कितना भी पकड़ लो, ….फिसलता ज़रूर है ये वक़्त है साहब ….बदलता ज़रूर है … काफी लोगों की भीड़ वहाँ इकट्ठी हो चुकी थी. | सभी लोगों को ऐसा लग रहा था कि खदान में ज़ल्द ही पानी भर जायेगा … Continue reading किस्मत की लकीरें …7
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