धुंध की दीवार -2

वक़्त सीखा देता है इंसान को ..फलसफा ज़िन्दगी का ,

फिर तो, नसीब क्या, लकीर क्या और तकदीर क्या

ऐसा भयावह दृश्य देख कर इस ठण्ड के मौसम में भी आनंद के चेहरे पर पसीने की बुँदे बिखर गयी | उसके हाथ पैर काँप रहे थे | कभी वह तड़पते हुए अपनी माँ को देखता तो कभी अपनी बहन के माथे से निकल रही खून को |

उसके मन में इतनी पीड़ा हो रही थी कि वह बच्चो की तरह फुट फुट कर रोने लगा |

तभी दोस्तों ने आनंद को हिम्मत बंधाई और तुरंत उनलोगों को हॉस्पिटल ले चलने की सलाह दी |

फ़ोन करने पर एम्बुलेंस  भी तुरंत ही आ गया और वे लोग मिल कर माँ और  उसकी बहन को लेकर हॉस्पिटल की ओर तुरंत रवाना हो गए |

हॉस्पिटल में डॉक्टर ने उनके तुरंत इलाज करने के बजाये कहा कि यह पुलिस का मामला है, अतः पहले पुलिस को खबर करना होगा |

कुछ देर इंतज़ार के बाद में पुलिस भी आ गयी और उसने आवश्यक कार्यवाही की और फिर डॉक्टर ने उनलोगों का इलाज़ शुरू किया |

लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन दोनों को जांच करने के बाद मृत घोषित कर दिया |

आनंद को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्यों और कैसे हो गया | उसकी हालत ऐसी थी कि वह पुलिस के सवाल का ठीक ठीक जवाब भी नहीं दे पा रहा था |

तभी पुलिस ने उन सबों को लेकर आनंद के घर पर आ गयी ताकि आगे की तहकीकात की जा सके |

source :: google.com

आनंद के घर के आगे काफी भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी और लोग अपने अपने तरह से इस घटना पर अपनी टिपण्णी दे रहे थे और शंकाएं भी व्यक्त कर रहे थे |

तभी पुलिस ने धर्मराज जी के बारे में खोज बिन की, क्योकि वो वहाँ नज़र नहीं आ रहे थे | अगल – बगल रहने वालों ने बताया कि उन्होंने पिस्टल की आवाज़ तो सुनी थी लेकिन धर्मराज जी को किसी ने  देखा  नहीं था |

घर में चारो तरफ खोज बिन शुरू हुई तो एक कमरा अंदर से बंद पाया गया |

पुलिस को कुछ शंका हुई और उसने दरवाज़ा को खटखटाया, और जब अंदर से कोई आवाज़  नहीं आयी तो पुलिस ने दरवाज़े को तोड़ दिया |

अंदर कमरे का दृश्य  तो और भी भयावह था | फर्श पर धर्मराज जी के लाश पड़ी थी और उनके माथे से खून बह रहा था , शायद उन्हेंने खुद ही अपने सिर में गोली मार ली थी |

लेकिन पुलिस के लिए यह पुरे परिवार की हत्या एक रहस्य बन गया था, जिसकी गुत्थी सुलझनी अभी  बाकी थी |

पुलिस  ने इस घटना के बारे में आनंद और उसके दोस्तों के बयान  दर्ज किये और  धर्मराज जी की लाश को भी  पोस्ट-मार्टम के लिए भेज दिया |

चूँकि  आनंद और उसके दोस्तों की मानसिक  स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए पुलिस ने  अगले दिन सभी को आवश्यक पूछ ताछ करने के लिए थाना आने का निर्देश  दिया | उसके बाद पुलिस वाले वापस लौट गए |

आनंद को इस घटना से बहुत बड़ा सदमा लगा था | वह तो अपने को फिल्मो में लॉन्च होने की तैयारी कर रहा था लेकिन इस बीच  घटी इस घटना ने उसे  दुनिया में बिलकुल अकेला कर दिया |

उसकी स्थिति पागलो जैसी हो गयी  | अगले दिन वह पुलिस के सामने उलटी सीधी हरकतें  करने लगा  और यह केस सुलझने  के बजाए  और उलझने लगा |

पुलिस आनंद की ऐसी मानसिक हालत को देख कर उसे मानसिक रोगियों के हॉस्पिटल में भर्ती  करा  दिया |

पुलिस अपनी  तहकीकात जारी रखी  और धर्मराज जी के पिछली ज़िन्दगी से जुड़ीं  सारे  तथ्य  इकट्ठे करने में लग गई |…

लेकिन बहुत सारे छान – बिन और पूछ ताछ के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर पहुँच नहीं सकी |

हालाँकि लोग अपने अपने तरह से इस घटना के बारे में अनुमान लगा रहे थे .. कुछ लोग का विचार था कि .. धर्मराज  जी  लगातार उनकी फिल्मे फ्लॉप होने से तनाव में रहते थे और मानसिक असंतुलन के कारण ही सबों को गोली मार दी और खुद भी अपने को शूट कर लिया होगा |

दूसरा  अनुमान यह भी लगाया जा रहा था कि उनका किसी और औरत से चक्कर चल रहा था और जिससे बारे में उनकी पत्नी को पता चल चूका था | इस  बात को लेकर  उन दोनों में  हमेशा झगडे होते रहते थे | इस  फ़िल्मी नगरी में ऐसा होना आम बात है |

घटना वाले दिन पत्नी के ज्यादा विरोध करने पर वे अपने गुस्से को काबू में नहीं रख सके और उन्होंने ऐसी घटना को अंजाम दे दी |

लेकिन पुलिस तो  इस एंगल से भी विचार कर रही थी कि हो सकता है यह मामला सुसाइड का ना होकर,  किसी ने उनसे रंजिश के चलते इनके पुरे परिवार को ख़त्म कर दिया है |

यहाँ इस फ़िल्मी नगरी में जहाँ डॉन लोगों का एक सामानांतर व्यवस्था चलती है और ये लोग फिल्म  निर्माताओं से बड़ी रकम की डिमांड करते रहते है |

चूँकि धर्मराज  जी की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी थी,  इसलिए उन डॉन लोगों की डिमांड पूरी नहीं करने की स्थिति में उनलोगों ने ही इस घटना को अंजाम दिया होगा |

पुलिस इस केस से जुडी सारी तथ्यों की  तहकीकात कर रही थी |

इसी बीच आनंद की एक गर्ल फ्रेंड थी जो विदेश में अपने शूटिंग  के लिए गयी हुई थी | उसे जब इस घटना के बारे में पता चला  तो वह भी शूटिंग  समाप्त होते ही वापस आ गयी और  आनंद को ऐसी हालत में देख कर उसे बहुत दुःख हुआ |

वह आनंद को मानसिक हॉस्पिटल से वापस उसे अपने घर ले आयी |

उसने कुछ दिनों के लिए उसने अपना सारा शूटिंग  कैंसिल कर दिया और आनंद का हर तरह से ध्यान रखने लगी |

इस प्रकार कुछ दिनों  के प्रयास से आनंद इस सदमे से उबरने लगा | लेकिन उसके पास न तो  कोई काम था और न ही पैसे  | वह अपने को ज़िन्दगी से हारे हुए जुआरी की तरह महसूस कर रहा था |

एक बार तो उसके मन में आया कि जब परिवार ही नहीं बचा और सब कुछ लुट ही गया है तो ऐसी ज़िन्दगी जीने से क्या फायदा |

ऐसी नकारात्मक सोच के कारण उसने अपनी ज़िन्दगी समाप्त करने की कोशिश भी की | लेकिन ठीक येन वक़्त पर उसकी गर्ल फ्रेंड, निशा  ने  उसे बचा लिया और उसे हर तरह से समझया और उसकी काउन्सलिंग करने  लगी ताकि मानसिक संतुलन ठीक हो सके |

कुछ लोगों ने सलाह दी कि अगर आनंद को फिल्मों में काम मिल जाए तो उसका दिमाग  अपने काम में लगा रहेगा और तब  मानसिक असंतुलन से ज़ल्द उबर  पाएगा |

उसकी गर्ल फ्रेंड निशा उसे बहुत प्यार करती थी और वह आनंद के  लिए कुछ भी करने को तैयार थी | उसने मन ही मन फैसला किया कि  किसी तरह अपने जान पहचान के निर्माताओं से इस विषय में बात कर  उसे ज़ल्द ही फिल्मो में लॉन्च करने की कोशिश करेगी |

इस बीच दोनों पुलिस की तहकीकात से भी काफी परेशानी का सामना कर रहे थे | पुलिस ने तो आनंद को अपने घर पर ही रहने का  निर्देश दिया ताकि इस केस की तहकीकात ठीक ढंग से हो सके |

ऐसी परिस्थिति में निशा ने आनंद को उसके घर पर ही शिफ्ट कर दिया और खुद भी उसके साथ ही रहने लगी | निशा के अथक प्रयास से आनंद का स्वास्थ  धीरे धीरे सुधरने   लगा | जिसे देख मिशा को ख़ुशी हो रही थी |

तभी एक अच्छी घटना घटी | एक नमी गिरामी  निर्माता आनंद के घर पर दस्तक दिया और उसने आनंद को बताया कि वे उसके पिता के करीबी दोस्त है |

वे एक फिल्म बना रहे है जिसमे वह अपनी बेटी को बतौर हेरोइन लॉन्च करने जा रहे है | इस फिल्म के लिए एक नए हीरो की ज़रुरत है और कुछ दिनों पूर्व ही आपके  स्वर्गीय पिता धर्मराज जी से भी इस विषय में बात हुई थी |

निशा और आनंद के लिए इससे अच्छा मौका और क्या हो सकता था |  निशा ने तुरंत उस निर्माता के प्रपोजल को आनंद के लिए मंज़ूर कर लिया और उस निर्माता से  ज़ल्द ही फिल्म शुरू करने का आग्रह  भी किया |

एक तरह से फिल्म से जुडी सारी बातों पर सहमती हो  गयी और स्क्रीन टेस्ट के लिए दुसरे दिन ही आनंद को स्टूडियो में आने को कहा गया |….. (क्रमशः)

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

4 thoughts on “धुंध की दीवार -2

  1. बहुत बहुत धन्यवाद ..
    आप ब्लॉग की दूसरी कहानी भी पढ़े…मुझे ख़ुशी होगी..|

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