किस्मत की लकीरें – 4

मुड़ जाती है हाथों की लकीरें

गर हिम्मत है तूफानों से लड़ने की

होते होते पीछे ही हो जाते है

बात जो हमेशा करते किस्मत की …

 कालिंदी को पता चला कि दिल्ली में UPSC का इंटरव्यू शुरू हो गया है, तो वह चिंतित हो उठी , क्योकि उसका इंटरव्यू लेटर अभी तक प्राप्त नहीं हो सका था |

उसने पिता जी को फ़ोन किया और घबड़ाते  हुए पिता जी को सारी बातें बता दी | उसने यह भी कहा कि शायद मेरा इंटरव्यू – लेटर किसी ने गायब कर दिया है |

उसे पूरा शक हो रहा था कि प्रोफेसर साहेब तो नाराज़ है ही,  उन्होंने ही ऐसी गन्दी हरकत की होगी | हालाँकि, कोई सबूत के आभाव में उन पर आरोप लगाना अभी उचित नहीं होगा |

कालिंदी के  मन में तेज़ी से ऐसे  विचार उठ रहे थे तभी पिता जी की फ़ोन पर आवाज़ सुनकर उसका ध्यान पिता जी की बातों पर चला गया |

पिता जी ने कहा …तुम्हे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है बेटी | तुम दिल्ली चलने की तैयारी करो,  तुम्हे मेरे साथ कल ही प्रस्थान करना होगा | मैं आज ही अपने बैंक से छुट्टी ले लेता हूँ |

कालिंदी को पिता जी की बात सही लगी और उसने पिता जी से कहा …जी पिता जी, कल ही हमलोग को जाना चाहिए ताकि मेरी इंटरव्यू की सही जानकारी प्राप्त हो सके |

अगले दिन ही कालिंदी पिता जी के साथ इंटरव्यू स्थल पर पहुँच गयी और वहाँ के अधिकारी से अपने इंटरव्यू लेटर न मिलने की शिकायत की |

अधिकारी अपने रिकॉर्ड की जांच कर कालिंदी से कहा …. आपका इंटरव्यू लेटर यहाँ से सही समय पर dispatch हुआ है और वहाँ किसी ने रिसीव भी किया है |

इतना सुनना था कि कालिंदी को बहुत जोर का गुस्सा आया और उसे पूरा यकीन हो गया कि यह गन्दी  हरकत उसी प्रोफेसर ने की होगी | लेकिन यहाँ गुस्सा  करने से क्या होगा ..वो मन ही मन सोचने लगी |

तभी उस अधिकारी ने अचानक कालिंदी से कहा …. आप का तो  आज ही इंटरव्यू है | अच्छा हुआ आप समय पर आ गयी वर्ना आपका नुक्सान हो जाता |

आप जल्दी से conference हॉल में पधारे जहाँ और सभी प्रतिभागी अपने इंटरव्यू का इंतज़ार कर रहे है |

कालिंदी उस अधिकारी की बात सुन कर एकदम से घबरा गयी | वह तो इस समय मानसिक रूप से अपने को इंटरव्यू के लिए तैयार नहीं कर पाई थी |

तभी बाबू जी उसको समझाते हुए कहा. .. तुम तो पहले से ही तैयारी कर चुकी हो , बस हिम्मत से काम लो और शांत मन से  इंटरव्यू का सामना करो | मेरी शुभकामना तुम्हारे साथ है |

पिता जी की बात सुनकर कालिंदी को थोड़ी राहत महसूस हुई और वह पिता जी के पैर छू कर आशीर्वाद  ली |  वह भगवान् का नाम लेते हुए इंटरव्यू हॉल में पहुँच गयी |

कालिंदी को घबराहट हो रही थी |  

उसने वहाँ रखे फ़िल्टर से पानी लेकर पिया और मन को शांत करने की कोशिश करने लगी |

तभी उसके लिए कॉफ़ी आ गई | कॉफ़ी देख कर कालिंदी खुश हो गई | उसे इस समय कॉफ़ी की सख्त ज़रुरत थी |

वह वहाँ पड़ी कुर्सी पर बैठ कर कॉफ़ी के एक एक सिप का मज़ा लेने लगी | अब उसके चेहरे पर डर  के भाव कुछ कम हुए,  तभी कालिंदी का नाम announce हुआ और अगले ही  पल वह इंटरव्यू बोर्ड के सामने बैठी थी |

इंटरव्यू में  उसके पढाई की हुई सब्जेक्ट से सम्बंधित बहुत सारे प्रश्न पूछे गए जिसका बखूबी से वह उत्तर देती रही |

उसका इंटरव्यू अच्छा जा रहा था, इसलिए उसका आत्म – विश्वास काफी बढ़ गया था |

तभी अचानक उससे एक व्यक्तिगत प्रश्न पूछा गया …आप अगर यहाँ सफल हो जाती है तो इसका श्रेय किसे देना चाहेंगी ?

कालिंदी बिना एक पल रुके ही कहा … सबसे पहले तो पिता जी को इसका श्रेय दूंगी और फिर समाज के उन लोगों को भी श्रेय  दूंगी जिन्होंने समय समय पर मुझे  ताने दिए और मुझे कुरूप समझ कर मेरा उपहास उड़ाते रहे. |

उसी के प्रतिशोध  में मैंने अपने आप को मजबूत  और काबिल बनाया ताकि एक ऊँचा मुकाम हासिल कर सकूँ और उन लोगों को उचित जबाब दे सकूँ |

इंटरव्यू ले रहे लोग कालिंदी की बातों से काफी प्रभावित हुए और कालिंदी भी अपने इंटरव्यू से संतोष महसूस कर रही थी |

तभी इंटरव्यू बोर्ड के एक मेम्बर ने पूछा…अच्छा कालिंदी जी, आप के जीवन के उद्देश्य क्या है ?

प्रश्न सुन कर कालिंदी के चेहरे पर गंभीरता आ गयी |

उसके कहा …अगर मुझे मौका मिला तो मैं आईएएस को छोड़ आईपीएस की नौकरी पसंद करुँगी |

मेरे ज़िन्दगी का मकसद है कि समाज में जो दबे – कुचले लोग हैं जिन्हें लड़की या औरत होने के कारण ना तो बराबरी का हक़ मिलता है ..और ना ही आगे बढ़ने का अवसर |

उनके बेहतरी के लिए काम करूँ | उनके शोषण के खिलाफ एक मिशन छेड़ दूँ  ताकि उन पर ज़ुल्म करने वाले लोगों के मन में एक डर पैदा  हो |

और इस तरह आये दिन उनके ऊपर होने वाले जुल्म और होने वाले वारदात को रोक सकूँ |

कालिंदी से इस तरह के साहसिक उत्तर की  अपेक्षा बोर्ड को नहीं थी ..उसके बातों से बोर्ड के सारे सदस्य काफी प्रभावित नज़र आ रहे थे  |

इंटरव्यू समाप्त कर  कालिंदी सीधे अपने पिता जी के पास आई और उनके  पैर छु कर खुश होते हुए कहा… पिता जी, आप का आशर्वाद काम आया | मेरा इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ है |

पिता जी उसके सिर पर प्यार से हाथ रखा और खुश होते हुए कहा… मुझे तुम पर  गर्व है बेटी | एक दिन तुम अवश्य ही ऊँचा मुकाम हासिल करोगी |

सात दिनों के बाद,  

आज घर में गहमा गहमी थी, कुछ नजदीकी सगे सम्बन्धी भी घर पर आये हुए थे | कल से फ़ोन पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था |

कालिंदी  के आँखों में गजब की चमक दिख रही थी |

वह बहुत खुश दिख रही थी  और वह खुश हो भी क्यों नहीं ….उसका जीवन का सबसे बड़ा सपना  जो पूरा हो गया था | उसे UPSC में ना सिर्फ सफलता ही मिली  बल्कि  मनचाहा ब्रांच आईपीएस भी मिल गया |

वह अपने स्टडी टेबल पर बैठी इन्ही सब बातों में खोई थी तभी उसके फ़ोन की घंटी बज उठी |

कालिंदी की नज़र जैसे ही मोबाइल स्क्रीन पर पड़ी तो वह चौक गयी,  फ़ोन प्रोफेसर साहेब ने किया था |

कालिंदी जैसे ही फ़ोन उठाया तो प्रोफेसर साहेब ने कहा ….हेल्लो कालिंदी, बधाई हो, तुम्हारी मेहनत और लगन का अच्छा फल मिला | इसमें मेरा भी योगदान है |

कालिंदी ने धीरे से कहा ….जी. थैंक यू सर |

हालाँकि प्रोफेसर साहेब कालिंदी से नफरत करते थे और उसे परेशान करने का कोई ना  कोई षड़यंत्र करते रहते थे |

उन्होंने इंटरव्यू लेटर गायब कर अपनी तरफ से कालिंदी को हानि पहुँचाने की कोशिश कर चुके थे |  लेकिन ऊपर से शुभचिंतक होने का दिखावा करते थे |

कालिंदी को यह बात भली-भांति पता थी | उसे इंटरव्यू लेटर वाली बात याद आते ही उसका मन प्रोफेसर के प्रति घृणा की भावना से भर गयी और वह फ़ोन पर ही उन्हें भला बुरा कहना चाहती थी |

तभी पिता जी, जो पास में ही खड़े थे , इशारे से कालिंदी को ऐसा करने से मना कर दिया |

कालिंदी ने प्रोफेसर साहब को धन्यवाद देकर फ़ोन काट दिया लेकिन उसके चेहरे पर नफरत  के भाव अभी भी दिख रहे थे |

तभी पिता जी ने कालिंदी को प्यार से समझाया और कहा …देखो बेटी, तुम अपने मिशन में सफल हो गयी हो | लेकिन अभी पूर्ण सफलता नहीं मिली है |  

अभी तो तुम्हे अपने काबिलियत  का लोहा मनवाना है और अपने जीवन के उद्देश्य पुरे करने है  |

इसलिए प्रोफेसर जैसे लोगों से इन छोटो छोटी बातों पर मत उलझो और अभी  आगे की प्लानिंग करो |

आप ठीक कहते है पिता जी … कालिंदी अपने गुस्से को त्याग कर कहा |

मुझे तो अपने जीवन के  उद्देश्य की अभी शुरुआत करनी है |  मुझे आशीर्वाद दीजिये पिता जी कि मैं अपने संकल्पों को पूरा कर सकूँ ..

(क्रमशः)

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