे कहते हैं?

युधिष्ठिर: इंद्रियों को वश में रखना धैर्य है. मन के मैल को साफ करना परम स्नान है.

#16 यक्ष : अभिमान किसे कहते हैं? कौन-सी चीज परम दैवीय है?

युधिष्ठिर: धर्म का ध्वज उठाने वाले को अभिमानी कहते हैं. दान का फल परम दैवीय है.

#17 यक्ष: मधुर वचन बोलने वाले को क्या मिलता है? सोच-विचारकर काम करने वाला क्या पाता है?

युधिष्ठिर : मधुर वचन बोलने वाला सबको प्रिय होता है? सोच-विचारकर काम करने से काम में जीत हासिल होती है.

#18 यक्ष: सुखी कौन है?

युधिष्ठिर: जिस व्यक्ति पर कोई कर्ज नहीं है, जो दूसरे प्रदेश में नहीं है, जो व्यक्ति पांचवें-छठे दिन भी घर में रहकर साग-सब्जी खा लेता है, वही सुखी है |.

#19 यक्ष : आश्चर्य क्या है ?

युधिष्ठिर : हर रोज संसार से प्राणी यमलोक जाते हैं. लेकिन जो बचे हुए हैं, वे सर्वदा जीने की इच्छा करते रहते हैं. इससे बड़ा आश्चर्य और क्या होगा ?

#20 यक्ष : सबसे बड़ा धनी कौन है ?

युधिष्ठिर : जो मनुष्य प्रिय-अप्रिय,  सुख-दुःख, अतीत– भविष्य में एक समान रहता है, वही सबसे बड़ा धनी है |.

आखिरकार युधिष्ठिर ने सारे प्रश्नों के सही उत्तर दिए, जिसे पाकर यक्ष प्रसन्न हो गया |

 फिर यक्ष ने उनके बोला…, ‘युधिष्ठिर, ममैं  तुम्हारे एक भाई को जीवित करूंगा । तुम बताओ कि तुम इनमे किसे जीवित देखना चाहते हो ?

तब युधिष्ठिर ने अपने छोटे भाई नकुल को जिंदा करने के लिए कहा।

उनकी बात सुन कर यक्ष हैरान होकर पूछा …. तुमने भीम और अर्जुन जैसे वीरों को जिंदा करने के बारे में क्यों नहीं सोचा।’

इस पर युधिष्ठिर बोले…., मनुष्य की रक्षा धर्म से होती है ।

मेरे पिता की दो पत्नियां थीं । कुंती का एक पुत्र मैं तो बचा हूँ और  मैं चाहता हूं कि माता माद्री का भी एक पुत्र जीवित रहे ।

यक्ष उत्तर सुनकर काफी प्रसन्न हुए और उनके सभी भाइयों की जीवित कर दिया |

अंत में उन सभी भाइयों को लम्बी आयु और मंगलमय भविष्य की शुभकामना देते हुए अपने धाम लौट गए।

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

11 thoughts on “यक्ष प्रश्न

    1. बिलकुल सही,
      नैतिक मूल्यों और शिक्षा पूर्ण कहानी है |
      बहुत बहुत धन्यवाद / आप स्वस्थ रहें …खुश रहें..|

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