मैं कलम हूँ

Gregoire A. Meyer

रास्ते है तो ख्वाब है ,

ख्वाब है तो मंजिले है

मंजिलें है तो फासले है

फासले है तो हौसले है

हौसले है तो विश्वास है 

मैं कुछ लिखने के लिए अपने कलम  को ढूंढ रहा था, तभी मेरे डायरी के पन्नो के बीच  उससे मुलाकात हो गई ..

कलम मुझे देख कर सकुचाई तो मैंने पूछ लिया … तुम में और  मुझ में क्या फर्क है ? …

मेरी कलम मेरी ओर देख कर मुस्काई और  फिर धीरे से मेरे कानों में  बोली  …

मैं एक छोटी सी कलम हूँ जो  हर पल एक इतिहास लिख रही हूँ ;  लेकिन इसके विपरीत,  पाँच फीट के तुम इंसान अपने ज़िन्दगी में हमेशा  संघर्ष कर रहे हो ।

मैं कलम हूँ  मैं अपनी इच्छा के शब्दों को लिख सकती हूँ, लेकिन मुझे लगता है तुम्हारी इच्छाएं ही मर चुकी है |

मैंने कहा … ऐसी बात नहीं है …हमारी इच्छाएं तो अनंत है और यही तो हमारे दुःख का कारण है …मैंने ज़ल्दी से अपनी भावना प्रकट कर दी  |

नही , तुम हमेशा अपनी ज़िन्दगी में बस चमत्कार होने की बात सोचते रहते हो |

चमत्कार तो हो चूका है .. .भगवान् ने तुम्हे इंसान बना कर इस लोक में भेजा है , तुम्हारी साँसे चल रही है .. तुम जो चाहो सोच सकते हो ..यह कोई चमत्कार से कम तो नहीं …

मुझे नहीं पता कि तुम सब  जीवन के रूप में इस  चमत्कार को क्यों भूल जाते हैं। और फिर कोई और चमत्कार होने की आश लगाए बैठे हो |.. भगवान् के मंदिर में जाते हो और उनसे चमत्कार  होने की बात मनवाना चाहते हो |

तो मैं क्या करूँ ?

तुम तो जानती हो कि तुम ही मेरी सच्ची दोस्त हो .. तुम तो मेरी भावनाओं को अच्छी तरह समझती हो और तुम ही उसे डायरी में अंकित करती रहती हो |

हाँ, वह तो ठीक है,  लेकिन जब तुमने मुझे सच्चा दोस्त बोला है तो मेरी एक बात मानोगे ..?

ज़रूर मानूँगा .. तुम जो भी कहोगी मैं मानूँगा |

मैं तुम्हें एक तरकीब बताती  हूं….

तुम भुत और भविष्य में  विचरण करना छोड़ दो और हमेशा वर्तमान में रह कर जीवन का आनंद उठाओ |

अपनी पसंद के संगीत का स्विच ऑन करो…. और अपने आप से नृत्य करना शुरू करो । अगर कोई तुम से कारण पूछता है,  तो बताओ …, मैं खुश हूँ  ..  मैं खुश हूँ …

यह बहुत ही सरल है । इस तरह,  जीवन में खुशी की शुरुआत होती है ।

जो घट चूका है वह अतीत है और जो होने वाला है उसके बारे में जानने का अभी तक कोई टेक्नोलॉजी विकसित नहीं हुआ है |

यह भी सत्य है कि तुम्हारे पास अगर कोई पैसा,  नाम,  और प्रसिद्धि है तो उसे अपने साथ नहीं ले जा सकते ,,, सब यही रह जानी है |

फिर उसके लिए लालच कैसा ? …अहंकार कैसा ?  ज़रा सोचो…ज़रा सोचो…

आओ मेरे साथ , अपनी मुस्कान और नृत्य के साथ अपनी इच्छा के जीवन को अपनी कलम से लिखकर अपनी अन्दर की खुशियों को जगाओ |

याद रखो, शरीर के अंदर प्रजवलित होने वाली अग्नि इतिहास बनाते है और  दूसरी तरफ, शरीर के बाहर घटने वाली बातें सिर्फ  रहस्य पैदा करती हैं।

तुम हमेशा खुश रहो और अपने दोस्त कलम को भी अच्छी बातें अपनी डायरी में लिखने को प्रेरित करो.. .

चलो, फिर  मिलते है ..

………………तुम्हारी कलम ||

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

15 thoughts on “मैं कलम हूँ

    1. बहुत बहुत धन्यवाद |

      इसी तरह पढ़ते रहिये और अपने विचार प्रकट करते रहिये…

      Like

    1. जी, बहुत बहुत धन्यवाद्,,
      सकारात्मक उर्जा के साथ दिन की शुरुआत करने की कोशिश …
      आप स्वस्थ रहें…खुश रहें….

      Like

  1. बहुत बहुत धन्यवाद् ,

    आपकी उत्साह वर्धक बातें ही हमारा हौसला बढाती है ..

    आप स्वस्थ रहे …खुश रहे ..और हमसे जुड़े रहे..

    Like

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