सकारात्मक विचार …8

तेरा शुक्रिया है … 

दोस्तों…

वैसे तो हर कोई खुश रहना चाहता है लेकिन हकीकत में वह अक्सर परेशान और ज्यादातर दुखी ही रहता हैं।

वर्तमान स्थिति में चिंता और तनाव हमारे ज़िन्दगी का हिस्सा बन चूका है | इसका मुख्य कारण है कि हम उन चीजों के पीछे भागते रहते है जो मेरे पास नहीं है,|

 लेकिन जो मेरे पास  है उसकी  हम क़द्र ही नहीं करते है |

अगर अपने मन को थोडा सा  समझाया जा सके तो हम अपने दुखी मन को खुश रख  सकते है |

आइये, इसी सन्दर्भ में एक कहानी सुनाता हूँ …

एक बार की बात है कि एक व्यक्ति जो किसी कंपनी में जॉब करता था, लेकिन हमेशा अपने काम को लेकर  कुछ न कुछ परेशानियों में उलझा  रहता था |

शाम के वक़्त वह ऑफिस से निकल कर घर की ओर जा रहा था और वह मन ही मन सोच रहा था ..यह भी कोई ज़िन्दगी है ? हमेशा काम के कारण तनाव में रहता हूँ |

तभी रास्ते में एक भिखारी दिखा | जो सड़क के किनारे ठण्ड से ठिठुरते हुए भीख मांग रहा था |

 उसे देख कर उस व्यक्ति के मन में ख्याल आया,  मेरी ज़िन्दगी इस भिखारी से तो अच्छी है,  हाँ, मेरे ज़िन्दगी में थोड़ी सी परेशानी है तो क्या हुआ |

परन्तु इस भिखारी से तो अच्छी स्थिति में हूँ.. .. .यह सोच कर उसके चेहरे पर अचानक  मुस्कान बिखर गयी और उपर वाले को याद कर बोला… थैंक यू प्रभु, !

 आपने मुझे इस भिखारी से तो अच्छी ज़िन्दगी दी है |

वो भिखारी अपने दुखो के लिए भगवान् को कोसते रहता था ..तभी उस भिखारी ने सामने से गुज़रते हुए एक बीमार आदमी को देखा |

वह दर्द से कराह रहा था,  और लोग उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जा रहे थे |

भिखारी  की नज़र जब उस बीमार आदमी पर पड़ी , उसके दयनीय स्थिति को देख कर  उसने मन ही मन सोचा …मैं तो इस बीमार आदमी से अच्छी स्थिति में हूँ | मैं तो रोग मुक्त हूँ, हाँ थोड़े कष्ट है तो क्या हुआ |

फिर उसने भगवान् को अपने हाथ उठाकर कहा ….धन्यवाद प्रभु , आपने हमें इन सब बिमारियों से दूर रखा है |

उधर वह मरीज़ जो दर्द से कराह  रहा था और अपने कष्टों के लिए भगवान् को दोषी मांग रहा था …जब हॉस्पिटल पहुँचा तो वहाँ उसने एक मरे हुए इंसान को देखा |

उस लाश के पास खड़े उसके परिवार के लोग रो रहे थे |

तभी मरीज़ के मन में ख्याल आया कि मैं तो कम से कम उस मरे हुए व्यक्ति से तो अच्छा हूँ … मैं जिंदा तो हूँ ..और ऐसा सोचते ही उसका दर्द कम हो गया |

 उसने भगवान् को याद किया और उसे धन्यवाद देते हुए कहा… थैंक यू भगवान्,  मैं बीमार ज़रूर हूँ पर जिंदा तो  हूँ | ऐसा बोलते हुए वह खुश हो गया |

इस कहानी से बस यही निष्कर्ष निकाला  जा सकता है कि हर इंसान को भगवान् के प्रति  कृतज्ञ  होना चाहिए और यह सोचना चाहिए कि भगवान् ने उसे बहुत कुछ दिया है …थोड़े से दुःख साथ में है तो क्या हुआ ..आस पास बहुत सारे ऐसे लोग भी है जिनका दुःख उसके दुखों से बहुत ज्यादा है |

ज्यादातर लोग दुखी जीवन जी रहे है क्योकि वो भगवान् के प्रति आभार प्रकट करना भूल चुके है |  उनका ध्यान उन चीज़ पर होता है जो उनके पास नहीं है |

लेकिन सच तो यह है कि आप अपने को हमेशा खुश रख  सकते है, उन चीज़ों को महसूस कर के जो आप के पास है | 

आप अपने सकारात्मक सोच से मन को स्वस्थ रखेगे तो आपका तन भी स्वस्थ रहेगा

भगवान् ने जो भी दिया है हमारे खुश रहने के लिए काफी है | इसलिए हर परिस्थिति में खुश रहना सीखें.. और भगवान् को रोज़ शुक्रिया कहें …..

वो कौन है …. जो मुझे जगाया

वो तू ही तो है …वो तू ही तो है

जैिसे सबने भगवान् बताया ..

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