सकारात्मक विचार -12

समय चला, पर कैसे चला

पता ही नहीं चला

ज़िन्दगी के आपाधापी में

कब निकली हमारी उम्र यारो

पता ही नहीं चला

समय का महत्व

खाना जो हम खाते है, उसे 24  घंटे के अन्दर शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए, वरना हम बीमार हो जायेंगे..

पानी जो हम पीते है, वह 4  घंटे के अन्दर शरीर से बाहर निकल जाना चाहिए, वरना हम बीमार पड़  जाएंगे |

हम  जो  सांस लेते है,  कुछ सेकंड में ही वापस बाहर निकल जाना चाहिए, वरना हम मर जाएंगे |

लेकिन नकारात्मक बातें,  जैसे  गुस्सा,  घृणा,   ईर्ष्या,  असुरक्षा ,,, आदि, जिनको हम अपने अन्दर दिन, महीने और सालों तक रखे रहते हैं … यदि इन नकारात्मक विचारों को समय समय पर अपने अन्दर से नहीं निकालेंगे तो एक दिन निश्चित ही हम मानसिक रोगी बन जाएंगे |

  • समय को हम बाँध नहीं सकते,  अगर कुछ कर सकते है तो सिर्फ उसे  हम manage कर सकते है | समय तो अपनी सामान रफ़्तार से ही चलती रहती है,  हम अपने प्राथमिकता (priority) को उसके अनुसार एडजस्ट (adjust) कर सकते है |

समय को सही ढग से जीना ही ज़िन्दगी है और इसलिए हमें  समय का सही उपयोग करना चाहिए |

  • हम चाहे गरीब हो या अमीर,  पर हम सबको Time तो उतना ही मिलता है | जब हम सुबहे को सोकर उठते है तो हमारे पास भी  १२ घंटे होते है …. फर्क मगर इतना है कि  हम  अपने समय का उपयोग किस प्रकार करते है..

यदि हम सबके पास दिन में काम करने के लिए बराबर समय है, तो फिर कोई सफल और कोई असफल क्यों होता है ?

जो अन्य लोगों की तुलना में ज़्यादा काम करते हैं, , उन्हें अन्य लोगों की तुलना में अधिक सफलता मिलती है, या लाभ मिलता है।

समय कीमती है और हर किसी के लिए अमूल्य है, इसलिए हमें कभी समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। हमें सकारात्मक ढंग से और सही तरीके से समय का उपयोग करना चाहिए।

  • समय धन से भी ज्यादा कीमती है; क्योंकि यदि धन को खर्च कर दिया जाए तो यह वापस प्राप्त किया जा सकता है लेकिन  यदि हम एक बार समय को गंवा देते हैं, तो इसे वापस प्राप्त नहीं कर सकते हैं।

समय के बारे में एक सामान्य कहावत है कि, “समय और ज्वार-भाटा कभी किसी की प्रतीक्षा नहीं करते हैं।”

यह बिल्कुल पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व की तरह ही सत्य है, अर्थात्, जिस तरह से पृथ्वी पर जीवन का होना सत्य है, ठीक उसी तरह से यह कहावत भी बिल्कुल सत्य है। समय बिना किसी रुकावट के निरंतर चलता रहता है। यह कभी किसी की प्रतिक्षा नहीं करता है।

  • यदि समय उपलब्धि की मुद्रा है, तो उतने ही समय को ख़र्च करके कुछ लोग हमसे अधिक लाभ कैसे कमा लेते हैं ? उत्तर है कि वैसे लोग काम की गहराई में जाते हैं, जो उनके नज़रिये का मर्म है ।
    वे छोटी-छोटी चीज़ों पर ध्यान केन्द्रित करते हैं। हमें सफलता के लिए सटीक मौक़ा पाने की चाहत हो, तो हमारा तरीक़ा, हमारा नजरीया भी इसी तरह का होना चाहिए। ‘छोटी- छोटी चीज़ों’ पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करें…

इस सन्दर्भ में मैंने एक कहानी पढी थी जिसे सुनाना चाहता हूँ..

एक शहर में एक अमीर व्यक्ति रहता था | उस व्यक्ति ने अपना सारा जीवन पैसे कमाने में  लगा दिया था | उसके पास इतना धन हो गया था कि वह उस शहर को भी खरीद सकता था लेकिन उसने अपने पूरे जीवन भर में किसी की भी आर्थिक सहायता नही की थी |

वह अक्सर अपने बैंक बैलेंस पर फूला नही समाता था और खुद के कमाए धन पर हमेसा गर्व महसूस करता था |

लेकिन कभी भी इन कमाए हुए धन का इस्तेमाल अपने ऊपर नही किया यहाँ तक की उसने इन पैसो से कभी भी अपने मन मुताबिक कपड़े,  भोजन या अन्य इच्छाओ पर खर्च नही किया |

वह धन अर्जित करने में इतना मशगुल रहा कि उसे पता ही नही चला कि वह बूढा हो गया है और जीवन के आखिरी पड़ाव पर आ चूका है.

और इस तरह एक रात उस व्यक्ति के जीवन का अंत भी आ गया | यमराज ने  उसके प्राण लेने आ गये | यमराज को  देखकर वह व्यक्ति सहम गया, तब यमराज ने कहा – अब आपका जीवन का समय खत्म हो चूका है ….अब मेरे साथ चलना होंगा. |

जिसे सुनकर वह व्यक्ति चिंतित होते हुए सो बोला – “प्रभु अभी तो मैंने अपना जीवन भी नही जीया है | मै तो सिर्फ अपने काम करने में ही व्यस्त था |

मुझे अपने धन दौलत का उपयोग करने के लिए कुछ समय चाहिए क्योंकि इन दौलत को मैंने काफी वर्षो के मेहनत के बाद कमाया है |

फिर यमराज ने कहा –  “नही मै तुम्हे और समय नही दे सकता हूँ | जीवन का समय निश्चित है जो की बढाई नही जा सकती है”

फिर उस व्यक्ति ने कहा – “प्रभु देखिये मेरे पास इतना धन है | आप चाहो तो इस धन का आधा हिस्सा ले लीजिये लेकिन मुझे जीवन जीने के लिए एक वर्ष और दे दीजिये” |

इस पर यमराज ने कहा – “यह कदापि सम्भव नही है”

फिर वह व्यक्ति बोला – “प्रभु आप चाहो तो मेरे धन का 90% ले ले लेकिन मुझे जीवन के लिए 1 महीने का समय दे दे”

फिर यमराज ने गुस्सा होते हुए कहा… यह हमारे वश में नहीं है |

पुनः वह व्यक्ति गिडगिडाते हुए कहा – प्रभु आप चाहो तो मेरे सारे धन ले लो,  लेकिन मुझे सिर्फ 1 घंटे और दे दीजिये. |

इस पर यमराज ने कहा – “आप अपने जीवन के कीमती समय को धन से कभी खरीद नही सकते है एक बार जो वक्त चला जाता है उसे किसी भी धन से वापस दुबारा नही लाया जा सकता है |”

इस प्रकार उस व्यक्ति को जिसे अब तक अपने धन पर बड़ा अभिमान था उसे आज यह धन दौलत सब व्यर्थ लगने लगा था |

आज उसे महसूस हो रहा था कि जिस बहुमूल्य समय को उसने धन कमाने में बिता दिया, आज उसे धन को खर्च करके भी उस समय को वापस नहीं पा सकता है. |…

वह  दुखी मन से पछताते हुए बोला – ठीक है प्रभु जैसी आपकी आज्ञा, लेकिन मेरी आखिरी इच्छा पूरी कीजिये. |

जिसे यमराज ने स्वीकार कर लिया.

फिर उस व्यक्ति ने अपने शहर वासियों के लिए एक पैगाम लिखा ..– मैंने जिस धन को कमाने के लिए पूरी जीवन बीता  दिया …  आज वही धन मेरे जीवन के 1 सेकंड को भी खरीद नही सकता  है |

 इसलिए आप सभी अपने जीवन के इस बहुमूल्य समय को जीवन जीने में बिताये |

जीवन भगवान् का दिया हुआ वो बहुमूल्य उपहार है जिसे दुसरो के मदद  करने में लगाए ताकि आप अपने जीवन को सार्थक बना सके |..

और इस प्रकार वह व्यक्ति जीवन के आखिरी क्षणों में जाते जाते सबकी आँखें  खोल गया ….

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Categories: motivational

6 replies

  1. Very true, whether rich or poor, we have the same amount of time!

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  2. Time is precious. Good thought. Nice

    Liked by 1 person

  3. Thank you for your comments..
    Stay connected and stay happy..

    Like

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