सकारात्मक विचार…9

गरीबों की सुनो

दोस्तों ,

मैं आशा करता हूँ कि आप सभी अपने अपने कामों में व्यस्त रहते हुए भी ज़िन्दगी का लुफ्त उठा रहे होंगे |

आज मैं आप सबों को शहर से दूर एक गाँव में ले चलता हूँ जहाँ रेलवे ट्रैक के किनारे बने हुए झुग्गी झोपड़ियों में रहने को विवश लोग किसी तरह अपना जीवन यापन करते है |

साधारणतया बहुत से घरों में फालतू के कपडे पड़े रहते है जिनका घर वालों के लिए कोई उपयोग नहीं होता है |

खास कर बच्चों के कपडे जो बहुत जल्द छोटे पड़ जाते है …और उपयोग से बाहर हो जाते है | …इन बचे हुए कपड़ों को घर वाले समझ नहीं पाते है कि इनका क्या करें |

 सच तो यह भी है कि इन सभी फालतू कपड़ो को घर में रखना भी संभव नहीं हो पाता है |

मैंने ने सोचा कि इसका सबसे अच्छा और उपयुक्त उपाय यह है कि इन्हें उन गरीबों में बाँट दिया जाए, जो कपड़ो के आभाव में अर्ध नग्न रहते है और ठण्ड में ठिठुरते रहते है |

चूँकि दिवाली  का समय था, और हमलोग अपने घरों की सफाई में व्यस्त थे | इसी दौरान यह विचार दिमाग में आया कि क्यों न हम सब भी अपने घरों से उपयोग में नहीं आने वाले कपडे एक जगह इकट्ठा करें और इन्हें ले जा कर रेलवे किनारे बसे झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों को बाँट दें …

बस फिर क्या था,  हमलोग यह सोच कर फालतू के सारे कपड़े  और अन्य सामान इकट्ठा किया और इन्हें लेकर झुग्गी – झोपडी एरिया में पहुँच गए …

यह कल्याणी के पास का  इलाका जहाँ हमलोगों ने देखा कि  15- 20  झुग्गी झोपडी रेलवे  ट्रैक के किनारे बनाकर लोग रहते है और किसी तरह अपना गुज़ारा करते है |

ठण्ड के मौसम में भी  किसी के तन पर  ठीक से कपडे नहीं थे |  

शायद इनका शरीर  इस ठण्ड के मौसम को भी झेल लेता है | इनका इम्युनिटी सिस्टम इतना मजबूत होता है कि इन्हें न मास्क की ज़रुरत है और ना सेनितिजर की | बच्चे मस्त होकर अध  नंगे वहाँ खेल रहे थे |

उनके चेहरे पर ख़ुशी थी, आधी पेट खा कर भी आनंद से जीना जानते है शायद  |

हमलोगों ने जैसे ही अपनी गाड़ी उनलोगों के पास रोकी,  …तो बच्चे ..बूढ़े .. औरत … मर्द सभी दौड़ कर हमलोग की गाड़ी के पास आ गए | उन्हें एहसास हो गया था कि उनके लिए हमलोग कुछ लेकर आये है |

हमलोगों ने जब अपने बैग से बांटने हेतु कपडे निकाले तो वे लोग लेने के लिए टूट पड़े और आपस में धक्का मुक्की करने लगे |

वैसे तो ये गरीब लोग सब साथ रहते है लेकिन इस ठण्ड के मौसम में अपने बच्चो के कपडे के लिए आपस में लड़ने को उतारू हो गए |

सबों के हाथ में कुछ कपडे मिले जिसे पाकर उनके चेहरे पर ख़ुशी बिखर गई | उनके चेहरे पर ख़ुशी देख कर हम सबों को भी एक  अजीब सा ख़ुशी का अनुभव हो रहा था |

मेरे मन में विचार आया कि क्यों ना समय – समय पर आकर इनलोगों की मदद की जाए |

मैंने वहीँ फैसला किया कि प्रत्येक सप्ताह यहाँ आऊंगा और उनके लिए कपड़ों के अलावा भी कुछ अन्य आवश्यक वस्तुएं और उनके खाने पीने  की कुछ पैकेट इनलोगों में वितरण करूँगा |

और इसी बहाने इनलोगों के बीच  साफ़ सफाई के बारे में और बिमारियों से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने और बच्चो की पढाई लिखाई के बारे में भी समझाने का प्रयास करूँगा |

हालाँकि मैं समझता हूँ कि यहाँ NGO लोग भी इस तरह की ज़रूर मदद करते होंगे |

लेकिन हम लोग भी इस नेक  काम में अपनी भागीदारी निभा कर और उनके लिए कुछ कर  के ना सिर्फ पुण्य कमा सकते है बल्कि एक आन्तरिक ख़ुशी भी महसूस कर सकते है

तो नए साल में मैंने इस तरह के कामों को समय समय पर करते रहने का निश्चय किया है ,…मेरे इस फैसले के बारे में आप की क्या राय है ….हमें कमेंट कर ज़रूर बताएं ….

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Published by vermavkv

I am Vijay Kumar Verma, residing in Kolkata, the city of joy. I was a Banker since December 1985 and retired in April 2017 from State Bank of India. After serving the Bank for 32 years as an officer holding different assignments from time to time, now I am currently enjoying the retired life. I would like to fulfil the duty of social service through this platform spreading aware about the health related problems and their remedies. I will also try to entertain my followers through knowledgeable information and motivate them to enjoy better and quality lifestyle. It is my endeavour to keep the post friendly and as informative as I can. I am willing to connect with my friends and followers, through my stories and drawings out of my passion to write and make sketches. I would like to create a trusted and joyful friend circle, and share tales from the past

11 thoughts on “सकारात्मक विचार…9

  1. बहुत अच्छा विचार है, आपको आनंद आ रहा है तो आप ईसे जरूर कीजिए, बहुत बहुत शुभकामनाएं।

    Liked by 1 person

    1. जी हाँ , जिस काम को करने में ख़ुशी हो और किसी का भला हो, वह कम ज़रूर करना चाहिए /
      बहुत बहुत धन्यवाद /

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  2. Good Noble act. Giving to those who need not only makes one feel good but also gives personal satisfaction and makes positive impact on health. But I also feel ‘neki kar dariya me daal’

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  3. यही करना चाहिए ,हम भी ग़रीबों में बांट देते हैं|उनको ज़्यादा ज़रुरत है बहुत ही नेक काम किया है आप लोगों ने

    Liked by 1 person

    1. जी बिलकुल ठीक कहा, इन छोटी छोटी बातों पर ध्यान देकर गरीबों की मदद
      कर सकते है /
      बहुत बहुत धन्यवाद /

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