किस्मत की लकीरें – 11

अपने हौसले को यह मत बताओ कि तुम्हारी परेशानी कितनी बड़ी है,

अपनी परेशानी को यह बताओ कि तुम्हारा हौसला कितना बड़ा है ..

उन पाँच खतरनाक अपराधियों के मारे जाने की खबर चारो  तरह आग की तरह फ़ैल गयी | खबर पाकर आम  जनता और  व्यापारी वर्ग  में  ख़ुशी की लहर दौड़ गयी |

घटनास्थल पर लोगों की भीड़ लग गयी | सभी लोग कालिंदी के साहसिक कारनामे की प्रशंसा कर रहे थे |

और इसी बीच कालिंदी ने अपने ही ड्राईवर को अपराधियों को सुचना पहुँचाने के जुर्म में गिरफ्तार  कर लिया | उससे पूछ ताछ में थोड़ी ही सख्ती की गयी तो उसने  सच्चाई तुरंत ही बयान कर दिया |

उसने कबूल किया कि वह पैसों के लालच में यहाँ की सूचनाएं उन तक पहुँचाता था |

सभी लोग घटनास्थल पर आवश्यक कार्यवाही करने के बाद वापस लौट आये | कालिंदी ने राहत  की सांस ली कि अब हमारे डिपार्टमेंट में  किसी की हिम्मत नहीं होगी कि हमारे गुप्त कार्यवाही की अग्रिम सुचना किसी अपराधी को दे पाए |

दुसरे दिन अखबार की सुर्खियाँ कालिंदी के नाम ही थी | अपराधियों को चकमा देने और अपनी सूझ बुझ से उन लोगों को  ठिकाने लगाने के लिए बड़े साहब ने भी बधाई दी |

कालिंदी एक एक कर अपराधियों  का सफाया करती रही | हाँ, इसमें गुप्त सुचना देने वाले उस  इंसान की अहम भूमिका रहती थी | उसने तो कितने मौकों पर कालिंदी को चौकन्ना किया जिससे हर बार वह मौत के मुँह से निकल जाती थी |

कालिंदी अब उससे मिलने के लिए मौके की तलाश कर रही थी | पता  नहीं क्यों  उस व्यक्ति के लिए  कालिंदी के दिल में एक अजीब बेचैनी महसूस  होने लगी |

यह सच है कि उसके बारे में ज्यादा कुछ भी नहीं जानती है फिर भी उसके लिए एक अनजाना बंधन महसूस किया करती है |

वह अपने ऑफिस में बैठे चाय पी रही थी और मन में यही सब बातें चल रही थी तभी उसके मोबाइल की घंटी बज उठी …  कालिंदी, जैसे ही मोबाइल पर उसकी आवाज़ सुनी तो वह चौक गयी और कहा ….क्या बात है,,  इस बार आपने बधाई देने में देर कर दी |

नहीं मैडम , मैंने देर नहीं किया है, बल्कि मैं यह पता लगा रहा था कि उन अपराधियों का अगला कदम क्या होगा | वे लोग अब आर पार की लड़ाई लड़ना चाहते है |

इतने दिनों का बनाया हुआ उनका साम्राज्य इतनी आसानी से समाप्त नहीं होने देंगे | इसलिए आप अभी भी चौकन्ना रहें |

तभी कालिंदी ने उससे कहा … मैं आपसे  मिलना चाहती हूँ | मिलने का और आपको देखने का मुझे भी बहुत मन करता है |

लेकिन मैडम, इससे आपका  खतरा और  बढ़ जायेगा | और मैं आपको हमेशा सलामत देखना चाहता हूँ | अगर भगवान् की मर्ज़ी होगी तो आप की इच्छा ज़रूर पूरी होगी |  इतना बोल कर उसने ज़ल्दी से फ़ोन काट दिया |

और इस तरह देखते देखते साल भर गुज़र गए   …

पुलिस को अपराधियों से आँख मिचौली खेलते हुए एक साल गुज़र गया | कालिंदी के अथक प्रयास और सूझ बुझ  से इलाके में अमन और शांति कायम हो गयी |

परन्तु कालिंदी के मन में हमेशा अशांति बनी रही | वह उस युवक से एक बार मिल कर अपने दिल की बात कहना चाहती थी, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी ऐसा मौका नहीं मिल सका था |

अचानक घर से माँ का फ़ोन आया | उन्होंने कालिंदी से कहा …तुम्हारे पिताजी यहाँ आये हुए है | शाम को ज़ल्दी घर आने की कोशिश करना |

माँ का सन्देश पाकर कालिंदी बहुत खुश हुई | आज पहली बार पिता जी यहाँ आये थे और बहुत दिनों के बाद मौका मिला है कि परिवार के सभी लोग  एक साथ मिल कर रात का भोजन करेंगे |

कालिंदी घर पहुँचते ही पिता जी के पैर छू कर आशीर्वाद लिया | पिता जी इतने दिनों में पहली बार यहाँ आये थे | शायद कालिंदी के शादी की बात उससे करना चाहते थे |

सभी लोग  एक साथ रात का भोजन कर रहे थे तभी माँ ने कालिंदी की ओर देखते हुए कहा …तुम्हारे पिता जी कह रहे है कि एक बहुत ही अच्छा रिश्ता तुम्हारे लिए आया है | लड़का IAS ऑफिसर है उसके पिता तुम्हारे पिता के बचपन के मित्र है | इसलिए वे लोग रिश्ता बनाना चाहते है | पिताजी तुम्हारी  अपनी राय जानना चाहते है |

कालिंदी कुछ बोलना चाह रही थी तभी उसके फ़ोन की घंटी बजने लगी |

कालिंदी ने फ़ोन का नम्बर देखा तो हडबडा कर बोली … सर, मैं कालिंदी बोल रही हूँ | आपने इतनी रात में फ़ोन किया तो मैं घबरा गयी कि फिर कही कुछ अप्रिय  घटना तो नहीं हुई है |

नहीं नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है | मैंने  तो तुम्हे बधाई देने के लिए फ़ोन किया है …बड़े साहब ने हँसते हुए कहा |

किस बात की बधाई सर ? …..कालिंदी आश्चर्य प्रकट करते हुए पूछी |

कालिंदी, तुम्हारा प्रमोशन हो गया है | अभी अभी खबर आयी है कि तुम अब S P बन गयी हो | और अब तुम हमारे कुर्सी पर बैठोगी |

यह आप क्या कह रहें है सर, आप की जगह मैं  कैसे ले सकती हूँ ..कालिंदी हडबडा कर बोली |

तुम सही सुन रही हो, कालिंदी |

क्योकि मेरा भी प्रमोशन हो गया है और मुझे होम मिनिस्ट्री में कल ही ज्वाइन करने के लिए बुलाया गया है …बड़े साहब कालिंदी की जिज्ञासा शांत करते हुए कहा |

मुबारक हो सर,  आपके प्रमोशन की खबर पाकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई | आपके मार्गदर्शन में काम करके मुझे  हमेशा ही  ख़ुशी का एहसास हुआ है |

लेकिन कल ही तुम्हे मेरी जगह ज्वाइन करनी होगी और मुझसे  कार्यभार ग्रहण करना होगा .. बड़े साहब ने निर्देश देते हुए कहा |

ठीक है सर, मैं कल सुबह ऑफिस में हाज़िर हो जाउंगी …. कालिंदी ने साहब को बोल कर फ़ोन बंद कर दिया |

वह जैसे ही वापस खाने के टेबल पर आई, पिता जी ने उसे बधाई देते हुए कहा … तुमने अपनी जान की परवाह ना करते हुए जो मिहनत और लगन से अपने कर्त्तव्य का पालन किया है उसका यह फल मिला और तुम्हारा प्रमोशन SP के पद पर हुआ है  |

जी पिता जी, आप का यहाँ आना मेरे लिए शुभ रहा | आपका आशीर्वाद सदा मुझे निर्भय होकर अपने कर्त्तव्य पालन करने को प्रेरित करता है .. कालिंदी खुश होते हुए पिताजी से कहा |

तभी माँ बीच  में ही  बोल पड़ी.. .तो लगे हाथ शादी के लिए भी हाँ कर दो कालिंदी |

नहीं माँ,  अभी नया कार्यभार  मुझे सौपा जा रहा है इसलिए कुछ दिनों तक काफी व्यस्तता रहेगी | ऐसे में अभी अपनी शादी की बात सोच भी नहीं सकती |

तुम ठीक कहती हो बेटी, अभी प्रमोशन होने से निश्चय ही तुम्हारी जिम्मेवारी बढ़ गयी है | इसलिए मैं कुछ दिन और इंतज़ार कर लेता हूँ | फिर तुम्हे मेरी बात माननी होगी …पिता जी ने कहा |

कालिंदी भोजन समाप्त कर सीधे अपने पूजा घर में गयी और माँ दुर्गा की मूर्ति के सामने अपना  मस्तक झुका कर माँ दुर्गा को प्रणाम कर मन ही मन बोली… माँ, मुझे तुमसे ही प्रेरणा मिलती है | मैं  आने वाले समय में भी अच्छी तरह अपने कार्ताव्यों का निर्वाह कर सकूँ ऐसी आशीर्वाद दो माँ |

माँ भी पीछे पीछे आ गयी और कालिंदी के सिर पर प्यार से हाथ रखते हुए कहा ….माँ दुर्गा , सब की माँ है तुम्हारी रक्षा वही तो करती है | उनका आशीर्वाद तुम पर हमेशा बना रहेगा |

कालिंदी माँ के भी पैर छू कर आशीर्वाद लिया , फिर कालिंदी देर रात तक पिताजी से बातें करती रही |

सुबह सुबह कालिंदी जिला मुख्यालय जाने के लिए तैयार हो रही थी तभी माँ ने  उस  IAS ऑफिसर लड़के की फोटो कालिंदी को देते हुए बोली …यह लड़का तो कलेक्टर बन गया है | जब फुर्सत मिले तो इस लड़के से अपनी शादी के लिए विचार करना |

कालिंदी ने  माँ से फोटो लेकर उस पर एक नज़र डाली. … लेकिन तभी उस गुप्त सुचना देने वाले इंसान की उसे याद आ गयी और कालिंदी उस फोटो को देख कर कुछ भी टिपण्णी नहीं की और माँ को फोटो वापस करते हुए बोली…अभी इसे तुम ही अपने पास रखो |

(क्रमश..)

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